राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य
राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य
झारखंड में एक राष्ट्रीय उद्यान बेतला, एक टाइगर रिजर्व पलामू, और ग्यारह वन्यजीव अभयारण्य हैं। बेतला और पलामू एक ही वन क्षेत्र में लातेहार तथा पलामू की ओर पड़ते हैं, इसीलिए इन दोनों नामों में सबसे अधिक भ्रम होता है।
राष्ट्रीय उद्यान — 1, बेतला | टाइगर रिजर्व — 1, पलामू | वन्यजीव अभयारण्य — 11
संरक्षित क्षेत्र
| संरक्षित क्षेत्र | जिला पट्टी | किसके लिए प्रसिद्ध |
|---|---|---|
| बेतला राष्ट्रीय उद्यान | लातेहार | राज्य का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान, 1986 में अधिसूचित |
| पलामू टाइगर रिजर्व | लातेहार और पलामू | भारत के प्रथम नौ टाइगर रिजर्व में से एक |
| दलमा वन्यजीव अभयारण्य | पूर्वी सिंहभूम | हाथी; जमशेदपुर के पास |
| हजारीबाग वन्यजीव अभयारण्य | हजारीबाग | चीतल, सांभर और तेंदुआ आवास |
| महुआडांड़ भेड़िया अभयारण्य | लातेहार | भारतीय भेड़िये का प्रजनन क्षेत्र |
| उधवा झील पक्षी अभयारण्य | साहिबगंज | राज्य का एकमात्र पक्षी अभयारण्य |
| पालकोट वन्यजीव अभयारण्य | गुमला | सघन वन और विविध जीव |
| तोपचांची वन्यजीव अभयारण्य | धनबाद | झील और वन आवास |
| लावालौंग वन्यजीव अभयारण्य | चतरा | उत्तर का वन क्षेत्र |
| कोडरमा वन्यजीव अभयारण्य | कोडरमा | अभ्रक पट्टी का शुष्क पतझड़ वन |
| पारसनाथ वन्यजीव अभयारण्य | गिरिडीह | राज्य की सर्वोच्च पहाड़ी के आसपास |
बेतला और पलामू
- बेतला राज्य का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान है, अधिसूचना 1986बार-बार पूछा जाता है
- पलामू टाइगर रिजर्व प्रोजेक्ट टाइगर के प्रथम नौ रिजर्व में से एक था
- दोनों लातेहार और पलामू की ओर एक ही वन खंड में हैं
- इस क्षेत्र में बाघ, हाथी, तेंदुआ, गौर, सांभर और चीतल मिलते हैं
- पुराने पलामू किले इसी वन क्षेत्र के भीतर हैं
- पलामू पगमार्क से बाघों की पहली वैज्ञानिक गणना से भी जुड़ा है
विशेष पहचान वाले अभयारण्य
- दलमा — हाथी क्षेत्र; वार्षिक हाथी आवागमन स्थानीय रूप से प्रसिद्ध है
- महुआडांड़ — भारतीय भेड़िये के लिए देश के गिने-चुने संरक्षित क्षेत्रों में
- उधवा झील — राज्य का एकमात्र पक्षी अभयारण्य, साहिबगंज में
- पारसनाथ — राज्य की सर्वोच्च पहाड़ी और जैन तीर्थ के आसपास का अभयारण्य
- सारंडा — अभयारण्य नहीं, पर पश्चिमी सिंहभूम का प्रसिद्ध साल वन खंड
राज्य के वन्यजीव
- प्रमुख प्रजाति — हाथी, जो राजकीय पशु है
- बाघ की उपस्थिति सीमित है और मुख्यतः पलामू क्षेत्र में केंद्रित है
- अन्य स्तनधारी — तेंदुआ, गौर, सांभर, चीतल, भालू, भेड़िया
- पक्षी — राजकीय पक्षी कोयल, तथा उधवा में प्रवासी जलपक्षी
- दक्षिणी जिलों में मानव-हाथी संघर्ष बार-बार लौटने वाली समस्या है
श्रेणियों में अंतर
| श्रेणी | इसका अर्थ | झारखंड में उदाहरण |
|---|---|---|
| राष्ट्रीय उद्यान | सर्वोच्च संरक्षण; चराई या निजी अधिकार नहीं | बेतला |
| वन्यजीव अभयारण्य | संरक्षित, पर कुछ नियंत्रित अधिकार चल सकते हैं | दलमा, हजारीबाग |
| टाइगर रिजर्व | प्रोजेक्ट टाइगर के तहत कोर और बफर क्षेत्र | पलामू |
| आरक्षित और संरक्षित वन | वन कानून के तहत प्रबंधित वन भूमि | राज्य का अधिकांश वन |
याद रखने की ट्रिक — एक-एक-ग्यारह का जोड़ — 1 राष्ट्रीय उद्यान, 1 टाइगर रिजर्व, 11 अभयारण्य। और दो खास — महुआडांड़ = भेड़िया, उधवा = पक्षी।
यहां लोग गलती करते हैं — बेतला और पलामू एक जगह हैं पर एक चीज नहीं।
✗ बेतला और पलामू टाइगर रिजर्व एक ही दर्जा हैं | ✓ बेतला राष्ट्रीय उद्यान है; पलामू टाइगर रिजर्व है, एक ही वन क्षेत्र में
✗ दलमा बाघ के लिए प्रसिद्ध है | ✓ दलमा हाथियों के लिए प्रसिद्ध है
एग्जाम पॉइंटर — JSSC CGL, JKCE और JTET में अभयारण्य-जिला मिलान और संख्या सीधे आते हैं — 1, 1 और 11 रट लें। JPSC में मानव-हाथी संघर्ष, सारंडा का मुद्दा और वन्यजीव गलियारा मुख्य परीक्षा में आते हैं। यह टॉपिक छोटा है पर हर पेपर में एक प्रश्न देता है।
एक नजर में
- एक राष्ट्रीय उद्यान — बेतला, अधिसूचना 1986
- एक टाइगर रिजर्व — पलामू, भारत के प्रथम नौ में
- ग्यारह वन्यजीव अभयारण्य
- दलमा — हाथी, पूर्वी सिंहभूम
- महुआडांड़ — भारतीय भेड़िया, लातेहार
- उधवा झील — एकमात्र पक्षी अभयारण्य, साहिबगंज
- पारसनाथ — सर्वोच्च पहाड़ी का अभयारण्य, गिरिडीह
- हजारीबाग, कोडरमा, लावालौंग, तोपचांची, पालकोट — अन्य अभयारण्य
- राजकीय पशु हाथी, राजकीय पक्षी कोयल
- सारंडा प्रसिद्ध साल वन खंड है, अभयारण्य नहीं
