जयपाल सिंह मुंडा
जयपाल सिंह मुंडा
जयपाल सिंह मुंडा ओलंपिक स्वर्ण जीतने वाली हॉकी टीम के कप्तान, संविधान सभा के सदस्य और तीन दशक तक झारखंड की मांग का राजनीतिक चेहरा रहे। जनजातीय समाज ने उन्हें मरांग गोमके यानी महान नेता कहा।
जन्म — 3 जनवरी 1903, टकरा पाहनटोली | मृत्यु — 20 मार्च 1970 | उपाधि — मरांग गोमके
जीवन संक्षेप में
- जन्म 3 जनवरी 1903 को टकरा पाहनटोली में, वर्तमान खूंटी जिला
- शिक्षा सेंट पॉल स्कूल रांची और फिर ऑक्सफोर्ड में
- 1928 एम्स्टर्डम ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम के कप्तान के रूप में स्वर्णबार-बार पूछा जाता है
- मुंडारी में मरांग गोमके कहलाए, अर्थात महान नेता
- मृत्यु 20 मार्च 1970 को नई दिल्ली में
राजनीतिक जीवन
- 1939 में आदिवासी महासभा के अध्यक्ष बने
- 1949-50 में महासभा का झारखंड पार्टी के रूप में पुनर्गठन कराया
- भारत की संविधान सभा के सदस्य, जनजातीय हितों के प्रवक्ता
- 1950 के दशक में झारखंड पार्टी को बिहार का मुख्य विपक्षी दल बनाया
- 1963 में पार्टी का भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में विलय किया
- यह विलय अलोकप्रिय रहा और इससे कई अलग गुट बने
संविधान सभा में
- उन्होंने भारत की आदिवासी आबादी की प्रतिनिधि आवाज के रूप में बात रखी
- उन्होंने तर्क दिया कि जनजातीय लोग देश के प्राचीनतम निवासी हैं, कोई पिछड़ा जोड़ नहीं
- उन्होंने जनजातीय भूमि और स्वशासन के संवैधानिक संरक्षण का समर्थन किया
- पांचवीं अनुसूची और आरक्षण की रूपरेखा उन्हीं चिंताओं को दर्शाती है
- संविधान में जनजातीय अधिकारों के लगभग हर विवरण में उनके भाषण उद्धृत होते हैं
जीवन एक नजर में
| वर्ष | पड़ाव |
|---|---|
| 1903 | टकरा पाहनटोली में जन्म |
| 1928 | एम्स्टर्डम में भारत को ओलंपिक हॉकी स्वर्ण दिलाया |
| 1939 | आदिवासी महासभा के अध्यक्ष |
| 1946 से 1950 | संविधान सभा के सदस्य |
| 1949 से 1950 | उनके नेतृत्व में झारखंड पार्टी का गठन |
| 1963 | झारखंड पार्टी का कांग्रेस में विलय |
| 1970 | नई दिल्ली में निधन |
उनका मूल्यांकन कैसे करें
- उन्होंने जनजातीय मांग को पहली बार राष्ट्रीय आवाज दी
- उन्होंने सिद्ध किया कि संवैधानिक राजनीति जनजातीय एजेंडा उठा सकती है
- 1963 का विलय उनके जीवन का सर्वाधिक आलोचित निर्णय है
- उसी विलय से बना शून्य आगे चलकर JMM ने भरा
- रांची स्थित झारखंड का केंद्रीय विश्वविद्यालय उनके नाम पर है
आंदोलन काल के अन्य नाम
- थेबले उरांव और पॉल दयाल — 1915 से 1938 के चरण के संगठक
- राम दयाल मुंडा — वे विद्वान जिन्होंने 1980 के दशक में आंदोलन को जोड़ा
- बिनोद बिहारी महतो — वे नेता जो कुड़मी और सदान आधार को आंदोलन में लाए
- शिबू सोरेन — JMM चरण के जननेता
- ए. के. राय — वे वामपंथी नेता जिन्होंने खनन मजदूर वर्ग को मांग से जोड़ा
- आंदोलन की ताकत इन्हीं अलग-अलग आधारों के मेल से बनी
याद रखने की ट्रिक — एक व्यक्ति, तीन भूमिकाएं — 1928 ओलंपिक स्वर्ण, 1939 महासभा अध्यक्ष, 1950 झारखंड पार्टी। और एक भूल — 1963 कांग्रेस में विलय।
यहां लोग गलती करते हैं — ओलंपिक का वर्ष और राजनीति का वर्ष प्रायः मिल जाते हैं।
✗ जयपाल सिंह ने 1938 में ओलंपिक स्वर्ण जीता | ✓ कप्तान के रूप में ओलंपिक स्वर्ण 1928 में; महासभा अध्यक्षता 1939 में
✗ जयपाल सिंह ने 1938 में आदिवासी महासभा की स्थापना की | ✓ महासभा 1938 में बनी; वे 1939 में अध्यक्ष बने
एग्जाम पॉइंटर — JSSC CGL, JKCE और JTET में जयपाल सिंह पर सीधा प्रश्न आता है — ओलंपिक, मरांग गोमके, झारखंड पार्टी। JPSC में संविधान सभा वाला कोण और 1963 के विलय का मूल्यांकन मुख्य परीक्षा में पूछा जा सकता है। दो वर्ष — 1928 और 1963 — कभी न भूलें।
एक नजर में
- जन्म 3 जनवरी 1903, टकरा पाहनटोली, खूंटी पट्टी
- शिक्षा सेंट पॉल रांची और ऑक्सफोर्ड
- 1928 ओलंपिक स्वर्ण विजेता हॉकी टीम के कप्तान
- उपाधि — मरांग गोमके
- 1939 से आदिवासी महासभा के अध्यक्ष
- संविधान सभा के सदस्य
- 1949-50 में झारखंड पार्टी की स्थापना
- 1950 के दशक में बिहार का मुख्य विपक्षी दल
- 1963 में पार्टी का कांग्रेस में विलय
- निधन 20 मार्च 1970, नई दिल्ली
