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खनन के प्रभाव

Impact of Mining

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खनन ने झारखंड को उसका उद्योग, उसके नगर और उसका बड़ा राजस्व दिया। उसी ने राज्य की सबसे गहरी समस्याएं भी दीं — बिना पुनर्वास के विस्थापन, क्षरित भूमि और जल, तथा समृद्ध क्षेत्र में गरीब लोगों का विरोधाभास।

मूल विरोधाभास — भारत का सर्वाधिक खनिज-समृद्ध राज्य, पर सामाजिक सूचकांक सबसे कमजोर में

आर्थिक प्रभाव

  • खनन रॉयल्टी और उपकर राज्य के स्वयं के राजस्व का बड़ा स्रोत हैं
  • इसी ने जमशेदपुर, बोकारो और धनबाद जैसे औद्योगिक नगर बनाए
  • यह इस्पात, स्पंज आयरन, सीमेंट और बिजली उद्योगों को सहारा देता है
  • खनन पूंजी प्रधान है, इसलिए प्रत्यक्ष रोजगार अपेक्षा से कम है
  • मूल्य संवर्धन अधिकतर राज्य के बाहर होता है, इसलिए राज्य को अयस्क का दाम मिलता है, उत्पाद का नहीं
  • राजस्व वस्तु-चक्र पर निर्भर है, इसलिए खनिज कीमतों के साथ राज्य वित्त भी झूलता है

सामाजिक प्रभाव

  • खदान, बांध और टाउनशिप से विस्थापन राज्य की सबसे पुरानी शिकायत है
  • पुनर्वास प्रायः अधूरा, विलंबित या केवल नकद भुगतान तक सीमित रहा
  • भूमि की हानि परिवारों को दिहाड़ी मजदूरी के लिए पलायन की ओर धकेलती है
  • खदानों के आसपास खेती और वनोपज आधारित पारंपरिक आजीविका सिकुड़ती है
  • धूल, जल संदूषण और असुरक्षित परित्यक्त गड्ढों से स्वास्थ्य प्रभाव व्यापक हैं
  • इन लागतों का असमान रूप से बड़ा हिस्सा जनजातीय समुदाय उठाते हैं

पर्यावरणीय प्रभाव

समस्याकहां दिखती है
वन कटाईलौह और कोयला पट्टियां, सारंडा की ओर सहित
भूमिगत कोयला आगझरिया कोयला क्षेत्र
जल प्रदूषणदामोदर और वाशरी के पास की धाराएं
वायु प्रदूषणधनबाद और औद्योगिक जिले
भू-धंसानझरिया पट्टी के पुराने भूमिगत कार्यक्षेत्र
फ्लाई ऐश और ओवरबर्डनताप संयंत्रों और खुली खदानों के आसपास

संसाधन अभिशाप का प्रश्न

  • राज्य के पास भारत के लगभग 40 प्रतिशत खनिज भंडार हैं
  • फिर भी खनन जिलों में गरीबी, पलायन और कम मानव विकास बना हुआ है
  • इसी अंतर को विद्वान संसाधन अभिशाप कहते हैं
  • कारणों में कमजोर मूल्य संवर्धन, अधूरा पुनर्वास और राजस्व का स्थानीय व्यय न होना आते हैं
  • झारखंड की अर्थव्यवस्था पर मुख्य परीक्षा के उत्तर की यह मानक रूपरेखा है

कानून क्या देता है

  • CNT और SPT अधिनियम जनजातीय भूमि के हस्तांतरण पर रोक लगाते हैं
  • पांचवीं अनुसूची और PESA अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा परामर्श अनिवार्य करते हैं
  • वन अधिकार अधिनियम 2006 वन भूमि परिवर्तन में समुदाय को आवाज देता है
  • जिला खनिज फाउंडेशन खनन राजस्व का हिस्सा प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाता है
  • हर परियोजना पर पर्यावरणीय और वन स्वीकृति की शर्तें लागू होती हैं

याद रखने की ट्रिक — एक लाइन का निचोड़ — जमीन से धन निकला, जमीन वाले पीछे रह गए। इसी को संसाधन अभिशाप कहते हैं, और यही मुख्य परीक्षा के उत्तर की पहली पंक्ति होनी चाहिए।

यहां लोग गलती करते हैं — खनन से राज्य की आय बढ़ना और स्थानीय विकास होना अलग बात है।

✗ अधिक खनिज राजस्व का अर्थ है अधिक स्थानीय विकास  |  ✓ राजस्व बढ़ सकता है और खनन जिले गरीब रह सकते हैं; यही संसाधन अभिशाप है

✗ विस्थापन की समस्या केवल पुरानी है  |  ✓ नई खदानें और उद्योग आज भी विस्थापन पैदा करते हैं

एग्जाम पॉइंटर — JPSC मुख्य परीक्षा में यह टॉपिक सर्वाधिक आता है — 'खनिज संपदा के बावजूद विकास क्यों नहीं' या 'खनन और पर्यावरण का संतुलन'। उत्तर में झरिया, सारंडा, DMF और PESA का नाम अवश्य दें। JSSC और JKCE में सीधा — DMF क्या है, झरिया किस समस्या के लिए जाना जाता है।

एक नजर में

  • खनन रॉयल्टी राज्य के स्वयं के राजस्व का बड़ा स्रोत
  • इसी से बने जमशेदपुर, बोकारो और धनबाद
  • खनन पूंजी प्रधान होने से रोजगार सीमित
  • मूल्य संवर्धन अधिकतर राज्य के बाहर
  • कमजोर पुनर्वास के साथ विस्थापन सबसे पुरानी शिकायत
  • झरिया — भूमिगत आग और भू-धंसान
  • दामोदर — वाशरी और नगरों से जल प्रदूषण
  • सारंडा — वन बनाम लौह अयस्क खनन
  • संपदा और कल्याण का अंतर ही संसाधन अभिशाप
  • कानूनी उपकरण — CNT, SPT, पांचवीं अनुसूची, PESA, FRA, DMF

अब खनिज और ऊर्जा पर प्रश्न ExamAtlas मॉक टेस्ट में प्रैक्टिस करें — JPSC और JSSC दोनों पैटर्न में।

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Impact of Mining in Jharkhand: Notes | Jharkhand GK — ExamAtlas