Study Material

Pick a study material, then a subject, then start reading.

ऊर्जा संसाधन

By ExamAtlas · 19/9/2026

ऊर्जा संसाधन

झारखंड की ऊर्जा कहानी कोयले पर टिकी है। दामोदर घाटी के ताप संयंत्र स्थानीय कोयले पर चलते हैं, DVC के बांध जल विद्युत जोड़ते हैं, और अब राज्य सौर ऊर्जा भी जोड़ रहा है, जबकि आपूर्ति तथा वितरण हानि की समस्या पुरानी है।

मुख्य स्रोत — दामोदर घाटी के कोयले पर ताप बिजली | जल विद्युत — DVC और स्वर्णरेखा परियोजनाएं

ताप विद्युत

  • ताप संयंत्र कोयला क्षेत्रों के पास लगाए जाते हैं ताकि ढुलाई का खर्च घटे
  • रामगढ़ जिले का पतरातू राज्य के सबसे पुराने ताप संयंत्रों में है
  • तेनुघाट ताप संयंत्र दामोदर घाटी के कोयले पर चलता है
  • बोकारो और चंद्रपुरा घाटी में DVC के ताप संयंत्र हैं
  • उत्तर-पूर्व की राजमहल कोयला पट्टी के पास नई क्षमता जुड़ी है
  • राज्य की स्थापित क्षमता में ताप विद्युत का प्रभुत्व है

जल विद्युत और अन्य स्रोत

  • मैथन, पंचेत और तिलैया के DVC जलाशयों में जल विद्युत इकाइयां हैं
  • सिकिदिरी जल विद्युत परियोजना स्वर्णरेखा और गेतलसूद जलाशय का उपयोग करती है
  • स्वर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना सिंचाई, जलापूर्ति और बिजली तीनों जोड़ती है
  • नदियां मौसमी होने के कारण जल विद्युत क्षमता ताप की तुलना में कम है
  • सौर पार्क और रूफटॉप योजनाएं इस मिश्रण में नवीनतम जोड़ हैं
  • दूरस्थ वन गांवों में घरेलू सौर और मिनी ग्रिड सर्वाधिक उपयोगी हैं

विद्युत ढांचा एक नजर में

प्रकारउदाहरणआधार
तापपतरातू, तेनुघाट, बोकारो, चंद्रपुरास्थानीय गोंडवाना कोयला
जल विद्युतमैथन, पंचेत, तिलैया, सिकिदिरीDVC और स्वर्णरेखा जलाशय
कैप्टिव विद्युतजमशेदपुर और बोकारो के संयंत्रउद्योग की अपनी इकाइयां
सौरसौर पार्क और रूफटॉप योजनाएंनई क्षमता वृद्धि

विद्युत क्षेत्र की समस्याएं

  • ऊंची पारेषण और वितरण हानि उपयोगी आपूर्ति घटा देती है
  • पुरानी ताप इकाइयां क्षमता से कम चलती हैं और नवीनीकरण चाहती हैं
  • ग्रामीण फीडरों पर लंबी कटौती रहती है, विशेषकर गर्मियों में
  • कोयला आधारित उत्पादन राज्य की वायु प्रदूषण समस्या बढ़ाता है
  • राख निपटान और जल उपयोग बार-बार उठने वाली पर्यावरणीय शिकायतें हैं
  • राज्य राष्ट्रीय ग्रिड को बिजली देता है और स्थानीय स्तर पर कमी झेलता है

पूछे जाने वाले बिंदु

  • बिजली उत्पादन का मुख्य आधार — कोयला आधारित तापबार-बार पूछा जाता है
  • रामगढ़ जिले का ताप संयंत्र — पतरातू
  • स्वर्णरेखा पर जल विद्युत परियोजना — सिकिदिरी
  • मैथन और पंचेत चलाने वाला निकाय — DVC
  • ताप विद्युत के प्रभुत्व का कारण — खदान के पास कोयला

बिजली से आगे की ऊर्जा

  • ग्रामीण घर आज भी खाना पकाने के लिए जलावन लकड़ी और फसल अवशेष पर बहुत निर्भर हैं
  • राष्ट्रीय योजनाओं से LPG कनेक्शन बढ़े हैं पर रिफिल की लागत उपयोग सीमित करती है
  • कोयला स्वयं शेष भारत को राज्य का सबसे बड़ा ऊर्जा निर्यात है
  • कैप्टिव संयंत्रों से इस्पात और एल्युमीनियम इकाइयां राज्य ग्रिड से स्वतंत्र चलती हैं
  • यहां ऊर्जा नियोजन कोयला नीति और खनन निर्णयों से अलग नहीं किया जा सकता

याद रखने की ट्रिक — दो स्तंभ, एक कमजोरी — ताप बिजली और DVC जल विद्युत दो स्तंभ, और वितरण हानि सबसे बड़ी कमजोरी। एक लाइन में पूरा विद्युत क्षेत्र।

यहां लोग गलती करते हैं — बिजली का उत्पादन और बिजली की उपलब्धता अलग बात है।

झारखंड में अधिशेष बिजली है इसलिए गांवों में कटौती नहीं होती  |   राज्य उत्पादन तो अधिक करता है पर वितरण हानि और पुरानी लाइनें कटौती कराती हैं

DVC केवल बांध बनाता है  |   DVC बांध और ताप बिजली घर दोनों चलाता है

एग्जाम पॉइंटर — JPSC में ऊर्जा संसाधन अर्थव्यवस्था के साथ आता है — 'खनिज होने पर भी बिजली संकट क्यों' प्रकार का मुख्य परीक्षा प्रश्न। JSSC CGL और JKCE में सीधा — पतरातू किस जिले में, सिकिदिरी किस नदी पर। नाम और जिला याद रखें, आंकड़ों की गहराई जरूरी नहीं।

एक नजर में

  • विद्युत आधार — कोयला आधारित ताप
  • पतरातू — रामगढ़ जिला
  • तेनुघाट — दामोदर घाटी कोयले पर ताप संयंत्र
  • बोकारो और चंद्रपुरा — DVC के ताप संयंत्र
  • राजमहल कोयला पट्टी के पास नई क्षमता
  • जल विद्युत — मैथन, पंचेत, तिलैया
  • सिकिदिरी जल विद्युत, स्वर्णरेखा और गेतलसूद जलाशय
  • उद्योग बड़े कैप्टिव विद्युत संयंत्र चलाते हैं
  • मुख्य समस्या — पारेषण और वितरण हानि
  • ताप उत्पादन वायु प्रदूषण बढ़ाता है

Checking your account…

Create a free ExamAtlas account to read the full study material.