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वाद्य यंत्र और हस्तशिल्प

Musical Instruments and Handicraft

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झारखंड के शिल्प उसके वनों और धातु से निकलते हैं। बांस, काष्ठ, पत्थर, मिट्टी, ढोकरा धातु ढलाई और तसर रेशम मुख्य परंपराएं हैं, और हर पर्व में बजने वाले ढोल स्वयं गांव में बनी वस्तुएं हैं।

प्रमुख शिल्प — ढोकरा धातु ढलाई | प्रमुख वस्त्र — तसर रेशम | प्रमुख ढोल — मांदर

वाद्य स्वयं शिल्प हैं

  • मांदर — मिट्टी के ढांचे वाला दो-मुखी ढोल, जिसे गांव के कुम्हार बनाते हैं
  • नगाड़ा — धातु या मिट्टी का नगाड़ा, डंडों से बजता है
  • ढाक, ढोल और ढमसा — जुलूस और छऊ में प्रयुक्त बड़े ढोल
  • तमक और तुमदक — संथाल ढोल की जोड़ी
  • बनम — एक ही लकड़ी के टुकड़े से तराशा गया गज-वाद्य
  • तिरियो, बांसुरी और नरसिंघा — क्षेत्र के सुषिर वाद्य
  • कुछ समुदायों में इन वाद्यों को बनाना स्वयं वंशानुगत शिल्प है

प्रमुख हस्तशिल्प

शिल्पसामग्रीकहां
ढोकराकांसा, लुप्त मोम विधिमलहार और संबंधित समुदायों द्वारा
बांस शिल्पबांस और बेंतराज्य भर के वन जिले
काष्ठ शिल्पसाल और अन्य इमारती लकड़ीकई जनजातीय पट्टियों में परंपरागत
पत्थर शिल्पस्थानीय पत्थरराजमहल और अन्य खनन पट्टी
टेराकोटा और मृद्भांडमिट्टीगांव के कुम्हार समुदाय
तसर रेशम बुनाईतसर कोयासरायकेला का कुचाई और आसपास
छऊ मुखौटा निर्माणमिट्टी, कागज और कपड़ासरायकेला

ढोकरा धातु शिल्प

  • लुप्त मोम विधि से बनता है, जो भारत की प्राचीनतम धातु ढलाई तकनीकों में है
  • मिट्टी के कोर पर मोम चढ़ता है, फिर मिट्टी; पिघली धातु मोम की जगह ले लेती है
  • हर टुकड़ा अनोखा होता है क्योंकि निकालने के लिए सांचा तोड़ना पड़ता है
  • सामान्य उत्पाद हैं मूर्तियां, दीपक, पशु आकृतियां और जनजातीय देव रूप
  • यह तकनीक क्षेत्र की प्राचीन तांबा और धातु परंपरा से सीधे जुड़ती है

वस्त्र और अन्य काम

  • तसर रेशम राज्य का सर्वाधिक प्रसिद्ध वस्त्र है, जो असन और अर्जुन वृक्षों पर पलता है
  • सरायकेला-खरसावां का कुचाई प्रसिद्ध तसर बुनाई केंद्र है
  • चांदी, पीतल और मनकों के जनजातीय आभूषण के विशिष्ट स्थानीय रूप हैं
  • लाह की चूड़ियां शिल्प क्षेत्र को राज्य की लाह खेती से जोड़ती हैं
  • बांस की टोकरी, चटाई और मछली पकड़ने के साधन बिक्री से अधिक उपयोग के लिए बनते हैं
  • अब शिल्प को सहकारी समितियों, प्रदर्शनियों और विपणन संस्थाओं से सहयोग मिलता है

शिल्प, आय और नीति

  • जो परिवार केवल मानसून में खेती करते हैं, उनके लिए शिल्प कमजोर मौसम की आय है
  • यह अधिकतर घरेलू काम है, इसलिए इसमें पूंजी बहुत कम लगती है
  • विपणन कमजोर कड़ी है — उत्पादक सस्ता बेचते हैं और मुनाफा बिचौलिए ले जाते हैं
  • सहकारी समितियां, स्वयं सहायता समूह और राज्य एम्पोरियम इस कड़ी को छोटा करने का प्रयास करते हैं
  • GI टैग या डिजाइन पुरस्कार कीमत और पहचान बढ़ाते हैं, जैसा सोहराय-खोवर में हुआ
  • सरायकेला के मुखौटों और अमादुबी की चित्रकला के आसपास शिल्प पर्यटन बढ़ाया जा रहा है

याद रखने की ट्रिक — चार शिल्प, चार सामग्री — ढोकरा धातु, बांस शिल्प बांस, तसर रेशम, मुखौटा मिट्टी। और एक वाद्य — मांदर, मिट्टी का ढोल।

यहां लोग गलती करते हैं — ढोकरा और साधारण धातु ढलाई एक नहीं हैं।

✗ ढोकरा की ढलाई बार-बार प्रयोग होने वाले सांचे में होती है  |  ✓ ढोकरा में सांचा हर बार तोड़ा जाता है, इसलिए हर टुकड़ा अनोखा होता है

✗ तसर रेशम शहतूत पर पलता है  |  ✓ तसर असन और अर्जुन वृक्षों पर पलता है; शहतूत मलबरी रेशम के लिए है

एग्जाम पॉइंटर — JSSC CGL, JKCE और JTET में शिल्प-सामग्री और वाद्य-समुदाय का मिलान सीधा आता है। JPSC में शिल्प और आजीविका का संबंध मुख्य परीक्षा में आता है, विशेषकर लाह और तसर के साथ। एक तालिका याद करें, यह टॉपिक समाप्त।

एक नजर में

  • ढोकरा — लुप्त मोम विधि से कांसे की ढलाई
  • सांचा टूटने से हर ढोकरा टुकड़ा अनोखा
  • तसर रेशम — असन और अर्जुन वृक्षों पर
  • सरायकेला का कुचाई प्रसिद्ध तसर बुनाई केंद्र
  • छऊ मुखौटा निर्माण — सरायकेला का शिल्प
  • बांस, काष्ठ, पत्थर और टेराकोटा अन्य मुख्य शिल्प
  • मांदर — मिट्टी का ढोल, प्रतीक वाद्य
  • नगाड़ा, ढाक, ढमसा — बड़े ढोल
  • तमक और तुमदक — संथाल ढोल जोड़ी
  • बनम — एक ही लकड़ी से तराशा गज-वाद्य

अब कला, संस्कृति और पर्व पर प्रश्न ExamAtlas मॉक टेस्ट में प्रैक्टिस करें — JPSC और JSSC दोनों पैटर्न में।

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