झारखंड पार्टी और JMM
Jharkhand Party and the JMM
1949-50 की झारखंड पार्टी ने राज्य की मांग को चुनावी राजनीति तक पहुंचाया और फिर 1963 में कांग्रेस में विलीन हो गई। इससे बना शून्य 1972 में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भरा, जिसने जनजातीय, सदान और खनन मजदूर आधार को जोड़ा।
झारखंड पार्टी — 1949-50, जयपाल सिंह मुंडा | JMM — 1972, शिबू सोरेन, बिनोद बिहारी महतो, ए. के. राय
झारखंड पार्टी
- 1949 में आदिवासी महासभा के पुनर्गठन से बनी, सार्वजनिक शुरुआत 1950 में
- अध्यक्ष — जयपाल सिंह मुंडा
- नाम से आदिवासी शब्द हटाया गया ताकि पहुंच जनजातीय मतदाताओं से आगे बढ़े
- 1950 के दशक में यह बिहार विधानसभा का मुख्य विपक्षी दल बनी
- इसने अपना पक्ष राज्य पुनर्गठन आयोग के समक्ष रखा, जिसने अलग राज्य अस्वीकार किया
- 1963 में पार्टी का कांग्रेस में विलय हुआबार-बार पूछा जाता है
विलय क्यों महत्वपूर्ण था
- विलय ने राज्य की मांग का एकमात्र राज्यव्यापी माध्यम समाप्त कर दिया
- कार्यकर्ताओं ने विश्वासघात महसूस किया और 1960 के दशक में कई अलग दल बने
- मांग बची रही पर लगभग एक दशक तक कोई एक संगठन नहीं रहा
- इसी कारण आंदोलन को नए सामाजिक आधार से फिर खड़ा करना पड़ा
झारखंड मुक्ति मोर्चा
- 1972 में शिबू सोरेन, बिनोद बिहारी महतो और ए. के. राय द्वारा गठन
- इसने तीन आधार जोड़े — जनजातीय गांव, सदान और कुड़मी कृषक, तथा खनन मजदूर
- प्रारंभिक अभियानों का निशाना महाजन, अवैध भूमि कब्जा और शराब थे
- शुरुआती वर्षों में बिनोद बिहारी महतो अध्यक्ष और शिबू सोरेन महासचिव बने
- बाद के नेताओं में निर्मल महतो और टेक लाल महतो आते हैं
- JMM राज्य आंदोलन का मुख्य राजनीतिक माध्यम बना
आंदोलन के संगठन एक नजर में
| वर्ष | संगठन | प्रमुख नाम |
|---|---|---|
| 1915 | छोटानागपुर उन्नति समाज | जोएल लकड़ा |
| 1938 | आदिवासी महासभा | थियोडोर सुरीन, फिर जयपाल सिंह |
| 1949 से 1950 | झारखंड पार्टी | जयपाल सिंह मुंडा |
| 1972 | झारखंड मुक्ति मोर्चा | शिबू सोरेन, बिनोद बिहारी महतो, ए. के. राय |
| 1986 | अखिल झारखंड छात्र संघ (AJSU) | आंदोलन का छात्र संगठन |
| 1987 | झारखंड समन्वय समिति | राम दयाल मुंडा |
1980 और 1990 का दशक
- AJSU ने बंद और आर्थिक नाकेबंदी के साथ छात्रों को आंदोलन में लाया
- 1987 की झारखंड समन्वय समिति ने दर्जनों संगठनों को एक किया
- 1995 में बीच का रास्ता निकालते हुए झारखंड क्षेत्र स्वायत्त परिषद बनी
- परिषद अपर्याप्त मानी गई और पूर्ण राज्य की मांग जारी रही
- संघर्ष का अंत 2000 के बिहार पुनर्गठन अधिनियम से हुआ
दलों के नाम जो प्रश्न में आते हैं
- झारखंड पार्टी — 1949-50, जयपाल सिंह मुंडा
- अखिल भारतीय झारखंड पार्टी — 1963 के विलय के बाद बने गुटों में से एक
- हूल झारखंड पार्टी — संथाल परगना केंद्रित अलग गुट
- झारखंड मुक्ति मोर्चा — 1972, आंदोलन का मुख्य वाहक
- AJSU — 1986 का छात्र संगठन, बाद में राजनीतिक दल भी
- इन नामों में सबसे अधिक JMM और झारखंड पार्टी पूछे जाते हैं
याद रखने की ट्रिक — चार पड़ाव याद रखें — 1950 झारखंड पार्टी, 1963 विलय, 1972 JMM, 1995 JAAC। और अंत — 2000 राज्य।
यहां लोग गलती करते हैं — झारखंड पार्टी और JMM के वर्ष उलट जाते हैं।
✗ JMM की स्थापना 1950 में जयपाल सिंह ने की | ✓ झारखंड पार्टी 1949-50, जयपाल सिंह; JMM 1972, शिबू सोरेन आदि
✗ 1963 में JMM कांग्रेस में मिला | ✓ 1963 में झारखंड पार्टी कांग्रेस में मिली
एग्जाम पॉइंटर — JPSC में इस टॉपिक से आंदोलन के चरण और JAAC की भूमिका पर प्रश्न आता है। JSSC CGL, JTGLCCE और JKCE में सीधा — JMM कब बना, संस्थापक कौन। चार वर्ष — 1950, 1963, 1972, 1995 — यही इस टॉपिक का पूरा पाठ्यक्रम है।
एक नजर में
- झारखंड पार्टी 1949-50 में, अध्यक्ष जयपाल सिंह मुंडा
- नाम से आदिवासी शब्द हटाकर पहुंच बढ़ाई
- 1950 के दशक में बिहार का मुख्य विपक्षी दल
- 1963 में कांग्रेस में विलय
- 1960 के दशक में कई अलग दल बने
- JMM का गठन 1972 में
- संस्थापक — शिबू सोरेन, बिनोद बिहारी महतो, ए. के. राय
- आधार — जनजातीय, सदान और कुड़मी, तथा खनन मजदूर
- 1986 में AJSU और 1987 में समन्वय समिति
- झारखंड क्षेत्र स्वायत्त परिषद 1995 में
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