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कोल विद्रोह 1831-32

By ExamAtlas · 19/9/2026

कोल विद्रोह 1831-32

1831-32 का कोल विद्रोह छोटानागपुर के केंद्र में पहला बड़ा विद्रोह था। जनजातीय कृषक उन बाहरी ठेकेदारों के विरुद्ध उठे जिन्होंने उनकी भूमि ले ली थी, और अंग्रेजों का उत्तर पूरे पठार के लिए एक नई प्रशासनिक व्यवस्था के रूप में आया।

वर्ष — 1831 से 1832 | मुख्य क्षेत्र — रांची, हजारीबाग, पलामू, सिंहभूम | प्रमुख नाम — बुधु भगत

यह क्यों हुआ

  • नागवंशी शासकों और कंपनी ने बाहरी ठेकेदारों तथा जागीरदारों को भूमि दी
  • परंपरागत मुंडा और मानकी प्रधान अपनी ही भूमि के नियंत्रण से हटा दिए गए
  • अबवाब नामक नए उपकर और सलामी नामक जबरन भेंट लागू किए गए
  • नमक जैसी वस्तुओं पर कर लगे जो पहले मुक्त रूप से चलती थीं
  • नए भूस्वामियों के पीछे-पीछे साहूकार और शराब ठेकेदार गांवों में पहुंचे
  • तात्कालिक कारण सोनपुर और तमाड़ की ओर जनजातीय जोत का बाहरी लोगों को हस्तांतरण था

नेता और विस्तार

  • बुधु भगत विद्रोह के सबसे स्मरणीय नेता हैंबार-बार पूछा जाता है
  • अभिलेख में अन्य नाम — जोआ भगत, बिंदराय मानकी, सिंगराय मानकी और मदरा महतो
  • विद्रोह रांची, हजारीबाग, पलामू और सिंहभूम तक फैला
  • निशाना दिकू बाहरी लोगों के घर और अनाज भंडार थे, साधारण ग्रामीण नहीं
  • मुंडा, हो और उरांव कृषक साथ लड़े, इसी से यह विद्रोह इतना बड़ा हुआ

दमन और परिणाम

चरणक्या हुआ
प्रारंभ1831 से बाहरी भूस्वामियों और ठेकेदारों पर हमले
ब्रिटिश प्रतिक्रियाथॉमस विल्किंसन के नेतृत्व में कई ओर से सेना
फरवरी 1832क्रमिक मुठभेड़ों में विद्रोही शक्ति टूटी
उसके बादनेता मारे गए, पकड़े गए या निर्वासित हुए
प्रशासनिक परिणाम1834 में क्षेत्र दक्षिण-पश्चिम सीमांत एजेंसी बना

परिणाम क्यों महत्वपूर्ण है

  • दक्षिण-पश्चिम सीमांत एजेंसी 1834 ने क्षेत्र को सामान्य विनियमन से बाहर कर दिया
  • यहीं से यह विचार शुरू होता है कि छोटानागपुर को विशेष प्रशासनिक व्यवस्था चाहिए
  • थॉमस विल्किंसन वह अधिकारी हैं जिनका नाम इस व्यवस्था से जुड़ा है
  • यही तर्क आगे चलकर स्वतंत्रता के बाद पांचवीं अनुसूची और अनुसूचित क्षेत्र बनाता है
  • भूमि की मूल शिकायत हल नहीं हुई, इसीलिए अगले सत्तर वर्ष तक विद्रोह चलते रहे

जिन शब्दों में भ्रम नहीं होना चाहिए

  • यहां कोल एक व्यापक औपनिवेशिक शब्द है जो मुंडा, हो और उरांव कृषकों के लिए प्रयुक्त हुआ
  • दिकू का अर्थ है बाहरी, विशेषकर गैर-जनजातीय भूस्वामी या व्यापारी
  • ठेकेदार राजस्व ठेका लेने वाला, जो विद्रोह का सीधा निशाना था
  • अबवाब निर्धारित लगान से ऊपर लिया गया अवैध उपकर है
  • मानकी कई गांवों का प्रधान होता है और मुंडा एक गांव का प्रधान

याद रखने की ट्रिक — कोल विद्रोह का तीन-अंकीय जोड़ — 1831-32-34: 1831 शुरुआत, 1832 दमन, 1834 दक्षिण-पश्चिम सीमांत एजेंसी। और नाम — बुधु भगत पहले, बाकी बाद में।

यहां लोग गलती करते हैं — कोल विद्रोह और भूमिज विद्रोह दोनों 1832 के हैं पर अलग हैं।

कोल विद्रोह का नेतृत्व गंगा नारायण ने किया  |   कोल विद्रोह — बुधु भगत; भूमिज विद्रोह — गंगा नारायण सिंह

कोल एक जनजाति का नाम है  |   कोल एक सामूहिक औपनिवेशिक शब्द है, मुंडा-हो-उरांव के लिए

एग्जाम पॉइंटर — JPSC में कोल विद्रोह के कारण और उसका प्रशासनिक परिणाम दोनों पूछे जाते हैं, प्रायः पांचवीं अनुसूची की जड़ के रूप में। JSSC CGL, JTGLCCE और JTET में सीधा — नेता कौन, वर्ष कौन-सा, क्षेत्र कौन-सा। यह अध्याय का सर्वाधिक पूछा जाने वाला विद्रोह है।

एक नजर में

  • वर्ष — 1831 से 1832
  • क्षेत्र — रांची, हजारीबाग, पलामू, सिंहभूम
  • मुख्य नेता — बुधु भगत
  • अन्य नेता — जोआ भगत, बिंदराय मानकी, सिंगराय मानकी, मदरा महतो
  • कारण — ठेकेदारों और बाहरी भूस्वामियों को भूमि हस्तांतरण
  • नए बोझ — अबवाब, सलामी और नमक कर
  • ब्रिटिश अधिकारी — थॉमस विल्किंसन
  • परिणाम — दक्षिण-पश्चिम सीमांत एजेंसी 1834
  • छोटानागपुर के लिए विशेष प्रशासन की शुरुआत
  • कोल औपनिवेशिक सामूहिक शब्द है, कोई एक जनजाति नहीं

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