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बिरसा मुंडा का जीवन

By ExamAtlas · 19/9/2026

बिरसा मुंडा का जीवन

बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को वर्तमान खूंटी जिले के उलिहातू में हुआ और मृत्यु 9 जून 1900 को रांची जेल में चौबीस वर्ष की आयु में हुई। इस छोटे जीवन में वे वैद्य, पैगंबर और उलगुलान के नेता बने।

जन्म — 15 नवंबर 1875, उलिहातू | मृत्यु — 9 जून 1900, रांची जेल | मृत्यु के समय आयु — 24

प्रारंभिक जीवन

  • जन्म 15 नवंबर 1875 को उलिहातू में, वर्तमान खूंटी जिलाबार-बार पूछा जाता है
  • पिता — सुगना मुंडा; माता — करमी हातू
  • प्रारंभिक शिक्षा सालगा में शिक्षक जयपाल नाग के पास
  • जर्मन मिशन स्कूल में पढ़ाई, उस दौर में उन्हें बिरसा दाऊद कहा गया
  • उन्होंने मिशन स्कूल छोड़ दिया, और यही मोड़ उनके बाद के संदेश को गढ़ता है
  • कुछ समय वे वैष्णव गुरु आनंद पांडे के प्रभाव में भी रहे

मोड़

  • सरदारी आंदोलन अदालतों से भूमि वापस दिलाने में पहले ही विफल हो चुका था
  • 1890 के दशक के अकाल और महामारी ने मुंडा गांवों का संकट गहरा किया
  • बिरसा ने लगभग 1895 से प्रचार शुरू किया और शीघ्र ही वैद्य तथा पैगंबर माने जाने लगे
  • अनुयायी उन्हें धरती आबा अर्थात धरती के पिता कहते थे
  • 1895 में गिरफ्तार हुए और दो वर्ष के कारावास की सजा मिली
  • रिहाई के बाद उन्होंने आंदोलन को अधिक तीखे राजनीतिक तेवर के साथ फिर खड़ा किया

जीवन की समयरेखा

तिथिघटना
15 नवंबर 1875उलिहातू में जन्म
1895प्रचार आरंभ; गिरफ्तारी और दो वर्ष की सजा
1897 से 1899मुंडा क्षेत्र में आंदोलन का पुनर्निर्माण
क्रिसमस 1899उलगुलान की शुरुआत
3 फरवरी 1900चक्रधरपुर के पास जामकोपाई जंगल में गिरफ्तारी
9 जून 1900रांची जेल में मृत्यु

वे अलग क्यों थे

  • उन्होंने धार्मिक अधिकार को राजनीतिक मांग से जोड़ा, जिसे पहले के नेता अलग रखते थे
  • उन्होंने आंदोलन को ऐसा नारा दिया जिसे हर कोई दोहरा और याद रख सकता था
  • उन्होंने किसी एक सरदार की जागीर के बजाय गांवों के आर-पार संगठन बनाया
  • उनका निशाना बाहरी भू-स्वामित्व का कानूनी आधार था, केवल व्यक्तिगत जमींदार नहीं
  • कम उम्र में मृत्यु ने उन्हें नेता से स्थायी प्रतीक बना दिया

याद रखने लायक नाम

  • पिता सुगना मुंडा, माता करमी हातू
  • जन्मस्थान उलिहातू; आंदोलन का केंद्र खूंटी और तमाड़ पट्टी
  • उनके लिए प्रयुक्त नाम — धरती आबा, भगवान बिरसा
  • सालगा के शिक्षक — जयपाल नाग
  • गिरफ्तारी स्थल — जामकोपाई जंगल, चक्रधरपुर

वे नाम जो प्रश्न में लौटते हैं

  • उलिहातू — जन्मस्थान, वर्तमान खूंटी जिला
  • सालगा — प्रारंभिक शिक्षा का गांव
  • चालकद — वह गांव जहां परिवार बाद में रहा और प्रचार का केंद्र बना
  • डोंबारी बुरू — उलगुलान की निर्णायक मुठभेड़ का स्थल
  • जामकोपाई — चक्रधरपुर के पास वह जंगल जहां गिरफ्तारी हुई
  • रांची जेल — जीवन का अंतिम स्थान

याद रखने की ट्रिक — दो तिथि, एक आयु — 15-11-1875 जन्म, 9-6-1900 मृत्यु, आयु 24। और दो स्थान — उलिहातू में जन्म, रांची जेल में अंत। इससे अधिक रटना जरूरी नहीं।

यहां लोग गलती करते हैं — जन्मस्थान और जिला आज के नक्शे में अलग दिखते हैं।

बिरसा का जन्म रांची जिले में हुआ  |   उलिहातू आज खूंटी जिले में है, जो 2007 में रांची से अलग हुआ

बिरसा की मृत्यु खूंटी जेल में हुई  |   बिरसा की मृत्यु रांची जेल में 9 जून 1900 को हुई

एग्जाम पॉइंटर — JSSC CGL, JTGLCCE, JTET और झारखंड पुलिस — सभी में बिरसा का जन्म-मृत्यु आंकड़ा सीधा आता है। JPSC इसे उलगुलान और CNT अधिनियम से जोड़कर पूछता है। यह झारखंड GK का सबसे निश्चित टॉपिक है, इसलिए एक भी तिथि धुंधली नहीं होनी चाहिए।

एक नजर में

  • जन्म 15 नवंबर 1875, उलिहातू, खूंटी
  • पिता सुगना मुंडा, माता करमी हातू
  • सालगा में शिक्षा, शिक्षक जयपाल नाग
  • जर्मन मिशन स्कूल में बिरसा दाऊद नाम से
  • अनुयायियों ने कहा धरती आबा
  • 1895 में गिरफ्तारी, दो वर्ष की सजा
  • क्रिसमस 1899 में उलगुलान की शुरुआत
  • 3 फरवरी 1900 को जामकोपाई जंगल में गिरफ्तारी
  • मृत्यु 9 जून 1900, रांची जेल, आयु 24
  • 15 नवंबर उनकी जयंती और झारखंड का स्थापना दिवस

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