32 जनजातियों का वर्गीकरण
32 जनजातियों का वर्गीकरण
झारखंड में 32 अनुसूचित जनजातियां हैं और वे राज्य की जनसंख्या का लगभग 26.2 प्रतिशत बनाती हैं। राज्य सामग्री में सामान्यतः एल. पी. विद्यार्थी का वह चार-भागीय वर्गीकरण प्रयोग होता है जो जीविका के तरीके पर आधारित है।
अनुसूचित जनजातियां — 32 | जनसंख्या में ST हिस्सा — लगभग 26.2 प्रतिशत (जनगणना 2011)
मूल तथ्य
- राज्य में 32 अनुसूचित जनजातियां हैंबार-बार पूछा जाता है
- वर्ष 2011 में ST जनसंख्या लगभग 86 लाख थी, यानी राज्य का लगभग 26.2 प्रतिशत
- जनसंख्या में सबसे बड़ी जनजाति संथाल है
- अन्य बड़ी जनजातियां — उरांव, मुंडा और हो
- 2003 में कंवर और कोल सूची में जोड़े गए, जिससे संख्या 32 हुई
- जनजातियां असमान रूप से फैली हैं — दक्षिण और पूर्व में सर्वाधिक सघनता है
विद्यार्थी का चार-भागीय वर्गीकरण
| श्रेणी | जीवन शैली | उदाहरण |
|---|---|---|
| आखेटक-संग्राहक प्रकार | वन संग्रह और शिकार | बिरहोर, कोरवा, पहाड़ी खड़िया |
| स्थानांतरी कृषि प्रकार | ढलानों पर झूम खेती | सौरिया पहाड़िया |
| सरल शिल्पकार प्रकार | शिल्प और धातु कार्य | माहली, लोहरा, कर्माली, चिक बड़ाईक |
| स्थायी कृषक प्रकार | स्थायी कृषि ग्राम | संथाल, उरांव, मुंडा, हो, भूमिज |
जनजातियों के भाषा परिवार
- ऑस्ट्रो-एशियाटिक (मुंडा समूह) — संथाली, मुंडारी, हो, खड़िया, भूमिज
- द्रविड़ — उरांव की कुड़ुख और पहाड़िया की मालतो
- भारोपीय — कुछ समुदाय क्षेत्रीय भाषाओं की ओर चले गए हैं
- संथाली संविधान की आठवीं अनुसूची में है और ओल चिकी लिपि में लिखी जाती है
- इन समुदायों के समूहन का आधार केवल व्यवसाय नहीं, भाषा भी है
मुख्य जनजातियां कहां रहती हैं
| जनजाति | मुख्य जिले |
|---|---|
| संथाल | संथाल परगना के जिले और पूर्वी भाग |
| उरांव | रांची, गुमला, लोहरदगा, सिमडेगा |
| मुंडा | खूंटी, रांची, सरायकेला की ओर |
| हो | पश्चिमी सिंहभूम, कोल्हान क्षेत्र |
| खड़िया | सिमडेगा और गुमला |
| भूमिज | पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला |
पूछे जाने वाले बिंदु
- अनुसूचित जनजातियों की संख्या — 32
- राज्य की जनसंख्या में ST हिस्सा — लगभग 26.2 प्रतिशत
- सबसे बड़ी जनजाति — संथाल
- चार-भागीय वर्गीकरण देने वाले विद्वान — एल. पी. विद्यार्थी
- उरांव की भाषा — कुड़ुख, जो द्रविड़ परिवार की है
आकार के अनुसार जनजातियां
- बहुत बड़ी — संथाल, उरांव, मुंडा और हो मिलकर ST जनसंख्या का बड़ा भाग बनाते हैं
- मध्यम — खड़िया, भूमिज, लोहरा, माहली, चेरो, गोंड और खरवार
- छोटी और संवेदनशील — आदिम जनजातीय समूह में गिने जाने वाले नौ समुदाय
- सूची के कुछ नाम, जैसे गोंड और कोल, राज्य से बाहर तक फैले हैं
- कुछ, जैसे हो और सौरिया पहाड़िया, लगभग पूरी तरह इसी राज्य में केंद्रित हैं
- परीक्षा में आकार मुख्यतः सबसे बड़ी जनजाति वाले प्रश्न के लिए मायने रखता है
जनजातीय समाज से जुड़े शब्द
- आदिवासी — समुदायों का अपना शब्द, अर्थ मूल निवासी
- जनजाति — कानून और प्रशासन में प्रयुक्त आधिकारिक हिंदी शब्द
- सदान — क्षेत्र के मूल गैर-जनजातीय समुदाय
- दिकू — बाहरी व्यक्ति, ऐतिहासिक रूप से बाहर से आया जमींदार या व्यापारी
- PVTG — आदिम जनजातीय समूह, एक प्रशासनिक श्रेणी
याद रखने की ट्रिक — चार श्रेणी का जोड़ — शिकारी, झूम, कारीगर, किसान। और चार बड़े नाम — संथाल, उरांव, मुंडा, हो। दो लाइन में पूरा टॉपिक।
यहां लोग गलती करते हैं — सबसे बड़ी और सबसे प्रसिद्ध जनजाति अलग हो सकती हैं।
✗ मुंडा झारखंड की सबसे बड़ी जनजाति है | ✓ जनसंख्या में सबसे बड़ी संथाल है; मुंडा छोटी पर ऐतिहासिक रूप से प्रमुख है
✗ उरांव की भाषा ऑस्ट्रो-एशियाटिक है | ✓ उरांव की भाषा कुड़ुख है, जो द्रविड़ परिवार की है
एग्जाम पॉइंटर — JSSC CGL, JTGLCCE, JKCE और JTET में संख्या, सबसे बड़ी जनजाति और भाषा का मिलान सीधा आता है। JPSC में विद्यार्थी का वर्गीकरण और जनजातीय अर्थव्यवस्था का बदलाव मुख्य परीक्षा में आता है। यह अध्याय का सबसे स्कोरिंग टॉपिक है।
एक नजर में
- राज्य में 32 अनुसूचित जनजातियां
- ST हिस्सा — जनसंख्या का लगभग 26.2 प्रतिशत
- सबसे बड़ी जनजाति — संथाल
- अन्य बड़ी जनजातियां — उरांव, मुंडा, हो
- कंवर और कोल 2003 में सूची में जोड़े गए
- एल. पी. विद्यार्थी का चार श्रेणियों में वर्गीकरण
- आखेटक, झूम कृषक, शिल्पकार, स्थायी कृषक
- मुंडा भाषाएं — संथाली, मुंडारी, हो, खड़िया
- द्रविड़ भाषाएं — कुड़ुख और मालतो
- संथाली आठवीं अनुसूची में, लिपि ओल चिकी
