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गरीबी, पलायन और विकास सूचक

By ExamAtlas · 19/9/2026

गरीबी, पलायन और विकास सूचक

झारखंड की केंद्रीय आर्थिक पहेली यह है कि भारत के लगभग 40 प्रतिशत खनिज भंडार रखने वाले राज्य में आज भी ऊंची गरीबी, भारी पलायन और राष्ट्रीय औसत से नीचे के सामाजिक सूचकांक दर्ज होते हैं।

साक्षरता 2011 — 66.41 प्रतिशत | लिंगानुपात 2011 — 948 | जनसंख्या 2011 — लगभग 3.30 करोड़

विकास सूचक

सूचकझारखंड (जनगणना 2011)
जनसंख्यालगभग 3.30 करोड़
साक्षरता दर66.41 प्रतिशत
पुरुष साक्षरता76.84 प्रतिशत
महिला साक्षरता55.42 प्रतिशत
लिंगानुपात948 महिलाएं प्रति 1,000 पुरुष
अनुसूचित जनजाति हिस्सालगभग 26.2 प्रतिशत
सर्वाधिक साक्षरता जिलारांची, 76.06 प्रतिशत
न्यूनतम साक्षरता जिलापाकुड़, 48.82 प्रतिशत

राज्य में गरीबी

  • झारखंड भारत के अधिक बहुआयामी गरीबी वाले राज्यों में गिना जाता है
  • अभाव सर्वाधिक पोषण, स्कूली वर्षों और रसोई ईंधन में दिखता है
  • गरीबी औद्योगिक नगरों में नहीं, ग्रामीण और जनजातीय प्रखंडों में केंद्रित है
  • खनन जिले राजस्व में समृद्ध हो सकते हैं जबकि उनके गांव गरीब बने रहते हैं
  • संसाधन और कल्याण के इसी अंतर को संसाधन अभिशाप कहते हैं
  • हाल की राष्ट्रीय रिपोर्टें गरीबी घटती दिखाती हैं, पर राज्य राष्ट्रीय औसत से ऊपर है

पलायन

  • काम के लिए पलायन भारी है, विशेषकर संथाल परगना और पश्चिमी जिलों से
  • प्रमुख गंतव्य — पश्चिम बंगाल, दिल्ली, पंजाब, महाराष्ट्र और दक्षिणी राज्य
  • काम मुख्यतः निर्माण, ईंट भट्ठा, घरेलू काम और कारखाना मजदूरी का होता है
  • मौसमी पलायन खरीफ कटाई के बाद कृषि कैलेंडर के अनुसार चलता है
  • घरेलू काम के लिए युवतियों का पलायन तस्करी का जोखिम रखता है, जो राज्य की स्वीकृत चिंता है
  • पलायन भेजने वाले गांवों में विप्रेषण आय का महत्वपूर्ण स्रोत है

सूचक पीछे क्यों हैं

  • कम सिंचाई और एक फसली खेती से कृषि आय छोटी रहती है
  • खनन की वृद्धि पूंजी प्रधान है और प्रत्यक्ष रोजगार कम बनाती है
  • विस्थापन भूमि छीन लेता है पर टिकाऊ वैकल्पिक आजीविका नहीं देता
  • कठिन भूभाग और बिखरी बस्तियां सेवाएं पहुंचाने की लागत बढ़ाती हैं
  • अविभाजित बिहार में पठार की ऐतिहासिक उपेक्षा ने कमजोर आधार छोड़ा

क्या प्रयास हो रहे हैं

  • घरेलू नकदी बढ़ाने के लिए आय सहायता और पेंशन योजनाएं
  • प्रभावित क्षेत्रों में खनन राजस्व खर्च करने के लिए जिला खनिज फाउंडेशन
  • कौशल प्रशिक्षण तथा गंतव्य राज्यों में प्रवासी सहायता और नियंत्रण कक्ष
  • खेती मजबूत करने के लिए जलग्रहण कार्य, डोभा और लिफ्ट सिंचाई
  • सबसे कमजोर जिलों को लक्षित शिक्षा और पोषण कार्यक्रम

याद रखने की ट्रिक — दो आंकड़े, दो कहानियां — 40 प्रतिशत खनिज, पर साक्षरता 66.41 प्रतिशत। ये दो पंक्तियां साथ रखें तो पूरे अध्याय का निचोड़ बन जाता है।

यहां लोग गलती करते हैं — राज्य की आय और लोगों की आय अलग चीजें हैं।

खनिज समृद्ध राज्य का अर्थ है ऊंची प्रति व्यक्ति आय  |   राज्य का राजस्व ऊंचा हो सकता है और प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से नीचे

पलायन केवल गरीबी से होता है  |   पलायन गरीबी के साथ भूमि हानि और मौसमी रोजगार से भी होता है

एग्जाम पॉइंटर — JPSC मुख्य परीक्षा का सबसे आम प्रश्न यही है — 'संसाधन संपन्न पर विकास में पीछे क्यों'। उत्तर का ढांचा: खनन का स्वरूप, विस्थापन, कृषि की कमजोरी, और उपाय। JSSC CGL, JKCE और JTET में जनगणना के आंकड़े सीधे आते हैं — साक्षरता, लिंगानुपात, ST प्रतिशत।

एक नजर में

  • जनसंख्या 2011 — लगभग 3.30 करोड़
  • साक्षरता — कुल 66.41 प्रतिशत
  • पुरुष 76.84 और महिला 55.42 प्रतिशत
  • लिंगानुपात — 948
  • अनुसूचित जनजाति हिस्सा — लगभग 26.2 प्रतिशत
  • सर्वाधिक साक्षरता — रांची; न्यूनतम — पाकुड़
  • गरीबी ग्रामीण और जनजातीय प्रखंडों में केंद्रित
  • संथाल परगना और पश्चिम से भारी पलायन
  • संपदा के साथ गरीबी को संसाधन अभिशाप कहते हैं
  • उपाय — DMF, आय सहायता, कौशल, सिंचाई

अब झारखंड की अर्थव्यवस्था पर प्रश्न ExamAtlas मॉक टेस्ट में प्रैक्टिस करें — JPSC और JSSC दोनों पैटर्न में।

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