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आदिम जनजातीय समूह (PVTG)

By ExamAtlas · 19/9/2026

आदिम जनजातीय समूह (PVTG)

झारखंड की नौ जनजातियां आदिम जनजातीय समूह में गिनी जाती हैं। ये वे समुदाय हैं जिनकी जनसंख्या बहुत कम या घटती हुई है, तकनीक कृषि-पूर्व स्तर की है और साक्षरता बहुत कम है, इसलिए इनके लिए अलग से लक्षित कार्यक्रम चलाए जाते हैं।

झारखंड में PVTG — 9 | मानदंड — कम या घटती जनसंख्या, कृषि-पूर्व तकनीक, कम साक्षरता

PVTG क्या है

  • यह श्रेणी अनुसूचित जनजातियों के भीतर सर्वाधिक संवेदनशील समुदायों के लिए बनी है
  • पहले इन्हें आदिम जनजातीय समूह कहा जाता था, अब विशेष रूप से संवेदनशील जनजातीय समूह
  • मानदंड — स्थिर या घटती जनसंख्या तथा कृषि-पूर्व स्तर की तकनीक
  • अन्य मानदंड — अत्यंत कम साक्षरता और निर्वाह अर्थव्यवस्था
  • यह विचार ढेबर आयोग तथा चौथी और पांचवीं योजना अवधि से आता है
  • PVTG को अलग केंद्रीय और राज्य कार्यक्रम तथा समर्पित निधि मिलती है

झारखंड के नौ PVTG

PVTGमुख्य क्षेत्र
असुरगुमला, लातेहार और नेतरहाट की ओर
बिरहोरहजारीबाग, रामगढ़, बोकारो और आसपास
बिरजियालातेहार और गुमला
पहाड़ी खड़ियासिमडेगा, गुमला और सिंहभूम की ओर
कोरवापलामू, गढ़वा और लातेहार
माल पहाड़ियासंथाल परगना
परहैयापलामू और लातेहार
सौरिया पहाड़ियाराजमहल पहाड़ी, साहिबगंज और पाकुड़
सबरपूर्वी सिंहभूम और सरायकेला की ओर

विशिष्ट पहचान

  • असुर परंपरागत रूप से लौह गलाई से जुड़े हैंबार-बार पूछा जाता है
  • बिरहोर परंपरागत रूप से घुमंतू रस्सी निर्माता और वन संग्राहक हैं
  • सौरिया पहाड़िया और माल पहाड़िया राजमहल की पर्वतीय समुदाय हैं
  • पहाड़ी खड़िया वन संग्रह पर जीते हैं, स्थायी खड़िया से अलग
  • नौ में से हर समुदाय वनोपज और सिकुड़ती सामुदायिक भूमि पर बहुत निर्भर है
  • इनमें से कई राज्य के सबसे छोटे समुदायों में गिने जाते हैं

ये संवेदनशील क्यों हैं

  • वन तक पहुंच छिनने से इनकी पारंपरिक अर्थव्यवस्था का आधार ही चला गया
  • खनन और बांध से विस्थापन का सबसे भारी असर बहुत छोटे समूहों पर पड़ा
  • कम साक्षरता से अधिकार का दावा करना और अभिलेख बनवाना कठिन हो जाता है
  • स्वास्थ्य और पोषण के सूचकांक सभी जनजातीय समूहों में सबसे कमजोर हैं
  • कम संख्या का अर्थ है प्रतिस्पर्धी चुनावी व्यवस्था में कम राजनीतिक वजन

इनके लिए क्या किया जाता है

  • PVTG विकास के केंद्रीय कार्यक्रम, जिनमें आवास, जल और संपर्क शामिल हैं
  • PVTG परिवार सहायता और खाद्य सुरक्षा के राज्य कार्यक्रम
  • वन अधिकार अधिनियम के तहत आवास क्षेत्र अधिकार सहित वन अधिकारों की मान्यता
  • इनके बच्चों के लिए विशेष शिक्षा और आवासीय विद्यालय की व्यवस्था
  • पारंपरिक शिल्प और वनोपज संग्रह के लिए सहकारी समितियां और सहयोग

याद रखने की ट्रिक — नौ नाम का जोड़ — अ-बि-बि-प-को-मा-प-सौ-स: असुर, बिरहोर, बिरजिया, पहाड़ी खड़िया, कोरवा, माल पहाड़िया, परहैया, सौरिया पहाड़िया, सबर। दो 'बि' और दो 'पहाड़िया' हैं — वही जाल है।

यहां लोग गलती करते हैं — सभी जनजातियां PVTG नहीं हैं, और दोनों खड़िया अलग हैं।

झारखंड की सभी 32 जनजातियां PVTG हैं  |   32 में से केवल 9 ही PVTG श्रेणी में हैं

खड़िया पूरी तरह PVTG है  |   केवल पहाड़ी खड़िया PVTG श्रेणी में है, साधारण खड़िया नहीं

एग्जाम पॉइंटर — JSSC CGL, JTGLCCE, JKCE और JTET में PVTG की संख्या और नाम सीधे पूछे जाते हैं — नौ नाम रट लें। JPSC में इनकी समस्याओं और योजनाओं पर मुख्य परीक्षा का प्रश्न बनता है। यह टॉपिक छोटा है पर पक्का अंक देता है।

एक नजर में

  • झारखंड में 9 PVTG
  • पहले आदिम जनजातीय समूह कहलाते थे
  • मानदंड — घटती जनसंख्या, कृषि-पूर्व तकनीक, कम साक्षरता
  • नाम — असुर, बिरहोर, बिरजिया, पहाड़ी खड़िया, कोरवा
  • तथा — माल पहाड़िया, परहैया, सौरिया पहाड़िया, सबर
  • असुर — परंपरागत लौह गलाई से जुड़े
  • बिरहोर — घुमंतू रस्सी निर्माता और वन संग्राहक
  • सौरिया और माल पहाड़िया — राजमहल की पर्वतीय समुदाय
  • मुख्य संवेदनशीलता — वन पहुंच की हानि और विस्थापन
  • सहयोग — PVTG योजनाएं और FRA के तहत आवास अधिकार

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