पंचायती राज और नगर निकाय
पंचायती राज और नगर निकाय
झारखंड में झारखंड पंचायत राज अधिनियम 2001 के तहत त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था है, पर राज्य में पहला पंचायत चुनाव 2010 में ही हो सका। शहरी क्षेत्र नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत से चलते हैं।
कानून — झारखंड पंचायत राज अधिनियम 2001 | प्रथम पंचायत चुनाव — 2010 | तीन स्तर
तीन स्तर
| स्तर | इकाई | प्रमुख |
|---|---|---|
| ग्राम पंचायत | गांव | मुखिया |
| पंचायत समिति | प्रखंड | प्रमुख |
| जिला परिषद | जिला | अध्यक्ष |
मुख्य विशेषताएं
- संवैधानिक आधार — 73वां संशोधन और राज्य का पंचायत राज अधिनियम 2001
- राज्य में पहला पंचायत चुनाव 2010 में हुआ, बहुत लंबे अंतराल के बादबार-बार पूछा जाता है
- ग्राम सभा गांव के सभी मतदाताओं की सभा है
- अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए सीट आरक्षित
- अनुसूचित क्षेत्रों में अध्यक्ष पद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित रहते हैं
- चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग कराता है
शहरी स्थानीय निकाय
- रांची, धनबाद और जमशेदपुर क्षेत्र जैसे बड़े नगरों के लिए नगर निगम
- मध्यम नगरों के लिए नगर परिषद
- ग्रामीण से शहरी में बदलते छोटे नगरों के लिए नगर पंचायत
- संवैधानिक आधार — 74वां संशोधन
- कार्यों में जलापूर्ति, स्वच्छता, सड़क, प्रकाश और भवन नियम आते हैं
- शहरी निकायों में भी महिलाओं और कमजोर वर्गों के लिए सीट आरक्षित हैं
यहां पंचायत अधिक क्यों मायने रखती है
- राज्य का अधिकांश भाग ग्रामीण है, इसलिए पंचायत सबसे निकट की राज्य संस्था है
- अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा को PESA के तहत अतिरिक्त शक्तियां मिलती हैं
- पंचायतें ग्रामीण रोजगार, आवास, जल और पेंशन योजनाएं लागू करती हैं
- महिला आरक्षण ने बड़ी संख्या में महिलाओं को स्थानीय पद तक पहुंचाया है
- पारंपरिक ग्राम संस्थाएं और निर्वाचित पंचायतें कभी-कभी अधिकार में टकराती भी हैं
पूछे जाने वाले बिंदु
- राज्य का पंचायत कानून — झारखंड पंचायत राज अधिनियम 2001
- प्रथम पंचायत चुनाव — 2010
- ग्राम पंचायत के प्रमुख — मुखिया
- पंचायत समिति के प्रमुख — प्रमुख
- संवैधानिक संशोधन — ग्रामीण के लिए 73वां, शहरी के लिए 74वां
पंचायतें वास्तव में क्या करती हैं
- गांव की विकास योजना और उसका बजट तैयार करना और स्वीकृत करना
- ग्रामीण रोजगार कार्य लागू करना और आवास तथा पेंशन के लाभार्थी चुनना
- पेयजल स्रोत, गांव की सड़क, नाली और प्रकाश व्यवस्था संभालना
- गांव स्तर पर आंगनबाड़ी, विद्यालय और स्वच्छता कार्यों को चलाना या सहयोग देना
- जन्म, मृत्यु और गांव की संपत्ति के अभिलेख रखना
- पंचायत कार्यालय से आवासीय तथा अन्य स्थानीय प्रमाणपत्र जारी करना
व्यवहार में आने वाली समस्याएं
- निधि, कार्य और कर्मियों का हस्तांतरण अब भी अधूरा है
- पंचायत कर्मी कम हैं, इसलिए बहुत काम वापस प्रखंड अधिकारियों पर आ जाता है
- निर्वाचित पंचायत और पारंपरिक प्रधान के बीच अधिकार का टकराव होता है
- पहले के दशकों में चुनाव न होने से संस्था की आदत ही कमजोर रह गई
याद रखने की ट्रिक — तीन स्तर, तीन नाम — मुखिया, प्रमुख, अध्यक्ष — गांव, प्रखंड, जिला। और दो संशोधन — 73 गांव, 74 शहर।
यहां लोग गलती करते हैं — कानून का वर्ष और चुनाव का वर्ष अलग हैं।
✗ झारखंड में पहला पंचायत चुनाव 2001 में हुआ | ✓ अधिनियम 2001 का है; पहला चुनाव 2010 में हुआ
✗ नगर पंचायत सबसे बड़ा शहरी निकाय है | ✓ सबसे बड़ा नगर निगम है; नगर पंचायत सबसे छोटा
एग्जाम पॉइंटर — JSSC CGL, JTGLCCE और JKCE में 2010 वाला वर्ष और तीन स्तरों के नाम सीधे आते हैं। JPSC में इसे PESA से जोड़कर पूछा जाता है — अनुसूचित क्षेत्र में ग्राम सभा की शक्ति। दो वर्ष — 2001 और 2010 — कभी न उलटें।
एक नजर में
- कानून — झारखंड पंचायत राज अधिनियम 2001
- प्रथम पंचायत चुनाव — 2010
- तीन स्तर — ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद
- प्रमुख — मुखिया, प्रमुख, अध्यक्ष
- ग्राम सभा गांव के सभी मतदाताओं की सभा
- ST, SC, पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए आरक्षण
- अनुसूचित क्षेत्रों में अध्यक्ष पद ST के लिए आरक्षित
- चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग कराता है
- शहरी निकाय — नगर निगम, नगर परिषद, नगर पंचायत
- संवैधानिक आधार — 73वां और 74वां संशोधन
