भाषाएं और साहित्य
Languages and Literature
झारखंड भारत के भाषाई रूप से सबसे विविध राज्यों में है। हिंदी राजभाषा है, संथाली आठवीं अनुसूची में है, और जनजातीय तथा क्षेत्रीय भाषाओं की लंबी सूची को द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्राप्त है।
राजभाषा — हिंदी | आठवीं अनुसूची में — संथाली | संथाली की लिपि — ओल चिकी
भाषा समूह
| परिवार | भाषाएं | समुदाय |
|---|---|---|
| ऑस्ट्रो-एशियाटिक (मुंडा) | संथाली, मुंडारी, हो, खड़िया, भूमिज | संथाल, मुंडा, हो, खड़िया, भूमिज |
| द्रविड़ | कुड़ुख, मालतो | उरांव, पहाड़िया |
| भारोपीय क्षेत्रीय | नागपुरी, खोरठा, कुरमाली, पंचपरगनिया | सदान और मिश्रित समुदाय |
| भारोपीय अन्य | हिंदी, उर्दू, बांग्ला, ओड़िया, मगही, अंगिका, मैथिली | पूरे राज्य और सीमावर्ती जिलों में |
संथाली और ओल चिकी लिपि
- संथाली राज्य की एकमात्र भाषा है जो आठवीं अनुसूची में हैबार-बार पूछा जाता है
- इसकी लिपि ओल चिकी का निर्माण पंडित रघुनाथ मुर्मू ने किया
- इस लिपि ने संथाली को अपना लिखित साहित्य दिया
- संथाली झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार और असम में बोली जाती है
- संथाल परगना के विद्यालयों में इसे पढ़ाया जाता है और शासकीय सामग्री में प्रयोग होता है
- रघुनाथ मुर्मू को संथाल समाज गुरु गोमके कहकर सम्मान देता है
क्षेत्रीय भाषाएं और उनके क्षेत्र
- नागपुरी — रांची और दक्षिणी छोटानागपुर पट्टी; समृद्ध गीत परंपरा
- खोरठा — उत्तरी छोटानागपुर और संथाल परगना की ओर
- कुरमाली — कोल्हान और मानभूम से लगे जिले
- पंचपरगनिया — रांची के पास तमाड़, बुंडू और सोनाहातू पट्टी
- ये भाषाएं जनजातीय और सदान समुदायों के बीच रोजमर्रा की कड़ी हैं
- इन सबके पास केवल लिखित पाठ नहीं, विशाल मौखिक गीत परंपरा है
साहित्यिक परंपरा
- अधिकांश जनजातीय साहित्य मौखिक रूप में शुरू हुआ — गीत, कथा, पहेली और मिथक
- लेखन लिपियों के निर्माण और मुद्रण के प्रसार के बाद आया
- नागपुरी और खोरठा में आधुनिक कविता और गीत लेखन विकसित है
- मिशनरी विद्वानों ने मुंडारी और कुड़ुख के आरंभिक व्याकरण तथा शब्दकोश बनाए
- एस. सी. राय ने इन समुदायों का पहला व्यवस्थित अध्ययन अंग्रेजी में लिखा
- जनजातीय भाषाओं का आधुनिक लेखन पहचान, भूमि और विस्थापन पर केंद्रित है
नाम याद रखने लायक मौखिक रूप
- झूमर गीत — झूमर नृत्य के साथ चलने वाला गीत रूप
- करमा गीत — करमा की रात भर गाए जाने वाले गीत
- टुसू गीत — टुसू पर्व के गीत, जिन्हें मुख्यतः युवतियां रचती हैं
- डोमकच गीत — घर की महिलाओं के विवाह गीत
- पाइका और डंडा गीत — युद्ध और जुलूस के रूप
- पहेलियां, लोकोक्तियां और उत्पत्ति-कथाएं शेष मौखिक परंपरा को संभालती हैं
राज्य की भाषा नीति
- कई जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को द्वितीय राजभाषा के रूप में अधिसूचित किया गया है
- इससे राज्य की परीक्षाओं और शासकीय पत्राचार में इनका प्रयोग संभव होता है
- इनमें से कुछ भाषाओं में पाठ्यपुस्तकें और शिक्षण सामग्री तैयार की जा रही हैं
- भाषा की मान्यता पहचान से जुड़ी बार-बार उठने वाली राजनीतिक मांग है
याद रखने की ट्रिक — दो नाम याद रखें — संथाली = ओल चिकी = रघुनाथ मुर्मू। और चार क्षेत्रीय भाषाएं — नागपुरी, खोरठा, कुरमाली, पंचपरगनिया।
यहां लोग गलती करते हैं — राजभाषा और आठवीं अनुसूची अलग चीजें हैं।
✗ संथाली झारखंड की राजभाषा है | ✓ राजभाषा हिंदी है; संथाली आठवीं अनुसूची वाली राज्य की भाषा है
✗ कुड़ुख मुंडा परिवार की भाषा है | ✓ कुड़ुख द्रविड़ परिवार की है; मुंडारी मुंडा परिवार की
एग्जाम पॉइंटर — JSSC CGL, JTGLCCE, JKCE और JTET में भाषा-परिवार मिलान और ओल चिकी के निर्माता सीधे पूछे जाते हैं। JPSC में भाषा नीति और जनजातीय पहचान पर मुख्य परीक्षा का प्रश्न बनता है। एक तालिका और दो नाम — इतना पर्याप्त है।
एक नजर में
- राजभाषा — हिंदी
- संथाली आठवीं अनुसूची में
- संथाली की लिपि — ओल चिकी
- ओल चिकी के निर्माता — पंडित रघुनाथ मुर्मू
- मुंडा परिवार — संथाली, मुंडारी, हो, खड़िया, भूमिज
- द्रविड़ परिवार — कुड़ुख और मालतो
- क्षेत्रीय भाषाएं — नागपुरी, खोरठा, कुरमाली, पंचपरगनिया
- कई भाषाओं को द्वितीय राजभाषा का दर्जा
- जनजातीय साहित्य की शुरुआत मौखिक परंपरा से
- एस. सी. राय ने आरंभिक व्यवस्थित अध्ययन लिखे
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