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प्रमुख नदियां और अपवाह

Rivers and Drainage

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झारखंड की नदियां पठार से निकलकर तीन दिशाओं में जाती हैं — दामोदर से पूर्व में गंगा की ओर, स्वर्णरेखा से पूर्व-दक्षिण-पूर्व, और सोन तंत्र से उत्तर में गंगा की ओर। इन सबका अंतिम अपवाह बंगाल की खाड़ी में होता है।

दामोदर — लगभग 592 किमी | स्वर्णरेखा — लगभग 395 किमी | संपूर्ण अपवाह बंगाल की खाड़ी में

मुख्य नदियां

नदीउद्गमटिप्पणी
दामोदरखमरपत पहाड़ी, लातेहार की ओरलगभग 592 किमी; बंगाल का शोक कहलाती है
स्वर्णरेखानगड़ी के पास, रांची जिलालगभग 395 किमी; तीन राज्यों से होकर
उत्तरी कोयलरांची पठारसोन की सहायक; पलामू का अपवाह
दक्षिणी कोयलरांची पठारओडिशा की ओर ब्राह्मणी तंत्र में
बराकरहजारीबाग क्षेत्रदामोदर की सबसे बड़ी सहायक
मयूराक्षीदेवघर के पास त्रिकूट पहाड़ीपूर्व में पश्चिम बंगाल की ओर
शंखगुमला और छत्तीसगढ़ के किनारेदक्षिणी कोयल से मिलकर ब्राह्मणी बनाती है
अजय और बांसलोईसंथाल परगना की ओरउत्तर-पूर्वी पट्टी का अपवाह

दामोदर

  • उद्गम पठार की खमरपत पहाड़ी से, लातेहार की ओर
  • लंबाई लगभग 592 किमी; पूर्व में पश्चिम बंगाल की ओर प्रवाह
  • बांधों से पहले की बाढ़ों के कारण बंगाल का शोक कहलाती हैबार-बार पूछा जाता है
  • मुख्य सहायक — बराकर, कोनार, जमुनिया, बोकारो
  • इसकी घाटी में राज्य की कोयला पट्टी और मुख्य औद्योगिक नगर हैं
  • दामोदर घाटी निगम की स्थापना 7 जुलाई 1948 को हुई

स्वर्णरेखा

  • उद्गम रांची जिले के नगड़ी के पास; स्थान को रानी चुंआ कहते हैं
  • लंबाई लगभग 395 किमी; प्रवाह झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में
  • सहायक नदियों में खरकई, कांची, हरमू और रोरो आती हैं
  • इसी पर हुंडरू जलप्रपात बनता है, गिरावट लगभग 98 मीटर
  • नाम का अर्थ है सोने की रेखा, इसकी रेत में सोने के कणों के कारण
  • जमशेदपुर स्वर्णरेखा और खरकई के संगम पर बसा है

अपवाह प्रतिरूप

  • पठार जल विभाजक का काम करता है और नदियां कई दिशाओं में जाती हैं
  • उत्तरी नदियां जैसे उत्तरी कोयल सोन और फिर गंगा में मिलती हैं
  • पूर्वी नदियां जैसे दामोदर और मयूराक्षी सीधे गंगा की ओर जाती हैं
  • दक्षिणी नदियां जैसे दक्षिणी कोयल और शंख ओडिशा की ब्राह्मणी को पोसती हैं
  • अपवाह मुख्यतः वृक्षाकार (dendritic) है, जो ढाल और चट्टान संरचना के अनुसार है
  • नदियां अधिकतर वर्षा पोषित हैं, इसलिए मानसून के बाद प्रवाह तेजी से घटता है

पूछे जाने वाले बिंदु

  • राज्य के भीतर सबसे लंबी नदी — दामोदर
  • बंगाल का शोक कहलाने वाली नदी — दामोदर
  • रांची के पास से निकलने वाली नदी — स्वर्णरेखा
  • दामोदर की सबसे बड़ी सहायक — बराकर
  • मिलकर ब्राह्मणी बनाने वाली नदियां — दक्षिणी कोयल और शंख

याद रखने की ट्रिक — दो नदी, दो पहचान — दामोदर = कोयला और DVC, स्वर्णरेखा = हुंडरू और जमशेदपुर। और जोड़ — कोयल दो हैं: उत्तरी सोन में, दक्षिणी ब्राह्मणी में।

यहां लोग गलती करते हैं — दोनों कोयल नदियां अलग दिशा में जाती हैं।

✗ उत्तरी और दक्षिणी कोयल दोनों सोन में मिलती हैं  |  ✓ उत्तरी कोयल सोन में; दक्षिणी कोयल शंख से मिलकर ब्राह्मणी बनाती है

✗ दामोदर रांची के पास निकलती है  |  ✓ दामोदर खमरपत पहाड़ी से निकलती है; रांची के पास स्वर्णरेखा निकलती है

एग्जाम पॉइंटर — JPSC में नदी-उद्गम-संगम का मिलान और DVC पर प्रश्न आता है। JSSC CGL, JTGLCCE और JTET में सीधा — कौन-सी नदी कहां से निकलती है, DVC कब बना। दो नदियों — दामोदर और स्वर्णरेखा — पर सर्वाधिक प्रश्न आते हैं।

एक नजर में

  • दामोदर — लगभग 592 किमी, खमरपत पहाड़ी से
  • बंगाल का शोक कहलाती है
  • दामोदर की सहायक — बराकर, कोनार, बोकारो, जमुनिया
  • DVC की स्थापना 7 जुलाई 1948
  • स्वर्णरेखा — लगभग 395 किमी, रांची के नगड़ी के पास से
  • प्रवाह झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में
  • स्वर्णरेखा की सहायक — खरकई, कांची, हरमू
  • उत्तरी कोयल सोन में; दक्षिणी कोयल ब्राह्मणी में
  • मयूराक्षी देवघर के त्रिकूट पहाड़ी के पास से
  • नदियां मुख्यतः वर्षा पोषित, प्रवाह मौसमी

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