छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908
छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908
छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908 वह कानून है जो उलगुलान से निकला। इसने जनजातीय भू-धृतियों को लिखित मान्यता दी और जनजातीय भूमि के बाहरी लोगों को हस्तांतरण पर रोक लगाई, और यह आज भी झारखंड का सबसे महत्वपूर्ण भूमि कानून है।
अधिनियमित — 1908 | क्षेत्र — छोटानागपुर प्रमंडल के जिले | उद्देश्य — जनजातीय भूमि की सुरक्षा
यह अधिनियम क्यों आया
- उलगुलान ने सरकार को मानने पर विवश किया कि असली शिकायत भूमि की हानि है
- सरदारी आंदोलन पहले ही भूमि छिनने का दस्तावेजी रिकॉर्ड बना चुका था
- पहले के कानूनों ने 1869 के सर्वे और रजिस्टर कार्य में भुइंहरी अधिकारों को माना था
- पारंपरिक भू-धृतियों को बिक्री, बंधक और पट्टे के विरुद्ध स्पष्ट सुरक्षा नहीं थी
- राज्य ने कानूनी उपाय चुना क्योंकि सैन्य उपायों ने कुछ हल नहीं किया था
अधिनियम क्या करता है
- अनुसूचित जनजाति के सदस्य की भूमि के हस्तांतरण पर गैर-जनजातीय को रोक
- खूंटकट्टी और भुइंहरी भू-धृतियों को वैधानिक मान्यता
- भूतखेता और पाहनई जैसी अन्य विशेष भू-धृतियों की मान्यता
- कानून के विरुद्ध हस्तांतरित भूमि की वापसी का प्रावधान
- विवाद साधारण दीवानी अदालत नहीं, राजस्व प्राधिकारियों के समक्ष
- जोत के उत्तराधिकार में जनजातीय प्रथा की मान्यता
सर्वाधिक नामित धाराएं
| प्रावधान | विषय |
|---|---|
| धारा 46 | रैयत के भूमि अधिकार के हस्तांतरण पर रोक |
| धारा 49 | निर्दिष्ट प्रयोजनों हेतु अनुमति से हस्तांतरण |
| धारा 71A | अवैध रूप से हस्तांतरित भूमि की वापसी |
| नौवीं अनुसूची | अधिनियम संविधान की नौवीं अनुसूची में रखा गया है |
यह आज भी क्यों महत्वपूर्ण है
- झारखंड में जनजातीय भूमि की सुरक्षा का कानूनी आधार यही है
- इसमें संशोधन का कोई भी प्रस्ताव राज्य का बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन जाता है
- संथाल परगना के लिए समानांतर कानून है SPT अधिनियम 1949
- दोनों अधिनियम मिलकर राज्य के अधिकांश अनुसूचित क्षेत्रों को कवर करते हैं
- भूमि अधिग्रहण, खनन और उद्योग — सबका सामना पहले इन्हीं दो कानूनों से होता है
CNT और SPT की तुलना
| बिंदु | CNT अधिनियम 1908 | SPT अधिनियम 1949 |
|---|---|---|
| क्षेत्र | छोटानागपुर प्रमंडल के जिले | संथाल परगना के जिले |
| उद्भव | उलगुलान के बाद | संथाल भूमि आंदोलन की लंबी विरासत |
| भू-धृतियां | खूंटकट्टी, भुइंहरी और अन्य | संथाल पारंपरिक जोत |
| हस्तांतरण नियम | सीमित अपवादों के साथ रोक | और भी कठोर रोक |
अधिनियम किन भू-धृतियों की रक्षा करता है
- खूंटकट्टी — उस वंश की सामूहिक भूमि जिसने सबसे पहले जंगल साफ किया
- भुइंहरी — प्रथम बसने वाले परिवारों की विशेषाधिकार युक्त जोत, सर्वे रजिस्टर में दर्ज
- भूतखेता — ग्राम देवताओं की पूजा से जुड़ी भूमि
- पाहनई — ग्राम पुरोहित पाहन के पद से जुड़ी भूमि
- राजहस या माझीहस — प्रधान के पद से जुड़ी भूमि, निजी संपत्ति नहीं
- ये सब पद या वंश से जुड़ी भू-धृतियां हैं, इसीलिए साधारण बिक्री कानून इन पर लागू नहीं होता
याद रखने की ट्रिक — दो अधिनियम, दो इलाके, दो वर्ष — CNT 1908 छोटानागपुर, SPT 1949 संथाल परगना। और दो जड़ें — CNT की जड़ उलगुलान, SPT की जड़ हूल की लंबी विरासत।
यहां लोग गलती करते हैं — दोनों अधिनियमों के वर्ष और क्षेत्र उलट जाते हैं।
✗ CNT अधिनियम 1949 और SPT अधिनियम 1908 | ✓ CNT अधिनियम 1908 और SPT अधिनियम 1949
✗ CNT अधिनियम पूरे झारखंड पर लागू है | ✓ CNT अधिनियम छोटानागपुर के जिलों पर; संथाल परगना में SPT अधिनियम लागू है
एग्जाम पॉइंटर — JPSC में CNT अधिनियम का उलगुलान से संबंध, नौवीं अनुसूची का उल्लेख और संशोधन का विवाद — तीनों आते हैं, प्रारंभिक और मुख्य दोनों में। JSSC CGL और JKCE में सीधा — CNT अधिनियम किस वर्ष का, किस क्षेत्र पर लागू। राजव्यवस्था अध्याय में भी यही अधिनियम दोबारा आएगा, इसलिए इसे एक बार में पक्का कर लें।
एक नजर में
- पूरा नाम — छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908
- 1899-1900 के उलगुलान से उत्पन्न
- जनजातीय भूमि के गैर-जनजातीय को हस्तांतरण पर रोक
- खूंटकट्टी और भुइंहरी भू-धृतियों की मान्यता
- धारा 46 — हस्तांतरण पर रोक
- धारा 49 — अनुमति से निर्दिष्ट प्रयोजन हेतु हस्तांतरण
- धारा 71A — अवैध हस्तांतरित भूमि की वापसी
- संविधान की नौवीं अनुसूची में सम्मिलित
- समानांतर कानून — संथाल परगना के लिए SPT अधिनियम 1949
- संशोधन का प्रस्ताव हर बार बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता है
