मुद्रास्फीति और उसके प्रकार
NCERT कक्षा 12 • Introductory Macroeconomics • मुद्रा और आय निर्धारण के अध्याय | NCERT कक्षा 11 • Indian Economic Development
मुद्रास्फीति और उसके प्रकार
मुद्रास्फीति समय के साथ सामान्य कीमत स्तर में निरंतर बढ़ोतरी है, जिसका अर्थ है कि उतनी ही मुद्रा से पहले से कम वस्तुएं मिलती हैं। किसी एक वस्तु की एक बार की कीमत वृद्धि मुद्रास्फीति नहीं है; इसके लिए वृद्धि का पूरी अर्थव्यवस्था में सामान्य और निरंतर होना आवश्यक है।
कारण और प्रकार
- मांग जनित मुद्रास्फीति तब होती है जब कुल मांग उपलब्ध वस्तु पूर्ति से अधिक हो जाए और कीमतें ऊपर खिंच जाएं।
- इसके कारणों में मुद्रा आपूर्ति बढ़ना, सरकारी व्यय बढ़ना, सरल साख और बढ़ती आय आते हैं।
- लागत जनित मुद्रास्फीति तब होती है जब उत्पादन लागत बढ़ जाए और कीमतें ऊपर धकेली जाएं।
- इसके कारणों में महंगा कच्चा माल, ऊंची मजदूरी, ऊंची ईंधन कीमत और अधिक अप्रत्यक्ष कर आते हैं।
- गति के अनुसार मुद्रास्फीति बहुत धीमी होने पर रेंगती, मध्यम होने पर चलती, तेज होने पर दौड़ती, और नियंत्रण से बाहर होने पर अति मुद्रास्फीति कहलाती है।
- अपस्फीति सामान्य कीमत स्तर में निरंतर गिरावट है, जो मुद्रास्फीति जितनी ही हानिकारक हो सकती है क्योंकि इससे उत्पादन और रोजगार घटते हैं।
- मुद्रास्फीतिजनित मंदी (stagflation) ऊंची मुद्रास्फीति के साथ ठहरे उत्पादन और ऊंची बेरोजगारी का कठिन मेल है।
प्रभाव और मापन
- मुद्रास्फीति उन लोगों को हानि पहुंचाती है जिनकी मौद्रिक आय स्थिर है, जैसे पेंशनभोगी, वेतनभोगी और मजदूर।
- यह ऋणियों को लाभ देती है, क्योंकि जो वे लौटाते हैं उसका वास्तविक मूल्य घट जाता है, और भंडार रखने वाले उत्पादकों को भी लाभ हो सकता है।
- यह मुद्रा रखने वाले बचतकर्ताओं को हानि पहुंचाती है और परिवारों को बचत से संपत्ति खरीद की ओर धकेल सकती है।
- कीमतें सूचकांक से मापी जाती हैं, जो एक टोकरी की वर्तमान कीमत की तुलना आधार वर्ष की कीमत से करता है।
- थोक मूल्य सूचकांक थोक व्यापार की कीमतें दर्शाता है; उपभोक्ता मूल्य सूचकांक परिवारों द्वारा चुकाई खुदरा कीमतें दर्शाता है।
- आम व्यक्ति के लिए उपभोक्ता सूचकांक अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि वह वास्तविक घरेलू टोकरी दर्शाता है।
| प्रकार | कारण | उदाहरण |
|---|---|---|
| मांग जनित | मांग पूर्ति से अधिक | अत्यधिक मुद्रा आपूर्ति |
| लागत जनित | उत्पादन लागत बढ़ना | महंगा ईंधन या मजदूरी |
| अपस्फीति | मांग लगातार घटना | गहरी मंदी |
| स्टैगफ्लेशन | ठहराव के साथ लागत वृद्धि | कमजोर अर्थव्यवस्था में पूर्ति आघात |
मुद्रास्फीति — सामान्य कीमत स्तर में निरंतर बढ़ोतरी, जो मुद्रा की क्रय शक्ति घटा देती है।
Exam me kaise aata hai
- अत्यधिक मांग से हुई मुद्रास्फीति — मांग जनित मुद्रास्फीति
- महंगे निवेश से हुई मुद्रास्फीति — लागत जनित मुद्रास्फीति
- ठहरे उत्पादन के साथ ऊंची मुद्रास्फीति — स्टैगफ्लेशन
- परिवारों की खुदरा कीमतें कौन दर्शाता है — उपभोक्ता मूल्य सूचकांक
UPSC/State PSC ke liye
- मुद्रास्फीति मुद्रा रखने वालों पर छिपे कर और ऋणियों को छिपे उपदान जैसी है, इसीलिए यह बिना कोई विधि बनाए संपत्ति का पुनर्वितरण कर देती है।
- पूर्ति पक्ष की मुद्रास्फीति केवल मुद्रा कसने से ठीक नहीं होती, क्योंकि समस्या उत्पादन लागत में है, अत्यधिक मांग में नहीं।
Yahan confuse hote hain
✗ कोई भी कीमत वृद्धि मुद्रास्फीति है | मुद्रास्फीति सामान्य और निरंतर वृद्धि है, एक वस्तु की एक बार की वृद्धि नहीं | ✓
✗ मुद्रास्फीति सबको समान लाभ देती है | यह स्थिर आय वालों को हानि और ऋणियों को लाभ देती है | ✓
✗ अपस्फीति सदैव अच्छी होती है | अपस्फीति उत्पादन और रोजगार घटा सकती है | ✓
Ek nazar me
- मुद्रास्फीति कीमतों में सामान्य और निरंतर वृद्धि है।
- मांग जनित अत्यधिक मांग से; लागत जनित ऊंची लागत से।
- अपस्फीति और स्टैगफ्लेशन विपरीत और मिश्रित समस्याएं हैं।
- मापन थोक और उपभोक्ता मूल्य सूचकांकों से होता है।
