CNT और SPT अधिनियम
CNT और SPT अधिनियम
झारखंड में जनजातीय भूमि की रक्षा दो काश्तकारी कानून करते हैं। छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908 छोटानागपुर प्रमंडलों पर लागू है और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम 1949 संथाल परगना पर। दोनों जनजातीय भूमि के बाहरी लोगों को हस्तांतरण पर रोक लगाते हैं।
CNT अधिनियम — 1908, छोटानागपुर | SPT अधिनियम — 1949, संथाल परगना
दो अलग कानून क्यों
- दोनों क्षेत्र अलग-अलग तरीके से और अलग समय पर ब्रिटिश प्रशासन में आए
- 1855 के हूल के बाद संथाल परगना गैर-विनियमित जिला बना
- 1899-1900 के उलगुलान के बाद छोटानागपुर को अपना कानून मिला
- भू-धृतियां भी अलग हैं — छोटानागपुर में खूंटकट्टी और भुइंहरी, पूर्व में संथाल प्रथा
- इसीलिए राज्य में एक नहीं, दो भूमि व्यवस्थाएं हैं
तुलना
| बिंदु | CNT अधिनियम 1908 | SPT अधिनियम 1949 |
|---|---|---|
| क्षेत्र | छोटानागपुर प्रमंडल के जिले | संथाल परगना प्रमंडल के जिले |
| ऐतिहासिक कारण | 1899-1900 का उलगुलान | हूल के बाद संथाल भूमि आंदोलन |
| मान्य भू-धृतियां | खूंटकट्टी, भुइंहरी, भूतखेता, पाहनई | संथाल पारंपरिक जोत |
| हस्तांतरण नियम | सीमित अपवादों के साथ रोक | और भी कठोर रोक |
| विवाद मंच | राजस्व प्राधिकारी | राजस्व प्राधिकारी |
याद रखने योग्य प्रमुख प्रावधान
- दोनों जनजातीय भूमि के गैर-जनजातीय को हस्तांतरण पर रोक लगाते हैंबार-बार पूछा जाता है
- CNT अधिनियम की धारा 46 हस्तांतरण पर रोक से संबंधित है
- धारा 49 निर्दिष्ट प्रयोजनों हेतु अनुमति से हस्तांतरण की छूट देती है
- धारा 71A अवैध रूप से हस्तांतरित भूमि की वापसी का प्रावधान करती है
- CNT अधिनियम संविधान की नौवीं अनुसूची में रखा गया है
- दोनों अधिनियमों में उत्तराधिकार सामान्य कानून नहीं, जनजातीय प्रथा से चलता है
ये कानून चर्चा में क्यों रहते हैं
- इनमें संशोधन का कोई भी प्रस्ताव राज्य में बड़ा राजनीतिक विरोध खड़ा कर देता है
- उद्योग और खनन आसान भूमि अधिग्रहण चाहते हैं; समुदाय ढील का विरोध करते हैं
- लंबी लीज, बेनामी जोत और झूठे अभिलेख से अवैध हस्तांतरण लगातार समस्या है
- धारा 71A के तहत वापसी के मामले राजस्व अदालतों में वर्षों चलते हैं
- ये कानून पांचवीं अनुसूची, PESA और वन अधिकार अधिनियम के साथ जुड़कर काम करते हैं
पूछे जाने वाले बिंदु
- CNT अधिनियम का वर्ष — 1908; SPT अधिनियम — 1949
- CNT का क्षेत्र — छोटानागपुर; SPT का — संथाल परगना
- वापसी की धारा — CNT अधिनियम की 71A
- CNT को संरक्षण देने वाली अनुसूची — नौवीं
- CNT के पीछे का आंदोलन — उलगुलान
भूमि फिर भी कैसे हस्तांतरित हो सकती है
- शर्तों के साथ एक ही थाना क्षेत्र के जनजातीय व्यक्तियों के बीच हस्तांतरण
- सड़क या विद्यालय जैसे लोक प्रयोजन हेतु अनुमति से हस्तांतरण
- कृषि ऋण के लिए सरकारी समर्थित बैंक या सहकारी संस्था के पास बंधक
- विधिवत अनुमति के बाद निर्दिष्ट औद्योगिक या खनन प्रयोजन हेतु पट्टा
- इन रास्तों के बाहर कोई भी हस्तांतरण शून्य है और धारा 71A के तहत पलटा जा सकता है
याद रखने की ट्रिक — दो अधिनियम, दो वर्ष, दो इलाके — CNT 1908 छोटानागपुर, SPT 1949 संथाल परगना। और तीन धाराएं — 46 रोक, 49 छूट, 71A वापसी।
यहां लोग गलती करते हैं — दोनों अधिनियमों के वर्ष और क्षेत्र प्रायः उलट जाते हैं।
✗ SPT अधिनियम 1908 और CNT अधिनियम 1949 | ✓ CNT अधिनियम 1908 और SPT अधिनियम 1949
✗ CNT अधिनियम पूरे झारखंड पर लागू है | ✓ CNT छोटानागपुर के जिलों पर; संथाल परगना में SPT लागू है
एग्जाम पॉइंटर — JPSC में यह टॉपिक प्रारंभिक और मुख्य दोनों में आता है — धारा का नाम प्रारंभिक में, संशोधन का विवाद मुख्य में। JSSC CGL, JTGLCCE और JKCE में सीधा वर्ष और क्षेत्र। दो वर्ष और तीन धाराएं — इतना ही पर्याप्त है।
एक नजर में
- CNT अधिनियम 1908 — छोटानागपुर प्रमंडल के जिले
- SPT अधिनियम 1949 — संथाल परगना के जिले
- दोनों जनजातीय भूमि हस्तांतरण पर रोक लगाते हैं
- धारा 46 — हस्तांतरण पर रोक
- धारा 49 — अनुमति से निर्दिष्ट प्रयोजन हेतु हस्तांतरण
- धारा 71A — अवैध हस्तांतरित भूमि की वापसी
- CNT अधिनियम नौवीं अनुसूची में
- CNT उलगुलान के बाद; SPT संथाल भूमि संघर्ष के बाद
- भू-धृतियां — छोटानागपुर में खूंटकट्टी और भुइंहरी
- संशोधन के प्रस्ताव हमेशा राजनीतिक टकराव बनते हैं
