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कोयला और लौह अयस्क

Coal and Iron Ore

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कोयला और लौह अयस्क वही दो खनिज हैं जिन्होंने झारखंड की अर्थव्यवस्था बनाई। कोयला दामोदर और करनपुरा घाटियों की गोंडवाना चट्टानों में है, लौह अयस्क सिंहभूम की पहाड़ियों में, और दोनों ने मिलकर राज्य को भारत का इस्पात आधार बनाया।

कोयला — दामोदर और करनपुरा घाटी | लौह अयस्क — पश्चिमी सिंहभूम | भारत में कोकिंग कोल का एकमात्र स्रोत

राज्य के कोयला क्षेत्र

कोयला क्षेत्रजिला पट्टीटिप्पणी
झरियाधनबादभारत का मुख्य कोकिंग कोल क्षेत्र
बोकारोबोकारोबोकारो इस्पात संयंत्र को आपूर्ति
उत्तरी करनपुराचतरा, हजारीबाग, रामगढ़क्षेत्रफल में राज्य का सबसे बड़ा कोयला क्षेत्र
दक्षिणी करनपुरारामगढ़ और हजारीबाग की ओरपुराना कार्यरत क्षेत्र
रामगढ़रामगढ़दामोदर पट्टी का भाग
गिरिडीह (करहरबली)गिरिडीहपुराना क्षेत्र, अच्छी गुणवत्ता का कोयला
औरंगा और हुटारलातेहार और पलामूपश्चिमी क्षेत्र
राजमहलगोड्डा और साहिबगंजताप बिजली घरों को आपूर्ति

कोयले के याद रखने योग्य तथ्य

  • झारखंड में भारत के लगभग 27.3 प्रतिशत कोयला भंडार हैं, जो सर्वाधिक हैबार-बार पूछा जाता है
  • झरिया भारत में कोकिंग कोल का मुख्य स्रोत है
  • ब्लास्ट फर्नेस में इस्पात बनाने के लिए कोकिंग कोल आवश्यक है
  • झरिया लंबे समय से जल रही भूमिगत कोयला आग के लिए भी जाना जाता है
  • यहां का कोयला गोंडवाना तंत्र का है, नवीन टर्शियरी तंत्र का नहीं
  • BCCL, CCL और ECL राज्य में कार्यरत मुख्य सार्वजनिक कोयला कंपनियां हैं

लौह अयस्क

  • पश्चिमी सिंहभूम जिले की सिंहभूम पहाड़ियों में केंद्रित
  • मुख्य खदानें — नोआमुंडी, गुआ, किरीबुरू, मेघाहातुबुरू
  • अयस्क मुख्यतः उच्च कोटि का हेमेटाइट है
  • भारत के लगभग 26 प्रतिशत हेमेटाइट भंडार झारखंड में हैं
  • अधिकांश अयस्क सारंडा वन के भीतर या उससे सटे क्षेत्र से निकलता है
  • यह जमशेदपुर और बोकारो के इस्पात संयंत्रों को आपूर्ति करता है

अयस्क से उद्योग तक

सामग्रीकहां सेकिस उद्योग को
कोकिंग कोलझरियाजमशेदपुर और बोकारो की ब्लास्ट फर्नेस
लौह अयस्कनोआमुंडी, गुआ, किरीबुरूइस्पात संयंत्र और स्पंज आयरन इकाइयां
चूना पत्थर और डोलोमाइटपलामू और सिंहभूम की ओरइस्पात निर्माण में फ्लक्स
ताप कोयलाकरनपुरा और राजमहलराज्य और बाहर के बिजली घर

पूछे जाने वाले बिंदु

  • मुख्य कोकिंग कोल क्षेत्र — झरिया
  • क्षेत्रफल में राज्य का सबसे बड़ा कोयला क्षेत्र — उत्तरी करनपुरा
  • मुख्य लौह अयस्क खदानें — नोआमुंडी, गुआ, किरीबुरू
  • लौह अयस्क का प्रकार — हेमेटाइट
  • कोयला तंत्र — गोंडवाना

कोयले की दो श्रेणियां अलग करें

  • कोकिंग कोल — ब्लास्ट फर्नेस में इस्पात बनाने के लिए; राख कम, कार्बन अधिक
  • गैर-कोकिंग या ताप कोयला — बिजली घरों में भाप बनाने के लिए जलाया जाता है
  • झरिया भारत का अधिकांश कोकिंग कोल देता है; करनपुरा और राजमहल ताप कोयला
  • झरिया होने के बावजूद भारत कोकिंग कोल आयात करता है, क्योंकि यहां राख की मात्रा अधिक है
  • यही एक अंतर राज्य के पेपरों के अधिकांश कोयला प्रश्नों को समझा देता है

याद रखने की ट्रिक — दो नाम, दो उद्योग — झरिया = कोकिंग कोल, नोआमुंडी = लौह अयस्क। इन दोनों के बिना जमशेदपुर और बोकारो नहीं चलते। और एक जोड़ — कोयला = गोंडवाना।

यहां लोग गलती करते हैं — सबसे बड़ा और सबसे प्रसिद्ध कोयला क्षेत्र अलग हैं।

✗ झरिया क्षेत्रफल में झारखंड का सबसे बड़ा कोयला क्षेत्र है  |  ✓ झरिया मुख्य कोकिंग कोल क्षेत्र है; क्षेत्रफल में सबसे बड़ा उत्तरी करनपुरा है

✗ झारखंड का कोयला टर्शियरी युग का है  |  ✓ झारखंड का कोयला गोंडवाना युग का है

एग्जाम पॉइंटर — JSSC CGL, JTGLCCE और JKCE में कोयला क्षेत्र-जिला और खदान-जिला का मिलान सीधा आता है। JPSC में झरिया की आग, कोकिंग कोल का महत्व और सारंडा का मुद्दा मुख्य परीक्षा में आते हैं। दो तालिकाएं याद कर लें — इस टॉपिक का पूरा दायरा वही है।

एक नजर में

  • कोयला हिस्सा — भारत का लगभग 27.3 प्रतिशत, सर्वाधिक
  • झरिया — भारत का मुख्य कोकिंग कोल क्षेत्र
  • उत्तरी करनपुरा — क्षेत्रफल में सबसे बड़ा
  • अन्य क्षेत्र — बोकारो, रामगढ़, गिरिडीह, औरंगा, हुटार, राजमहल
  • कोयला गोंडवाना तंत्र का
  • कोयला कंपनियां — BCCL, CCL, ECL
  • लौह खदानें — नोआमुंडी, गुआ, किरीबुरू, मेघाहातुबुरू
  • अयस्क प्रकार — उच्च कोटि हेमेटाइट
  • लौह अयस्क हिस्सा — भारत का लगभग 26 प्रतिशत
  • दोनों मिलकर जमशेदपुर और बोकारो को चलाते हैं

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