चेरो, रक्सेल और रामगढ़ राज
चेरो, रक्सेल और रामगढ़ राज
नागवंशियों के साथ तीन अन्य घरानों ने मध्यकालीन झारखंड को आकार दिया — पलामू में पहले रक्सेल फिर चेरो, और हजारीबाग पट्टी में रामगढ़ राज। इनमें पलामू के मेदिनी राय सबसे अधिक पूछा जाने वाला नाम हैं।
पलामू — पहले रक्सेल फिर चेरो | हजारीबाग पट्टी — रामगढ़ राज, स्थापना 1368
पलामू के रक्सेल
- रक्सेल वंश ने चेरो से पहले पलामू क्षेत्र पर शासन किया
- परंपरा इन्हें पठार के सरगुजा वाले हिस्से से जोड़ती है
- लगभग सोलहवीं शताब्दी में चेरो ने इन्हें हटा दिया
- पलामू के लिए 'इससे पहले कौन' वाला मानक प्रश्न रक्सेल शासन से ही बनता है
पलामू के चेरो
- चेरो वंश ने पलामू में अपना शासन जमाया और बार-बार के मुगल दबाव के बावजूद बनाए रखा
- मेदिनी राय सबसे प्रसिद्ध शासक हैं, शासनकाल 1658 से 1674बार-बार पूछा जाता है
- उन्होंने पुराने पलामू किले का पुनर्निर्माण कराया और 1673 में नया किला शुरू किया
- उन्होंने चेरो सत्ता का विस्तार किया और कृषि तथा समृद्धि बढ़ाने के लिए याद किए जाते हैं
- औरंगजेब के समय दाउद खान ने 1660 में पलामू पर आक्रमण कर किले ले लिए
- मेदिनी राय ने बाद में राज्य वापस पा लिया और मुगल उसे दोबारा नहीं ले सके
- पलामू के दोनों किले आज लातेहार जिले में बेतला वन क्षेत्र के भीतर हैं
रामगढ़ राज
| विषय | विवरण |
|---|---|
| संस्थापक | बाघदेव सिंह |
| स्थापना वर्ष | 1368 |
| राजधानी क्रम | उरदा, बादम, रामगढ़, इचाक, पद्मा |
| रामगढ़ ले जाने वाले शासक | दलेल सिंह |
| 1772 में कंपनी का विरोध करने वाले | मुकुंद सिंह |
रामगढ़ राज विस्तार से
- स्थापना 1368 में बाघदेव सिंह द्वारा
- दलेल सिंह ने रक्षात्मक महल बनवाया और राजधानी बादम से रामगढ़ ले गए
- मुकुंद सिंह ने 1772 में ईस्ट इंडिया कंपनी के कर का विरोध किया और मराठा सहायता चाही
- मराठों का समर्थन टिका नहीं और कंपनी ने अपना मनोनीत शासक बैठा दिया
- यह रियासत करदाता जमींदारी के रूप में बनी रही और 1950 के दशक में भारत में विलीन हुई
- बाद के शासक कामाख्या नारायण सिंह क्षेत्र की बड़ी राजनीतिक हस्ती रहे
तीनों घरानों की तुलना
| घराना | मुख्य क्षेत्र | प्रमुख नाम | अंत |
|---|---|---|---|
| नागवंशी | छोटानागपुर / कोकरह | दुर्जन साल, रघुनाथ शाह | जमींदारी उन्मूलन 1952 |
| चेरो | पलामू | मेदिनी राय | अंग्रेजों द्वारा पलामू पर अधिकार |
| रामगढ़ राज | हजारीबाग और रामगढ़ पट्टी | दलेल सिंह, मुकुंद सिंह | 1950 के दशक में भारत में विलय |
अन्य स्थानीय घराने जिनका एक उल्लेख जरूरी है
- गिरिडीह पट्टी का खड़गडीहा राज, उत्तरी छोटानागपुर की पुरानी सरदारी
- पोड़ाहाट का सिंहभूम का सिंह वंश, जिसका सीधा संबंध हो क्षेत्र से रहा
- बंगाल की ओर पूर्वी किनारे पर मानभूम और धालभूम के सरदार
- इनमें से अधिकांश घराने 1765 के बाद ब्रिटिश सर्वोच्चता में जमींदारी के रूप में बने रहे
- इन सबकी साझी विशेषता — बड़ी सत्ता को कर, पर भीतरी जनजातीय व्यवस्था यथावत
याद रखने की ट्रिक — पलामू का क्रम — पहले रक्सेल, बाद में चेरो। तीन घराने तीन इलाके — नागवंशी = रांची-गुमला, चेरो = पलामू, रामगढ़ राज = हजारीबाग। एक लाइन में पूरा मध्यकालीन झारखंड।
यहां लोग गलती करते हैं — पलामू किला और पलामू जिला अलग हैं।
✗ पलामू के किले पलामू जिले में हैं | ✓ पलामू के दोनों किले आज लातेहार जिले में हैं
✗ मेदिनी राय नागवंशी शासक थे | ✓ मेदिनी राय पलामू के चेरो शासक थे
एग्जाम पॉइंटर — JPSC में मेदिनी राय और दाउद खान का प्रकरण कथन रूप में आता है, तथा रामगढ़ राज के राजधानी क्रम पर मिलान। JSSC और JKCE में सीधा — रामगढ़ राज कब बना, पलामू किले किस जिले में। दो प्रश्न तक का दायरा है, इसलिए तीनों घरानों की तालिका रटना फायदेमंद है।
एक नजर में
- पलामू का क्रम — पहले रक्सेल, फिर चेरो
- मेदिनी राय — चेरो शासक, 1658 से 1674
- पुराने किले का पुनर्निर्माण, 1673 में नया किला शुरू
- औरंगजेब के समय दाउद खान का आक्रमण 1660
- पलामू के दोनों किले आज लातेहार जिले में
- रामगढ़ राज की स्थापना 1368, बाघदेव सिंह द्वारा
- राजधानियां — उरदा, बादम, रामगढ़, इचाक, पद्मा
- दलेल सिंह ने राजधानी रामगढ़ की
- मुकुंद सिंह ने 1772 में कंपनी का विरोध किया
- तीन घराने — नागवंशी, चेरो, रामगढ़ राज
