वित्तीय समावेशन और स्वयं सहायता समूह
NCERT कक्षा 10 • Economics • अध्याय "Money and Credit"
वित्तीय समावेशन और स्वयं सहायता समूह
वित्तीय समावेशन का अर्थ है बैंकिंग, साख, बचत, बीमा और भुगतान सेवाएं हर परिवार तक वहनीय लागत पर पहुंचाना। जहां औपचारिक साख नहीं पहुंचती, वहां लोग साहूकार पर निर्भर हो जाते हैं, इसलिए समावेशन को निर्धनता घटाने का सीधा साधन माना जाता है।
औपचारिक साख क्यों महत्वपूर्ण है
- औपचारिक ऋणदाता उचित दर लेते हैं और पर्यवेक्षित प्रक्रिया का पालन करते हैं।
- अनौपचारिक ऋणदाता बहुत ऊंचा ब्याज मांगते हैं और प्रायः भूमि या श्रम को प्रतिभूति बनाते हैं।
- उपभोग के लिए लिया गया ऊंची लागत का ऋण परिवार को ऋण जाल में धकेल सकता है, जहां चुकाने के बाद जीने को कुछ नहीं बचता।
- साख की शर्तें — ब्याज दर, प्रतिभूति, दस्तावेज और चुकौती अनुसूची — तय करती हैं कि साख सहायक होगी या हानिकारक।
- निर्धनों के पास प्रायः प्रतिभूति और कागजात नहीं होते, और इसीलिए बैंक उन्हें ऋण देने में हिचकते हैं।
- बीज, औजार या छोटी दुकान जैसे उत्पादक कार्य में लगी साख आय बढ़ाती है और सरलता से चुक जाती है।
स्वयं सहायता समूह और सूक्ष्म वित्त
- स्वयं सहायता समूह लगभग पंद्रह से बीस सदस्यों का छोटा समूह है, जिसमें अधिकतर महिलाएं समान पृष्ठभूमि की होती हैं।
- सदस्य नियमित रूप से एक छोटी निश्चित राशि बचाते हैं, और यह संचित बचत समूह की निधि बन जाती है।
- समूह अपने ही सदस्यों को उस दर पर ऋण देता है जो समूह स्वयं तय करता है।
- कुछ समय अच्छा कार्य करने के बाद बैंक समूह को ऋण देता है, और समूह आगे सदस्यों को देता है।
- चुकौती का उत्तरदायित्व पूरे समूह पर होता है, इसलिए प्रतिभूति का स्थान सामूहिक दबाव ले लेता है।
- स्वयं सहायता समूह स्वास्थ्य, शिक्षा, हिंसा और स्थानीय मुद्दों पर चर्चा का मंच भी बनते हैं, जिससे आत्मविश्वास बढ़ता है।
- सभी के लिए बैंक खाते, सीधा लाभ अंतरण और डिजिटल भुगतान ने पहुंच और बढ़ाई है।
| लक्षण | औपचारिक साख | अनौपचारिक साख |
|---|---|---|
| स्रोत | बैंक, सहकारी समिति | साहूकार, व्यापारी |
| ब्याज | उचित | प्रायः बहुत ऊंचा |
| पर्यवेक्षण | है | नहीं |
| जोखिम | कम | ऋण जाल संभव |
स्वयं सहायता समूह — छोटा बचत समूह जिसकी संचित निधि और सामूहिक उत्तरदायित्व सदस्यों को बिना प्रतिभूति ऋण लेने देते हैं।
Exam me kaise aata hai
- स्वयं सहायता समूह में सामान्यतः कितने सदस्य होते हैं — लगभग पंद्रह से बीस
- स्वयं सहायता समूह में प्रतिभूति का स्थान कौन लेता है — सामूहिक दबाव
- बहुत ऊंची लागत का ऋण क्या बना सकता है — ऋण जाल
- बैंक और सहकारी समितियां कौन सी साख देती हैं — औपचारिक साख
UPSC/State PSC ke liye
- समूह ऋण इसलिए काम करता है कि समूह के पास हर सदस्य की स्थानीय जानकारी होती है, जो दूर बैठा बैंक सस्ते में नहीं जुटा सकता।
- वित्तीय समावेशन खाते खुलने से नहीं, वास्तव में उपयोग होने से आंका जाता है, इसलिए पहुंच नहीं, उपयोग ही असली कसौटी है।
Yahan confuse hote hain
✗ स्वयं सहायता समूह को ऋण केवल सरकार से मिलता है | वे पहले बचत करते हैं फिर बैंक से ऋण लेते हैं | ✓
✗ हर साख ऋणी की स्थिति सुधारती है | ऊंची दर पर उपभोग के लिए ली साख ऋण जाल बना सकती है | ✓
✗ स्वयं सहायता समूह के ऋण में प्रतिभूति चाहिए | वहां प्रतिभूति का स्थान सामूहिक उत्तरदायित्व लेता है | ✓
Ek nazar me
- वित्तीय समावेशन बैंकिंग और साख को हर परिवार की पहुंच में लाता है।
- साख की शर्तें तय करती हैं कि ऋण सहायक होगा या जाल।
- स्वयं सहायता समूह बचत जोड़कर बैंक से सामूहिक ऋण लेते हैं।
- प्रतिभूति का स्थान सामूहिक दबाव लेता है, और उपयोग ही असली कसौटी है।
Ab practice karein
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