वन एवं वनस्पति
वन एवं वनस्पति
भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2023 के अनुसार झारखंड के लगभग 29.81 प्रतिशत भाग पर वन आवरण है, जो लगभग 23,766 वर्ग किलोमीटर बनता है। वन छत्र में साल का प्रभुत्व है और वनोपज आज भी ग्रामीण आय का बड़ा हिस्सा है।
वन आवरण — लगभग 23,766 वर्ग किमी, राज्य का लगभग 29.81 प्रतिशत (ISFR 2023)
आंकड़ों में वन आवरण
| श्रेणी | क्षेत्रफल | टिप्पणी |
|---|---|---|
| कुल वन आवरण | लगभग 23,766 वर्ग किमी | राज्य का लगभग 29.81 प्रतिशत |
| अति सघन वन | लगभग 2,635 वर्ग किमी | सर्वाधिक सुरक्षित खंड |
| मध्यम सघन वन | लगभग 9,641 वर्ग किमी | गुणवत्ता की सबसे बड़ी श्रेणी |
| खुला वन | लगभग 11,489 वर्ग किमी | क्षेत्रफल में सबसे बड़ा हिस्सा |
| दर्ज वन का प्रकार | मुख्यतः संरक्षित वन | संरक्षित वन सबसे बड़ी विधिक श्रेणी |
वनस्पति के प्रकार
- राज्य मुख्यतः उष्णकटिबंधीय शुष्क पतझड़ वन पट्टी में आता है
- दक्षिण और पाट सतहों के आर्द्र भागों में आर्द्र पतझड़ वन मिलते हैं
- साल प्रमुख प्रजाति है और उसी से साल वन पट्टी का नाम है
- अन्य सामान्य वृक्ष — महुआ, पलाश, कुसुम, करंज, सेमल, बांस
- घास और झाड़ी क्षरित ढलानों तथा छोड़ी गई खनन भूमि पर हैं
- पलामू जैसे शुष्क पश्चिमी जिलों में अधिक खुली, कंटीली वनस्पति मिलती है
वनोपज और ग्रामीण जीवन
- पत्तल-दोना के लिए साल पत्ता और तेल के लिए साल बीज
- महुआ के फूल और बीज — भोजन, तेल और पारंपरिक पेय
- कुसुम और पलाश जैसे पोषक वृक्षों से लाह; झारखंड प्रमुख लाह उत्पादक है
- बीड़ी बनाने के लिए तेंदू पत्ता, बड़ी मौसमी नकद आय
- शहद, औषधीय पौधे, राल और बांस पूरे राज्य में एकत्र किए जाते हैं
- इन्हें लघु वनोपज कहते हैं, यद्यपि कई परिवारों के लिए यही मुख्य आय है
वन और कानून
- राज्य की वन भूमि अधिकतर संरक्षित वन श्रेणी में आती है
- वन अधिकार अधिनियम 2006 व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकारों को मान्यता देता है
- चराई और उपज पर निस्तार अधिकारों के सामुदायिक दावे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं
- सरना पवित्र स्थल कानून से नहीं, जनजातीय प्रथा से संरक्षित है
- खनन स्वीकृति और वन भूमि का अन्य उपयोग राज्य का सर्वाधिक विवादित पर्यावरण मुद्दा है
पूछे जाने वाले बिंदु
- झारखंड का वन आवरण — क्षेत्रफल का लगभग 29.81 प्रतिशतबार-बार पूछा जाता है
- प्रमुख वृक्ष प्रजाति — साल
- मुख्य वन प्रकार — उष्णकटिबंधीय शुष्क पतझड़
- बीड़ी के लिए प्रयुक्त उपज — तेंदू पत्ता
- जनजातीय गांव का पवित्र स्थल — सरना
जिले और उनके वन
- वन सबसे सघन दक्षिण और पश्चिम में हैं — लातेहार, गुमला, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम
- पलामू और लातेहार में राज्य का बाघ और हाथी आवास है
- पश्चिमी सिंहभूम का सारंडा एशिया के सबसे बड़े साल वन खंडों में है
- जमशेदपुर के पास दलमा सबसे प्रसिद्ध हाथी क्षेत्र है
- सघन बसे खनन और शहरी जिलों में वन सबसे कम हैं
- नेतरहाट और पाट सतहों पर राज्य के ठंडे, अधिक आर्द्र वन हैं
याद रखने की ट्रिक — चार वनोपज याद रखें — सा-म-ला-ते: साल, महुआ, लाह, तेंदू। और एक आंकड़ा — लगभग 30 प्रतिशत वन।
यहां लोग गलती करते हैं — वन क्षेत्र और वन आवरण अलग चीजें हैं।
✗ 29.81 प्रतिशत राज्य का दर्ज वन क्षेत्र है | ✓ 29.81 प्रतिशत ISFR 2023 के अनुसार वन आवरण है; दर्ज वन क्षेत्र अलग विधिक आंकड़ा है
✗ झारखंड के वन मुख्यतः सदाबहार हैं | ✓ झारखंड के वन मुख्यतः उष्णकटिबंधीय शुष्क पतझड़ हैं
एग्जाम पॉइंटर — JPSC में वन आवरण का प्रतिशत, वन अधिकार अधिनियम और वन कटाई का मुद्दा मुख्य परीक्षा में आते हैं। JSSC CGL और JKCE में सीधा — वन आवरण कितने प्रतिशत, प्रमुख वृक्ष कौन-सा। प्रतिशत अनुमानित याद रखें और रिपोर्ट का नाम लिखें, तभी उत्तर मजबूत दिखता है।
एक नजर में
- वन आवरण — लगभग 23,766 वर्ग किमी
- राज्य क्षेत्रफल का लगभग 29.81 प्रतिशत (ISFR 2023)
- अति सघन वन — लगभग 2,635 वर्ग किमी
- क्षेत्रफल में खुला वन सबसे बड़ी श्रेणी
- मुख्य वन प्रकार — उष्णकटिबंधीय शुष्क पतझड़
- प्रमुख प्रजाति — साल
- अन्य वृक्ष — महुआ, पलाश, कुसुम, सेमल, बांस
- प्रमुख उपज — साल पत्ता, महुआ, लाह, तेंदू
- वन अधिकार अधिनियम 2006 सामुदायिक अधिकार मानता है
- सरना स्थल प्रथा से संरक्षित
