राज्य बजट और GSDP
राज्य बजट और GSDP
झारखंड का वर्ष 2026-27 का बजट लगभग 1.58 लाख करोड़ रुपये का है, जिसे 24 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने प्रस्तुत किया। इसी वर्ष के लिए राज्य का GSDP लगभग 6.25 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है।
बजट 2026-27 — लगभग 1,58,560 करोड़ रुपये | GSDP — लगभग 6,24,868 करोड़ रुपये | राजकोषीय घाटा — GSDP का 2.2 प्रतिशत
आंकड़ों में बजट 2026-27
| मद | आंकड़ा |
|---|---|
| कुल व्यय | लगभग 1,58,560 करोड़ रुपये |
| ऋण चुकौती को छोड़कर व्यय | लगभग 1,50,106 करोड़ रुपये |
| राजस्व प्राप्तियां (उधार छोड़कर) | लगभग 1,36,510 करोड़ रुपये |
| 2026-27 का GSDP अनुमान | लगभग 6,24,868 करोड़ रुपये |
| पिछले वर्ष पर GSDP वृद्धि | लगभग 10 प्रतिशत |
| राजकोषीय घाटा | लगभग 13,596 करोड़, यानी GSDP का 2.2 प्रतिशत |
| बजट प्रस्तुति तिथि | 24 फरवरी 2026 |
| वित्त मंत्री | राधा कृष्ण किशोर |
पैसा कहां से आता है
- राज्य का स्वयं का कर राजस्व — GST, उत्पाद शुल्क, मुद्रांक शुल्क, वाहन कर
- राज्य का स्वयं का गैर-कर राजस्व — मुख्यतः खनन रॉयल्टी और उपकर
- वित्त आयोग के सूत्र के अनुसार केंद्रीय करों में हिस्सा
- योजनाओं और विशेष उद्देश्यों के लिए केंद्र से सहायता अनुदान
- उधार, जिसकी सीमा राजकोषीय उत्तरदायित्व ढांचे से तय होती है
- खनन रॉयल्टी के कारण राज्य का राजस्व वस्तु-कीमत चक्र के प्रति संवेदनशील रहता है
पैसा कहां जाता है
- कल्याणकारी हस्तांतरण, जिनमें पेंशन और महिला आय सहायता योजनाएं शामिल हैं
- शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण — सामाजिक क्षेत्र के सबसे बड़े मद
- ग्रामीण विकास, सड़क, सिंचाई और पेयजल
- प्रतिबद्ध व्यय के रूप में वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान
- अवसंरचना के लिए पूंजीगत व्यय, जो कल्याण व्यय से प्रतिस्पर्धा करता है
घाटे के शब्दों को समझें
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| राजस्व घाटा | राजस्व व्यय में से राजस्व प्राप्तियां घटाने पर |
| राजकोषीय घाटा | कुल व्यय में से उधार को छोड़कर प्राप्तियां घटाने पर |
| प्राथमिक घाटा | राजकोषीय घाटा में से ब्याज भुगतान घटाने पर |
| प्रतिबद्ध व्यय | वेतन, पेंशन और ब्याज, जिन्हें आसानी से घटाया नहीं जा सकता |
संरचनात्मक समस्या
- राजस्व खनन और केंद्रीय हस्तांतरण पर बहुत निर्भर है
- व्यय का बड़ा हिस्सा प्रतिबद्ध है, जिससे नई पूंजीगत परियोजनाओं की गुंजाइश कम रहती है
- राज्य ने बार-बार केंद्र से लंबित बकाया का मुद्दा उठाया है
- स्वयं के कर की कम उछाल राज्य के अपने संसाधन बढ़ाने की गति सीमित करती है
- राजकोषीय अनुशासन राजकोषीय उत्तरदायित्व कानून के लक्ष्यों से मापा जाता है
राज्य अर्थव्यवस्था की संरचना
- प्राथमिक क्षेत्र — कृषि, वानिकी और खनन; इसमें सर्वाधिक मूल्य खनन से आता है
- द्वितीयक क्षेत्र — इस्पात, स्पंज आयरन, सीमेंट, इंजीनियरिंग और बिजली
- तृतीयक क्षेत्र — व्यापार, परिवहन, प्रशासन और सेवाएं, सबसे तेज बढ़ता हिस्सा
- राज्य असामान्य है क्योंकि खनन प्राथमिक क्षेत्र में गिना जाता है पर व्यवहार उद्योग जैसा करता है
- खनिज आधार के बावजूद प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से नीचे रहती है
याद रखने की ट्रिक — तीन आंकड़े एक साथ — बजट 1.58 लाख करोड़, GSDP 6.25 लाख करोड़, घाटा 2.2 प्रतिशत। और एक नाम — राधा कृष्ण किशोर, 24 फरवरी 2026।
यहां लोग गलती करते हैं — बजट और GSDP दो अलग आंकड़े हैं।
✗ झारखंड का GSDP लगभग 1.58 लाख करोड़ है | ✓ 1.58 लाख करोड़ बजट है; GSDP अनुमान लगभग 6.25 लाख करोड़ है
✗ राजकोषीय घाटा और राजस्व घाटा एक हैं | ✓ राजकोषीय घाटा उधार छोड़कर कुल कमी है; राजस्व घाटा केवल राजस्व खाते का
एग्जाम पॉइंटर — JPSC में बजट का आंकड़ा करेंट अफेयर्स खंड में आता है और मुख्य परीक्षा में राज्य वित्त की समस्या पर प्रश्न बनता है। JSSC CGL और JKCE में सीधा — बजट कितने का, वित्त मंत्री कौन। ये आंकड़े हर वर्ष बदलते हैं, इसलिए परीक्षा से पहले नवीनतम बजट अवश्य देख लें।
एक नजर में
- बजट 2026-27 — लगभग 1,58,560 करोड़ रुपये
- प्रस्तुति 24 फरवरी 2026 को
- वित्त मंत्री — राधा कृष्ण किशोर
- GSDP अनुमान — लगभग 6,24,868 करोड़ रुपये
- GSDP वृद्धि — लगभग 10 प्रतिशत
- राजकोषीय घाटा — GSDP का 2.2 प्रतिशत
- राजस्व प्राप्तियां — लगभग 1,36,510 करोड़ रुपये
- गैर-कर राजस्व खनन रॉयल्टी पर निर्भर
- बड़ा प्रतिबद्ध व्यय पूंजीगत व्यय सीमित करता है
- परीक्षा से पहले नवीनतम बजट देखें, आंकड़े बदलते हैं
