भू-आकृतिक प्रक्षेत्र
Physiographic Regions
झारखंड का धरातल एक ही पठार है जो अलग-अलग स्तरों में बंटा है। पश्चिम का पाट क्षेत्र सबसे ऊंचा है, रांची और हजारीबाग पठार बीच का भाग बनाते हैं, दामोदर ट्रफ इनके बीच से कटता है, और राजमहल पहाड़ियां पूर्वी किनारा बंद करती हैं।
सर्वोच्च सतह — पाट क्षेत्र, लगभग 1,000 मीटर | रांची पठार — लगभग 700 मीटर | हजारीबाग पठार — लगभग 610 मीटर
मुख्य विभाजन
| प्रक्षेत्र | अनुमानित ऊंचाई | कहां |
|---|---|---|
| पाट क्षेत्र | लगभग 1,000 मीटर | पश्चिमी रांची पठार और लातेहार की ओर |
| रांची पठार | लगभग 700 मीटर | राज्य की सबसे बड़ी एकल सतह |
| हजारीबाग पठार | लगभग 610 मीटर | दामोदर घाटी के उत्तर में |
| दामोदर ट्रफ | निचली पट्टी | रांची और हजारीबाग पठार के बीच |
| संथाल परगना उच्चभूमि | लगभग 400 से 650 मीटर | देवघर, दुमका और गोड्डा की ओर |
| राजमहल पहाड़ी | लगभग 150 से 200 मीटर | साहिबगंज और पाकुड़, पूर्वी किनारा |
पाट क्षेत्र
- छोटानागपुर पठार की सर्वोच्च पठारी सतह
- औसत ऊंचाई लगभग 1,000 मीटर, कुछ बिंदु इससे ऊपर
- पश्चिम में स्थित, लातेहार के नेतरहाट और गुमला की ओर
- लैटेराइट से ढकी सपाट शीर्ष सतहें ही इस क्षेत्र को यह नाम देती हैं
- जलवायु और दृश्यों के कारण नेतरहाट को छोटानागपुर की रानी कहा जाता है
रांची और हजारीबाग पठार
- रांची पठार सबसे बड़ी सतह है और इसी पर राज्य की राजधानी है
- यह हल्की लहरदार है, जहां ऊपरी खेत टांड़ और निचले खेत दोन कहलाते हैं
- हजारीबाग पठार दामोदर घाटी के उत्तर में थोड़ी कम ऊंचाई पर है
- दोनों कठोर क्रिस्टलीय चट्टान की पुरानी, घिसी हुई सतहें हैं
- नदियां इन सतहों को जलप्रपात के रूप में छोड़ती हैं, इसीलिए झारखंड में इतने प्रपात हैं
दामोदर ट्रफ और पूर्वी किनारा
- दामोदर घाटी एक लंबी, निचली ट्रफ है जो दोनों मुख्य पठारों को अलग करती है
- इसी में राज्य की गोंडवाना कोयला पट्टी है, जिसमें झरिया और बोकारो आते हैं
- पूर्व की राजमहल पहाड़ियां बेसाल्टिक ट्रैप चट्टान से बनी हैं
- ये पठार से नीची हैं और साहिबगंज के पास गंगा तक जाकर समाप्त होती हैं
- संथाल परगना उच्चभूमि राजमहल पहाड़ी और मुख्य पठार के बीच पड़ती है
पूछे जाने वाले बिंदु
- सर्वोच्च पठारी सतह — पाट क्षेत्रबार-बार पूछा जाता है
- सबसे बड़ी सतह — रांची पठार
- कोयला वाली ट्रफ — दामोदर घाटी
- बेसाल्टिक ट्रैप पहाड़ी — राजमहल
- राज्य का सर्वोच्च बिंदु — पारसनाथ, जो हजारीबाग की ओर खड़ा है
नाम याद रखने लायक पहाड़ियां
- पारसनाथ — राज्य का सर्वोच्च बिंदु, गिरिडीह में, जैन तीर्थ स्थल
- नेतरहाट — पाट क्षेत्र का सर्वाधिक प्रसिद्ध स्थल, लातेहार में
- दलमा श्रेणी — जमशेदपुर के पास, हाथी अभयारण्य के लिए प्रसिद्ध
- राजमहल पहाड़ी — पूर्वी किनारा, साहिबगंज और पाकुड़ में
- त्रिकूट पहाड़ी — देवघर के पास, प्रसिद्ध स्थानीय स्थल
- यहां की श्रेणियां घिसी हुई अवशिष्ट पहाड़ियां हैं, नवीन वलित पर्वत नहीं
याद रखने की ट्रिक — ऊंचाई का क्रम — पाट > रांची > हजारीबाग > संथाल परगना > राजमहल। पश्चिम से पूर्व, ऊंचाई घटती जाती है। यही एक लाइन पूरे भू-आकृति विज्ञान का उत्तर है।
यहां लोग गलती करते हैं — सर्वोच्च बिंदु और सर्वोच्च क्षेत्र अलग हैं।
✗ झारखंड का सर्वोच्च बिंदु पाट क्षेत्र में है | ✓ पाट सर्वोच्च सतह है; सर्वोच्च बिंदु पारसनाथ 1,365 मीटर है
✗ राजमहल पहाड़ियां ग्रेनाइट की हैं | ✓ राजमहल पहाड़ियां बेसाल्टिक ट्रैप की हैं
एग्जाम पॉइंटर — JPSC में भू-आकृतिक विभाजन का मिलान और उनकी चट्टानों पर प्रश्न आता है, प्रायः खनिज से जोड़कर। JSSC CGL और JTGLCCE में सीधा — पाट क्षेत्र कहां है, दामोदर ट्रफ किसके बीच में। दो तालिकाएं याद कर लें तो यह टॉपिक समाप्त।
एक नजर में
- पाट क्षेत्र — सर्वोच्च सतह, लगभग 1,000 मीटर, नेतरहाट
- रांची पठार — सबसे बड़ी सतह, लगभग 700 मीटर
- हजारीबाग पठार — लगभग 610 मीटर, दामोदर के उत्तर
- दामोदर ट्रफ — बीच की निचली कोयला पट्टी
- संथाल परगना उच्चभूमि — लगभग 400 से 650 मीटर
- राजमहल पहाड़ी — लगभग 150 से 200 मीटर, बेसाल्टिक ट्रैप
- ऊपरी खेत — टांड़; निचले खेत — दोन
- ऊंचाई पश्चिम से पूर्व घटती है
- पठार का किनारा छोड़ते ही नदियां जलप्रपात बनाती हैं
- सर्वोच्च बिंदु — पारसनाथ, 1,365 मीटर
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