PESA
PESA
PESA अर्थात पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम 1996 पंचायत कानून को अनुसूचित क्षेत्रों तक जनजातीय स्वशासन के साथ विस्तारित करता है। झारखंड ने अपने PESA नियम केंद्रीय अधिनियम के लगभग पच्चीस वर्ष बाद ही अधिसूचित किए।
केंद्रीय अधिनियम — PESA 1996 | लागू — अनुसूचित क्षेत्रों में | राज्य के नियम लगभग 25 वर्ष बाद
PESA क्या है
- पूरा नाम — पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम 1996
- यह संविधान के भाग IX को संशोधनों के साथ अनुसूचित क्षेत्रों तक बढ़ाता है
- इसका मूल विचार है कि ग्राम सभा प्राथमिक संस्था है, कोई अधीनस्थ निकाय नहीं
- यह प्रथागत विधि, सामाजिक और धार्मिक प्रथा तथा पारंपरिक संसाधन प्रबंधन को मान्यता देता है
- यह केवल पांचवीं अनुसूची के तहत घोषित अनुसूचित क्षेत्रों में लागू होता है
- जमीन पर लागू होने के लिए राज्य सरकारों को अपने नियम बनाने पड़ते हैं
ग्राम सभा को मिली शक्तियां
- गांव की विकास योजनाओं की स्वीकृति और योजनाओं के लाभार्थियों का चयन
- गांव की सीमा के भीतर लघु वनोपज का प्रबंधनबार-बार पूछा जाता है
- लघु जल स्रोतों तथा कानून के अधीन लघु खनिजों पर नियंत्रण
- क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास से पहले परामर्श
- स्थानीय स्तर पर मादक पदार्थों की बिक्री और सेवन का नियमन
- भूमि हस्तांतरण रोकना और अवैध रूप से हस्तांतरित भूमि की वापसी कराना
- प्रथागत तरीकों से स्थानीय विवाद निपटाना और सामाजिक कुरीतियों पर कार्रवाई
झारखंड में PESA
- केंद्रीय अधिनियम 1996 का है, पर झारखंड ने नियम बहुत बाद में बनाए
- अधिसूचित नियमों के अनुसार PESA 13 जिलों में पूर्णतः और 3 में आंशिक रूप से लागू है
- यह देरी स्वयं लंबे समय तक राजनीतिक और जनजातीय शिकायत बनी रही
- PESA CNT और SPT अधिनियम तथा वन अधिकार अधिनियम के साथ चलता है
- यह जल, जंगल और जमीन के नारे को संवैधानिक वजन देता है
साधारण पंचायत कानून से तुलना
| बिंदु | साधारण पंचायत कानून | अनुसूचित क्षेत्रों में PESA |
|---|---|---|
| ग्राम सभा की स्थिति | अन्य स्तरों में से एक | प्राथमिक संस्था |
| लघु वनोपज | वन विभाग द्वारा नियंत्रित | ग्राम सभा का स्वामित्व मान्य |
| भूमि अधिग्रहण | इस रूप में परामर्श अनिवार्य नहीं | ग्राम सभा से परामर्श आवश्यक |
| अध्यक्ष पद | सामान्य आरक्षण नियम | अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित |
| प्रथागत विधि | विशेष मान्यता नहीं | स्पष्ट रूप से मान्य |
पूछे जाने वाले बिंदु
- PESA का पूरा नाम — पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम
- अधिनियम का वर्ष — 1996
- PESA में प्राथमिक संस्था — ग्राम सभा
- ग्राम सभा के नियंत्रण में संसाधन — लघु वनोपज, लघु जल स्रोत, लघु खनिज
- संवैधानिक आधार — पांचवीं अनुसूची
याद रखने की ट्रिक — एक वर्ष, तीन संसाधन — 1996, और ग्राम सभा के पास लघु वनोपज, लघु जल स्रोत, लघु खनिज। तीन 'लघु' याद रहें तो PESA याद रहेगा।
यहां लोग गलती करते हैं — PESA और साधारण पंचायत कानून अलग हैं।
✗ PESA पूरे राज्य पर लागू है | ✓ PESA केवल अनुसूचित क्षेत्रों में लागू है
✗ PESA में ग्राम सभा एक साधारण स्तर है | ✓ PESA में ग्राम सभा प्राथमिक संस्था है, कोई साधारण स्तर नहीं
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एक नजर में
- PESA 1996 — पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम
- केवल अनुसूचित क्षेत्रों में लागू
- संविधान के भाग IX का संशोधित विस्तार
- ग्राम सभा प्राथमिक संस्था है
- ग्राम सभा के पास लघु वनोपज का नियंत्रण
- साथ ही लघु जल स्रोत और कानून के अधीन लघु खनिज
- भूमि अधिग्रहण से पहले परामर्श आवश्यक
- मादक पदार्थों का नियमन और भूमि हस्तांतरण की रोकथाम
- झारखंड में नियम 13 जिलों में पूर्णतः, 3 में आंशिक
- CNT, SPT और वन अधिकार अधिनियम के साथ काम करता है
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