कृषि और फसल
कृषि और फसल
झारखंड की कृषि वर्षा पर निर्भर है, अधिकतर एक ही फसल वाली है और उसमें धान का प्रभुत्व है। शुद्ध बोया क्षेत्र राज्य का लगभग एक तिहाई है, सिंचाई का दायरा कम है, और पठार की पतली मिट्टी उपज को राष्ट्रीय औसत से नीचे रखती है।
शुद्ध बोया क्षेत्र — लगभग 25 से 26 लाख हेक्टेयर | मुख्य फसल — धान | मुख्य बाधा — कम सिंचाई
मूल विशेषताएं
- खेती मुख्यतः वर्षा आधारित है और खरीफ मौसम में केंद्रित रहती है
- अधिकांश भूमि एक फसली है, जो राज्य की सबसे बड़ी कृषि कमजोरी है
- शुद्ध बोया क्षेत्र लगभग 25 से 26 लाख हेक्टेयर
- जोत छोटी और बिखरी हुई हैं, जिससे मशीनीकरण सीमित रहता है
- ऊपरी टांड़ खेतों में मोटे अनाज; निचले दोन खेतों में धान
- सामान्य वार्षिक वर्षा लगभग 1,300 मिमी पर्याप्त है पर ठहरती नहीं
मुख्य फसलें
| ऋतु | फसलें | टिप्पणी |
|---|---|---|
| खरीफ | धान, मक्का, अरहर, उड़द, मूंग, मूंगफली | प्रमुख ऋतु; धान सबसे आगे |
| रबी | गेहूं, चना, सरसों, मसूर, आलू | कमजोर सिंचाई से सीमित |
| जायद और सब्जी | नगरों और नदियों के पास सब्जी | बढ़ते महत्व की नकदी फसल |
| बागवानी | आम, लीची, अमरूद, काजू | बागवानी राज्य की प्राथमिकता |
उपज कम क्यों रहती है
- कम सिंचाई से अधिकांश खेत एक ही मानसून पर निर्भर रहते हैं
- लाल और लैटेराइट मिट्टी नाइट्रोजन और ह्यूमस में कमजोर है
- पठार पर तेज बहाव पानी और ऊपरी मिट्टी दोनों बहा ले जाता है
- छोटी, बिखरी जोत से आदानों में निवेश सीमित रहता है
- कमजोर बाजार संपर्क से किसान को खेत पर कम दाम मिलता है
- देर से या कमजोर मानसून सीधे फसल की विफलता बन जाता है
क्या किया जा रहा है
- सिंचित क्षेत्र बढ़ाने के लिए जलग्रहण विकास, चेक डैम और लिफ्ट सिंचाई
- अधिक मूल्य वाले विकल्प के रूप में बागवानी और सब्जी को प्रोत्साहन
- कृषि विभाग द्वारा बीज वितरण और मृदा स्वास्थ्य के उपाय
- सहायक कृषि आय के रूप में लाह, तसर और शहद को सहयोग
- राज्य और केंद्र की योजनाओं में खेत-तालाब और डोभा निर्माण
- ऊपरी खेतों में धान से हटकर फसल विविधीकरण
पूछे जाने वाले बिंदु
- राज्य की मुख्य फसल — धानबार-बार पूछा जाता है
- मुख्य ऋतु — खरीफ
- ऊपरी खेत — टांड़; निचला खेत — दोन
- सबसे बड़ी बाधा — कम सिंचाई और एक फसली खेती
- राज्य के कृषि-जलवायु क्षेत्र — तीन
राज्य का भू-उपयोग
| श्रेणी | मोटी तस्वीर |
|---|---|
| शुद्ध बोया क्षेत्र | राज्य का लगभग एक तिहाई |
| वन | राज्य का लगभग 29.81 प्रतिशत |
| बंजर और अकृष्य भूमि | पर्याप्त, चट्टान उभार और खनन के कारण |
| परती भूमि | बड़ी, क्योंकि ऊपरी खेत केवल अच्छे वर्षों में बोए जाते हैं |
| एक से अधिक बार बोया क्षेत्र | कम, जो कमजोर सिंचाई दिखाता है |
याद रखने की ट्रिक — एक फसल, एक मौसम, एक समस्या — धान, खरीफ, सिंचाई की कमी। तीन शब्दों में पूरी कृषि। और दो खेत — टांड़ ऊपर, दोन नीचे।
यहां लोग गलती करते हैं — अधिक वर्षा और अच्छी सिंचाई एक नहीं हैं।
✗ 1,300 मिमी वर्षा का अर्थ है सिंचाई की जरूरत नहीं | ✓ पठार से पानी तेजी से बह जाता है, इसलिए सिंचाई का दायरा कम रहता है
✗ टांड़ में धान होता है | ✓ धान दोन में होता है; टांड़ में मोटे अनाज और दलहन
एग्जाम पॉइंटर — JPSC मुख्य परीक्षा में कृषि की समस्याओं पर पूरा प्रश्न बनता है — उत्तर में सिंचाई, मृदा और एक-फसली खेती तीनों लिखें। JSSC CGL, JKCE और JTET में सीधा — मुख्य फसल कौन-सी, टांड़-दोन क्या हैं। आंकड़ों की गहराई में न जाएं, ढांचा याद रखें।
एक नजर में
- खेती वर्षा आधारित और अधिकतर एक फसली
- शुद्ध बोया क्षेत्र — लगभग 25 से 26 लाख हेक्टेयर
- मुख्य फसल — धान; मुख्य ऋतु — खरीफ
- खरीफ — धान, मक्का, अरहर, उड़द, मूंगफली
- रबी — गेहूं, चना, सरसों, आलू
- ऊपरी टांड़, निचला दोन
- वर्षा लगभग 1,300 मिमी पर ठहरती नहीं
- मिट्टी नाइट्रोजन और ह्यूमस में कमजोर
- उपाय — जलग्रहण कार्य, डोभा, लिफ्ट सिंचाई
- बागवानी तथा लाह और तसर से सहायक आय
