प्रमुख पर्व: सरहुल, करमा और सोहराय
Major Festivals: Sarhul, Karma and Sohrai
झारखंड का पर्व-कैलेंडर खेती के वर्ष के साथ चलता है। सरहुल वसंत में साल के फूल के साथ वर्ष का आरंभ करता है, करमा वर्षा ऋतु में परिवार के कल्याण के लिए आता है, और सोहराय फसल के बाद पशुधन का सम्मान करता है।
सरहुल — वसंत, साल का फूल | करमा — भादो, करम डाल | सोहराय — फसल के बाद, पशुधन
सरहुल
- वसंत का पर्व और जनजातीय नववर्ष का पारंपरिक आरंभ
- चैत्र मास में मनाया जाता है, जब साल वृक्ष में फूल आते हैंबार-बार पूछा जाता है
- पूजा सरना स्थल पर होती है, जिसे पाहन संपन्न कराते हैं
- साल का फूल चढ़ाया जाता है और तभी गांव में नई उपज का प्रयोग शुरू होता है
- यह मूलतः धरती और प्रकृति का पर्व है, जो सूर्य और धरती के विवाह का प्रतीक माना जाता है
- उरांव, मुंडा, हो और अन्य समुदाय पूरे पठार में इसे मनाते हैं
करमा
- भादो की एकादशी को, वर्षा ऋतु में मनाया जाता है
- करम वृक्ष की डाल अखरा में गाड़कर उसकी पूजा की जाती है
- बहनें इसे भाइयों के कल्याण और परिवार की मंगलकामना के लिए रखती हैं
- रात गीत और डाल के चारों ओर करमा नृत्य में बीतती है
- अगले दिन डाल को जल में प्रवाहित किया जाता है
- यह जनजातीय और सदान दोनों समुदायों में सर्वाधिक व्यापक पर्वों में से एक है
सोहराय
- फसल और पशुधन का पर्व, दीपावली के बाद कार्तिक अमावस्या के आसपास
- खेती में भूमिका के लिए पशुओं को नहलाकर, सजाकर उनकी पूजा की जाती है
- हजारीबाग और आसपास घरों की लिपाई कर सोहराय भित्ति चित्र बनाए जाते हैं
- संथालों में यह वर्ष का सबसे बड़ा पर्व है
- सदान पट्टी के कुछ भागों में इसे बांदना भी कहते हैं
राज्य के अन्य पर्व
| पर्व | समय | अर्थ |
|---|---|---|
| टुसू | जनवरी में मकर संक्रांति | फसल पर्व, मुख्यतः युवतियों के गीत |
| जनी शिकार | परंपरा से हर बारहवें वर्ष | महिलाओं द्वारा किया जाने वाला प्रतीकात्मक शिकार |
| भगता पर्व | वसंत | बुढ़ा बाबा से जुड़ा भक्ति पर्व |
| माघे या माघ पर्व | माघ मास | कृषि वर्ष समाप्त करने वाला संथाल पर्व |
| हल पुन्हया | माघ | नए कृषि चक्र का हल-पूजन पर्व |
| रोहिन | बुवाई के आरंभ पर | बीज बोने का अनुष्ठान |
| जितिया | आश्विन | माताओं द्वारा संतान के लिए |
पूछे जाने वाले बिंदु
- साल के फूल का पर्व — सरहुल
- करम डाल का पर्व — करमा
- फसल के बाद पशुधन का पर्व — सोहराय
- मकर संक्रांति का पर्व — टुसू
- महिलाओं का प्रतीकात्मक शिकार — जनी शिकार
याद रखने की ट्रिक — तीन पर्व, तीन मौसम — सरहुल वसंत में, करमा बरसात में, सोहराय फसल के बाद। और तीन चीजें — साल का फूल, करम की डाल, गाय-बैल।
यहां लोग गलती करते हैं — सोहराय पर्व और सोहराय चित्रकला एक नाम की दो चीजें हैं।
✗ सोहराय केवल एक चित्रशैली है | ✓ सोहराय पशु और फसल का पर्व है; भित्ति चित्र उसी समय बनते हैं और नाम वहीं से आया है
✗ सरहुल बरसात का पर्व है | ✓ सरहुल वसंत का पर्व है; बरसात का पर्व करमा है
एग्जाम पॉइंटर — JSSC CGL, JTGLCCE, JKCE और JTET में पर्व-मौसम तथा पर्व-प्रतीक का मिलान हर बार आता है। JPSC में पर्वों का कृषि चक्र से संबंध मुख्य परीक्षा में पूछा जा सकता है। तीन मुख्य पर्व पक्के करें, बाकी एक-एक पंक्ति में।
एक नजर में
- सरहुल — वसंत, चैत्र, सरना पर साल का फूल
- सरहुल की पूजा पाहन कराते हैं
- करमा — भादो की एकादशी, करम डाल
- करमा बहनें भाइयों के लिए रखती हैं
- सोहराय — फसल के बाद कार्तिक में पशु पर्व
- सदान पट्टी में सोहराय को बांदना भी कहते हैं
- टुसू — मकर संक्रांति का फसल पर्व
- जनी शिकार — महिलाओं का प्रतीकात्मक शिकार
- हल पुन्हया — माघ का हल-पूजन पर्व
- कैलेंडर कृषि वर्ष के साथ चलता है, किसी स्थिर धार्मिक चक्र से नहीं
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