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छोटानागपुर पठार

By ExamAtlas · 19/9/2026

छोटानागपुर पठार

छोटानागपुर पठार झारखंड का भौतिक आधार है। यह कठोर प्री-कैंब्रियन चट्टान का प्राचीन खंड है, जो लंबे युगों में घिसा, झुका और भ्रंशित हुआ, और यही कारण है कि इस राज्य में भारत के सर्वाधिक खनिज केंद्रित हैं।

आधार चट्टान — प्राचीन प्री-कैंब्रियन क्रिस्टलीय चट्टान | कोयला — घाटियों की गोंडवाना चट्टानों में

यह किस प्रकार का भू-रूप है

  • यह पठार है, पर्वत श्रेणी नहीं — पुरानी चट्टान का उठा हुआ, घिसा खंड
  • भारत के व्यापक प्रायद्वीपीय पठार का हिस्सा
  • मुख्यतः प्री-कैंब्रियन ग्रेनाइट, नाइस और शिस्ट पर निर्मित
  • लंबे अपरदन से कई स्तरों वाली सीढ़ीनुमा सतह बनी है
  • राज्य की नदियां इसी सतह में गहरी घाटियां काटती हैं
  • पठार का ढाल मोटे तौर पर पूर्व और दक्षिण-पूर्व की ओर है

यहां इतने खनिज क्यों हैं

  • प्राचीन क्रिस्टलीय चट्टानों में लोहा, तांबा, बॉक्साइट, अभ्रक और यूरेनियम मिलते हैं
  • दरार घाटियों में जमी गोंडवाना चट्टानों में कोयला है
  • दामोदर घाटी भारत की उत्कृष्ट गोंडवाना कोयला बेसिन है
  • पाट सतहों पर लैटेराइट का आवरण बॉक्साइट देता है
  • सिंहभूम पट्टी भारत के प्राचीनतम तांबा और लौह क्षेत्रों में है
  • यही खनिज संपदा राज्य के उद्योग, पलायन और राजनीति को समझाती है

इससे बनने वाली धरातलीय आकृतियां

आकृतिक्यों बनती हैउदाहरण
जलप्रपातनदियां एक पठारी स्तर से दूसरे पर गिरती हैंहुंडरू, दशम, जोन्हा
खड़ी कगारभ्रंशित पठारी किनारेपाट क्षेत्र का किनारा
ट्रफ घाटीदरार जैसी निचली पट्टीदामोदर घाटी
अवशिष्ट पहाड़ीअपरदन के बाद बची कठोर चट्टानपारसनाथ, दलमा
लैटेराइट आवरणमानसूनी जलवायु में लंबा अपक्षयनेतरहाट के पास पाट सतह

नाम और क्षेत्र

  • छोटानागपुर वर्तमान झारखंड और सटे क्षेत्रों की पठारी पट्टी को कहते हैं
  • एक व्याख्या नाम को नागवंशी राजधानी चुटिया और नागपुर से जोड़ती है
  • छोटानागपुर प्रमंडल ब्रिटिश शासन की एक प्रशासनिक इकाई थी
  • CNT अधिनियम 1908 का नाम इसी क्षेत्र से आया है
  • आज यह पट्टी उत्तरी और दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडलों में बंटी है

पठार के मानवीय परिणाम

  • पतली मिट्टी और कठोर चट्टान से सिंचाई कठिन है और खेती वर्षा पर निर्भर
  • पानी तेजी से बह जाता है, इसलिए वर्षा अधिक होने पर भी जल संकट रहता है
  • खनन और उद्योग खनिज पट्टियों पर केंद्रित हैं, बाकी जिले पीछे रह जाते हैं
  • वन आवरण उन्हीं ढलानों पर बचा जिन्हें जोता नहीं जा सका
  • पठार के अलगाव के कारण ही यहां जनजातीय समाज अपनी संस्थाएं इतने लंबे समय तक बचा सके

राज्य की चट्टान श्रेणियां

चट्टान श्रेणीक्या देती हैकहां
प्री-कैंब्रियन क्रिस्टलीयलोहा, तांबा, अभ्रक, बॉक्साइट का आधारसिंहभूम, रांची, कोडरमा पट्टी
गोंडवानाकोयलादामोदर घाटी और उत्तरी करनपुरा की ओर
बेसाल्ट (ट्रैप प्रकार)बेसाल्टिक पहाड़ियांराजमहल पहाड़ी
लैटेराइटबॉक्साइटलातेहार और गुमला की पाट सतह

याद रखने की ट्रिक — एक लाइन में पूरा पठार — पुरानी चट्टान = खनिज, गोंडवाना घाटी = कोयला, पाट की लैटेराइट = बॉक्साइट। तीन चट्टान, तीन खनिज।

यहां लोग गलती करते हैं — कोयला और बाकी खनिज अलग चट्टानों में मिलते हैं।

कोयला प्री-कैंब्रियन क्रिस्टलीय चट्टानों में मिलता है  |   कोयला घाटियों की गोंडवाना चट्टानों में; लोहा और तांबा पुरानी क्रिस्टलीय चट्टानों में

छोटानागपुर एक पर्वत श्रेणी है  |   छोटानागपुर एक पठार है, पर्वत श्रेणी नहीं

एग्जाम पॉइंटर — JPSC में पठार की चट्टान और खनिज का संबंध प्रारंभिक तथा मुख्य दोनों में आता है — 'गोंडवाना चट्टानें किस खनिज से जुड़ी हैं' प्रकार। JSSC और JKCE में सीधा — छोटानागपुर किस प्रकार का भू-रूप है। इस टॉपिक को अध्याय 9 के खनिज के साथ मिलाकर पढ़ें, दोनों एक ही कहानी हैं।

एक नजर में

  • भारतीय प्रायद्वीपीय खंड का एक पठार
  • आधार चट्टान — प्री-कैंब्रियन ग्रेनाइट, नाइस, शिस्ट
  • कोयला घाटियों की गोंडवाना चट्टानों में
  • दामोदर घाटी — उत्कृष्ट गोंडवाना कोयला बेसिन
  • बॉक्साइट पाट सतहों की लैटेराइट से
  • सिंहभूम — प्राचीन तांबा और लौह पट्टी
  • पठारी सीढ़ियों पर जलप्रपात — हुंडरू, दशम, जोन्हा
  • अवशिष्ट पहाड़ियां — पारसनाथ, दलमा
  • पतली मिट्टी से खेती वर्षा पर निर्भर
  • CNT अधिनियम का नाम इसी क्षेत्र से

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