आनुवंशिकता और मेंडल के नियम
NCERT कक्षा 10 • Science • अध्याय "Heredity and Evolution"
आनुवंशिकता और मेंडल के नियम
आनुवंशिकता माता-पिता से संतति तक लक्षणों का पहुंचना है। इसके नियम मेंडल ने मटर के पौधे पर प्रयोग करके निकाले, उससे बहुत पहले जब किसी को जीन का पता भी नहीं था, और उनके निष्कर्ष आज भी आनुवंशिकी का आधार हैं।
मेंडल के प्रयोग और नियम
- मेंडल ने मटर का पौधा इसलिए चुना कि उसमें स्पष्ट विपरीत लक्षण हैं, जीवन चक्र छोटा है और संकरण सरल है।
- जीन आनुवंशिकता की इकाई है, जो गुणसूत्र पर स्थित रहती है और किसी लक्षण का निर्देश रखती है।
- एक ही जीन के भिन्न रूप एलील कहलाते हैं; इनमें एक प्रभावी और दूसरा अप्रभावी हो सकता है।
- प्रभावी एलील एक ही प्रति होने पर भी अपना प्रभाव दिखा देता है; अप्रभावी एलील तभी दिखता है जब दोनों प्रतियां अप्रभावी हों।
- जीनप्ररूप जीव की आनुवंशिक बनावट है जबकि लक्षणप्ररूप उसका दिखने वाला रूप।
- दो विपरीत शुद्ध लक्षणों के एकसंकर संकरण में पहली पीढ़ी केवल प्रभावी लक्षण दिखाती है, और दूसरी पीढ़ी में दिखने का अनुपात 3 अनुपात 1 तथा जीनप्ररूप का 1 अनुपात 2 अनुपात 1 रहता है।
- प्रभाविता का नियम कहता है कि एक एलील दूसरे को ढक देता है; पृथक्करण का नियम कहता है कि युग्मक बनते समय दोनों एलील अलग हो जाते हैं।
- द्विसंकर संकरण में दिखने वाला स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम कहता है कि भिन्न लक्षण एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से वंशागत होते हैं।
मनुष्यों में लिंग निर्धारण
- मनुष्यों में गुणसूत्रों के 23 युग्म होते हैं, जिनमें से एक युग्म लिंग गुणसूत्र है।
- स्त्री में XX और पुरुष में XY होता है।
- माता सदैव X गुणसूत्र देती है, इसलिए बच्चे का लिंग इस पर निर्भर है कि पिता का युग्मक X या Y लाया।
- पिता से X पाने वाला बच्चा बालिका और Y पाने वाला बालक होता है।
- इसलिए यह मान्यता कि बच्चे का लिंग माता तय करती है, वैज्ञानिक रूप से गलत है।
- जीवनकाल में विकसित उपार्जित लक्षण वंशागत नहीं होते, जबकि जीनों में रखे आनुवंशिक लक्षण आगे जाते हैं।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| जीन | गुणसूत्र पर आनुवंशिकता की इकाई |
| एलील | जीन का वैकल्पिक रूप |
| जीनप्ररूप | आनुवंशिक बनावट |
| लक्षणप्ररूप | दिखने वाला रूप |
अप्रभावी लक्षण — वह लक्षण जो तभी प्रकट होता है जब उसके दोनों एलील अप्रभावी हों, क्योंकि प्रभावी एलील उसका प्रभाव ढक देता है।
Exam me kaise aata hai
- मेंडल ने किस पौधे पर कार्य किया — मटर का पौधा
- एकसंकर संकरण की दूसरी पीढ़ी का लक्षणप्ररूप अनुपात — 3 अनुपात 1
- मानव पुरुष के गुणसूत्र — XY
- बच्चे का लिंग कौन तय करता है — पिता
UPSC/State PSC ke liye
- मेंडल इसलिए सफल हुए कि उन्होंने एक बार में एक लक्षण का अध्ययन किया और बड़ी संख्या में गिनती की, जिसने जीव विज्ञान को मात्रात्मक विज्ञान बना दिया।
- उपार्जित लक्षण वंशागत नहीं होते क्योंकि वे जनन कोशिकाओं के जीन नहीं बदलते, और अगली पीढ़ी को वही मिलता है।
Yahan confuse hote hain
✗ बच्चे का लिंग माता तय करती है | इसे पिता का युग्मक तय करता है | ✓
✗ जीनप्ररूप और लक्षणप्ररूप एक ही हैं | जीनप्ररूप आनुवंशिक बनावट; लक्षणप्ररूप दिखने वाला रूप है | ✓
✗ उपार्जित लक्षण वंशागत होते हैं | केवल जीनों में रखे लक्षण वंशागत होते हैं | ✓
Ek nazar me
- गुणसूत्रों पर जीन आनुवंशिकता ले जाते हैं; एलील प्रभावी या अप्रभावी हो सकते हैं।
- एकसंकर संकरण की दूसरी पीढ़ी में दिखने का अनुपात 3 अनुपात 1 है।
- मेंडल के तीन नियम: प्रभाविता, पृथक्करण और स्वतंत्र अपव्यूहन।
- बच्चे का लिंग पिता के युग्मक से तय होता है।
