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नागवंशी शासन

By ExamAtlas · 19/9/2026

नागवंशी शासन

नागवंशी राजवंश छोटानागपुर क्षेत्र का सबसे लंबे समय तक चलने वाला शासक वंश था। परंपरा इसे पहली शताब्दी के फणि मुकुट राय से जोड़ती है, प्रमाणित इतिहास लगभग पंद्रहवीं शताब्दी से स्पष्ट होता है, और यह वंश 1952 में जमींदारी उन्मूलन तक चला।

परंपरागत संस्थापक — फणि मुकुट राय | क्षेत्र — छोटानागपुर, मुगलों के लिए कोकरह या खुखरा

उद्भव और लंबा विस्तार

  • परंपरागत संस्थापक — फणि मुकुट राय, जिन्हें किंवदंती पहली शताब्दी में रखती है
  • वंश का विश्वसनीय ऐतिहासिक अभिलेख लगभग पंद्रहवीं शताब्दी से स्पष्ट होता है
  • आधुनिक शोध वंश के मूल को राजपूत-शैली अपनाने से पहले मुंडा सामाजिक आधार से जोड़ता है
  • मुगल अभिलेख इस क्षेत्र को कोकरह या खुखरा कहते हैं
  • यह घराना जमींदारी के रूप में 1952 में उन्मूलन तक बना रहा

बदलती राजधानियां

राजधानीटिप्पणी
सुतियाम्बेपरंपरा में सबसे पुरानी गद्दी, रांची के पास
चुटियाछोटानागपुर नाम की एक व्याख्या इसी से जुड़ती है
खुखरामुगल इतिहासकार पूरे क्षेत्र को इसी नाम से लिखते थे
डोइसा / नवरत्नगढ़वर्तमान गुमला जिले की किलेबंद राजधानी
पालकोटलगभग 1719 में यदुनाथ शाह द्वारा सुरक्षा हेतु स्थानांतरित
रातू1870 में स्थानांतरित, वंश की अंतिम गद्दी

पेपर में आने वाले शासक

  • दुर्जन साल — 1615 में पराजित होकर मुगल सेना के बंदी बनेबार-बार पूछा जाता है
  • परंपरा के अनुसार उन्होंने नकली रत्नों में असली हीरा पहचानकर मुक्ति पाई
  • उन्हें शाह की उपाधि मिली और वार्षिक कर तय हुआ
  • रघुनाथ शाह (लगभग 1663 से 1690) — मंदिर निर्माता और मुगल दबाव के प्रतिरोधी
  • रांची के पास जगन्नाथपुर पहाड़ी का जगन्नाथ मंदिर उन्हीं से जोड़ा जाता है
  • अंतिम नाममात्र शासक लाल चिंतामणि शरण नाथ शाहदेव थे

नागवंशी शासन कैसे चलता था

  • शासन नौकरशाही राजस्व तंत्र से नहीं, स्थानीय जनजातीय प्रधानों के माध्यम से चलता था
  • मुंडा और मानकी जैसी ग्राम संस्थाएं दैनिक अधिकार अपने पास रखती थीं
  • राजा को कर और सैन्य सेवा मिलती थी, प्रारंभ में विस्तृत भू-राजस्व नहीं
  • इसी हल्के ढांचे के कारण भूमि हस्तांतरण तब गंभीर हुआ जब बाहरी जागीरदार आए
  • डोइसा का नवरत्नगढ़ किला, दरबार और मंदिर को एक ही परिसर में दिखाता है

यह वंश आगे के अध्यायों के लिए क्यों जरूरी है

  • बाद के नागवंशी शासकों द्वारा बाहरी लोगों को दी गई भूमि से दिकू भूस्वामी वर्ग बना
  • यही प्रक्रिया 1831 के कोल विद्रोह और बाद के कृषि असंतोष का सीधा कारण है
  • भुइंहरी और खूंटकट्टी भू-धृति के विवाद इसी काल से निकलते हैं
  • अंग्रेजों द्वारा राजा को जमींदार मानना कर-संबंध को संपत्ति-अधिकार में बदल गया
  • झारखंड का हर काश्तकारी कानून, CNT अधिनियम सहित, यहीं से शुरू हुई समस्या का उत्तर है

याद रखने की ट्रिक — राजधानी का क्रम याद रखें — सु-चु-खु-डो-पा-रा: सुतियाम्बे, चुटिया, खुखरा, डोइसा, पालकोट, रातू। शुरुआत रांची के पास, अंत भी रांची के पास — बीच में गुमला की ओर घूमा।

यहां लोग गलती करते हैं — डोइसा और नवरत्नगढ़ एक ही जगह के दो नाम हैं, अलग नहीं।

डोइसा और नवरत्नगढ़ दो अलग राजधानियां हैं  |   नवरत्नगढ़ डोइसा का किला है, एक ही स्थान

दुर्जन साल चेरो शासक थे  |   दुर्जन साल कोकरह के नागवंशी शासक थे

एग्जाम पॉइंटर — JPSC में नागवंशी राजवंश से राजधानियों का क्रम, दुर्जन साल का प्रकरण और भूमि अनुदान का प्रभाव पूछा जाता है — प्रायः कोल विद्रोह से जोड़कर। JSSC CGL और JTGLCCE में केवल नाम और स्थान — नवरत्नगढ़ किस जिले में, दुर्जन साल किस वंश के। यह अध्याय का सबसे स्कोरिंग टॉपिक है।

एक नजर में

  • परंपरागत संस्थापक — फणि मुकुट राय
  • स्पष्ट इतिहास लगभग 15वीं शताब्दी से
  • क्षेत्र का मुगल नाम — कोकरह / खुखरा
  • राजधानियां — सुतियाम्बे, चुटिया, खुखरा, डोइसा, पालकोट, रातू
  • नवरत्नगढ़ डोइसा का किला-राजधानी, गुमला जिले में
  • दुर्जन साल — 1615 में पराजित, बंदी, हीरा परीक्षा के बाद मुक्त
  • उपाधि शाह, साथ में वार्षिक कर
  • रघुनाथ शाह — मंदिर निर्माता, लगभग 1663 से 1690
  • पालकोट स्थानांतरण लगभग 1719; रातू स्थानांतरण 1870
  • जमींदारी उन्मूलन 1952 में

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