पांचवीं अनुसूची और TAC
पांचवीं अनुसूची और TAC
संविधान की पांचवीं अनुसूची अनुसूचित क्षेत्रों के लिए विशेष प्रशासनिक व्यवस्था बनाती है। झारखंड में यह राज्यपाल को कानूनों और भूमि पर असाधारण शक्तियां देती है, और मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली जनजातीय सलाहकार परिषद का गठन करती है।
पांचवीं अनुसूची — अनुच्छेद 244(1) | TAC — अधिकतम 20 सदस्य | झारखंड में अध्यक्ष मुख्यमंत्री
पांचवीं अनुसूची क्या करती है
- यह पूर्वोत्तर की छठी अनुसूची वाले राज्यों को छोड़कर अन्य राज्यों के अनुसूचित क्षेत्रों पर लागू है
- संवैधानिक संदर्भ — अनुच्छेद 244(1)
- राष्ट्रपति किसी क्षेत्र को अनुसूचित क्षेत्र घोषित करते हैं
- राज्यपाल निर्देश दे सकते हैं कि केंद्र या राज्य का कोई कानून वहां लागू न हो या संशोधन के साथ लागू हो
- राज्यपाल शांति और सुशासन के लिए विनियम बना सकते हैं
- ऐसे विनियम भूमि हस्तांतरण पर रोक और साहूकारी पर नियंत्रण कर सकते हैं
- राज्यपाल इन क्षेत्रों पर वार्षिक प्रतिवेदन राष्ट्रपति को भेजते हैं
झारखंड में अनुसूचित क्षेत्र
- अनुसूचित क्षेत्र राज्य की जनजाति-बहुल पट्टियों को कवर करते हैं
- राज्य के PESA नियमों के अनुसार प्रावधान 13 जिलों में पूर्णतः और 3 में आंशिक रूप से लागू हैं
- ये मोटे तौर पर दक्षिणी छोटानागपुर, कोल्हान, संथाल परगना और पलामू की पट्टियां हैं
- इन्हीं क्षेत्रों में CNT और SPT भूमि कानून भी लागू रहते हैं
- इन क्षेत्रों में पंचायत अध्यक्ष पद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं
जनजातीय सलाहकार परिषद
- अनुसूचित जनजातियों के कल्याण पर सलाह देने के लिए पांचवीं अनुसूची के तहत गठित
- सदस्यता — अधिकतम 20 सदस्य
- लगभग तीन-चौथाई सदस्य राज्य विधानसभा के ST विधायक होते हैंबार-बार पूछा जाता है
- झारखंड में TAC की अध्यक्षता मुख्यमंत्री करते हैं
- यह उन विषयों पर सलाह देती है जो राज्यपाल इसे संदर्भित करते हैं
- विषयों में PESA का क्रियान्वयन, भूमि कानून और जनजातीय संस्कृति का संरक्षण आते हैं
पांचवीं अनुसूची एक नजर में
| विषय | विवरण |
|---|---|
| संवैधानिक अनुच्छेद | अनुच्छेद 244(1) |
| अनुसूचित क्षेत्र कौन घोषित करता है | राष्ट्रपति |
| कानूनों पर विशेष शक्ति | राज्यपाल |
| सलाहकार निकाय | जनजातीय सलाहकार परिषद |
| TAC के अधिकतम सदस्य | 20 |
| TAC में ST विधायकों का हिस्सा | लगभग तीन-चौथाई |
| वार्षिक प्रतिवेदन किसे | राष्ट्रपति को |
व्यवहार में यह क्यों महत्वपूर्ण है
- जनजातीय भूमि को विशेष संरक्षित मानने का संवैधानिक आधार यही है
- भूमि अधिग्रहण में ग्राम सभा की सहमति के तर्क का आधार भी यही है
- बहस चलती रहती है कि TAC सलाहकार हो या बाध्यकारी
- यह बहस भी चलती है कि इसकी अध्यक्षता राज्यपाल करें या मुख्यमंत्री
- राज्य का हर भूमि, खनन और वन विवाद अंततः इन्हीं प्रावधानों तक पहुंचता है
याद रखने की ट्रिक — दो आंकड़े एक साथ — अनुच्छेद 244(1), TAC में अधिकतम 20 सदस्य। और एक जोड़ — पांचवीं = झारखंड, छठी = पूर्वोत्तर।
यहां लोग गलती करते हैं — पांचवीं और छठी अनुसूची अलग हैं, और घोषणा कौन करता है यह भी उलटा याद रहता है।
✗ झारखंड के जनजातीय क्षेत्र छठी अनुसूची में आते हैं | ✓ झारखंड पांचवीं अनुसूची में आता है; छठी अनुसूची कुछ पूर्वोत्तर राज्यों के लिए है
✗ अनुसूचित क्षेत्र की घोषणा राज्यपाल करते हैं | ✓ घोषणा राष्ट्रपति करते हैं; राज्यपाल को विशेष शक्तियां मिलती हैं
एग्जाम पॉइंटर — JPSC का यह मूल टॉपिक है — प्रारंभिक में अनुच्छेद और सदस्य संख्या, मुख्य में 'TAC की भूमिका कितनी प्रभावी है' प्रकार का प्रश्न। JSSC CGL और JKCE में सीधा — TAC के अध्यक्ष कौन, पांचवीं अनुसूची का अनुच्छेद कौन-सा। इसे PESA के साथ एक ही बैठक में पढ़ें।
एक नजर में
- पांचवीं अनुसूची — अनुच्छेद 244(1)
- अनुसूचित क्षेत्र की घोषणा राष्ट्रपति करते हैं
- राज्यपाल वहां कानून रोक या संशोधित कर सकते हैं
- राज्यपाल भूमि हस्तांतरण और साहूकारी पर विनियम बना सकते हैं
- राज्यपाल वार्षिक प्रतिवेदन राष्ट्रपति को भेजते हैं
- PESA नियम 13 जिलों में पूर्णतः, 3 में आंशिक
- TAC अनुसूचित जनजाति कल्याण पर सलाह देती है
- TAC में अधिकतम 20 सदस्य
- लगभग तीन-चौथाई सदस्य ST विधायक
- झारखंड में अध्यक्षता मुख्यमंत्री करते हैं
