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सरदारी आंदोलन

The Sardari Movement

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सरदारी आंदोलन, जिसे सरदारी लड़ाई या मुल्की लड़ाई भी कहते हैं, उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में छोटानागपुर में चला। पहले के विद्रोहों से अलग यह मुख्यतः अर्जी, अदालत और प्रतिनिधिमंडल से लड़ा गया — और इसकी असफलता से उलगुलान जन्मा।

काल — लगभग 1858 से 1890 का दशक | क्षेत्र — छोटानागपुर, रांची पट्टी | पद्धति — कानूनी और संवैधानिक

आंदोलन क्या था

  • गांव के सरदारों के नेतृत्व में मुंडा और उरांव कृषकों का लंबा आंदोलन
  • इसे सरदारी लड़ाई और मुल्की लड़ाई भी कहते हैं, यानी अपनी भूमि की लड़ाईबार-बार पूछा जाता है
  • लगभग 1858 से 1890 के दशक तक चला, कई अन्य आंदोलनों के साथ-साथ
  • उद्देश्य था बाहरी भूस्वामियों द्वारा हड़पे गए खूंटकट्टी अधिकारों की वापसी
  • राहत के लिए हथियार नहीं, अर्जी, मुकदमे और अपील का रास्ता चुना गया

कानूनी रास्ता क्यों चुना गया

  • 1831 और 1855 के सशस्त्र विद्रोह भारी जनहानि के साथ कुचले जा चुके थे
  • मिशन स्कूलों से एक छोटा शिक्षित जनजातीय नेतृत्व बना जो अर्जी लिख सकता था
  • ब्रिटिश कानून स्वयं कुछ काश्तकारी अधिकार मानता था, इसलिए अदालत वास्तविक विकल्प लगी
  • सरदारों ने गांवों से चंदा जुटाकर वकील किए और प्रतिनिधिमंडल भेजे
  • प्रतिनिधिमंडल कलकत्ता तक गए ताकि ऊंचे अधिकारियों के सामने बात रखी जा सके

यह असफल क्यों हुआ

समस्याप्रभाव
मुकदमेबाजी का खर्चगांवों का धन बिना परिणाम के समाप्त हुआ
प्रमाण का भारपारंपरिक अधिकार कागज पर सिद्ध करना कठिन था
भूस्वामियों के प्रति सहानुभूतिस्थानीय अधिकारी दर्ज मालिक के पक्ष में रहे
धीमी प्रक्रियामुकदमे खिंचते रहे और भूमि हाथ बदलती रही
आंतरिक फूटईसाई और गैर-ईसाई वर्ग अलग-अलग होते गए

इससे क्या निकला

  • कानूनी रास्ते की असफलता ने कई लोगों को समझा दिया कि केवल जन-आंदोलन काम करेगा
  • युवा बिरसा मुंडा अपना आंदोलन शुरू करने से पहले इसी माहौल से जुड़े रहे
  • 1899-1900 का उलगुलान सरदारी आंदोलन का सीधा उत्तराधिकारी है
  • आंदोलन ने संगठित सामूहिक दावेदारी की आदत बनाई जो इसके बाद भी बची रही
  • इसके दस्तावेजों ने बाद के अधिकारियों को छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908 का आधार दिया

नाम और शब्द

  • सरदार — गांव का वह नेता जिसने काश्तकारों का पक्ष उठाया
  • मुल्की लड़ाई — मुल्क यानी अपनी भूमि के लिए लड़ाई
  • खूंटकट्टी — पहली बार जंगल साफ करने वाले वंश की सामूहिक भू-धृति
  • दिकू — बाहरी भूस्वामी या व्यापारी, जिनके विरुद्ध दावा था
  • एस. सी. राय — वह विद्वान जिनकी पुस्तक The Mundas में यह आंदोलन दर्ज है

तीन भू-धृतियां जिनका अंतर पक्का होना चाहिए

भू-धृतिधारक कौनमूल विचार
खूंटकट्टीपहली बार जंगल साफ करने वाला वंशसंस्थापक वंश का सामूहिक अधिकार
भुइंहरीप्रथम बसने वालों के वंशजविशेषाधिकार युक्त लगान-मुक्त या कम लगान वाली जोत
राजहस / माझीहसप्रधान के पद से जुड़ी भूमिसेवा-भूमि, निजी संपत्ति नहीं

याद रखने की ट्रिक — सरदारी आंदोलन की एक लाइन — कचहरी में लड़ी गई लड़ाई जो हार गई, और उसी हार से उलगुलान पैदा हुआ। इसलिए इस टॉपिक का उत्तर हमेशा बिरसा से जोड़कर लिखें।

यहां लोग गलती करते हैं — सरदारी आंदोलन और उलगुलान अलग हैं, भले दोनों मुंडा क्षेत्र के हों।

✗ सरदारी आंदोलन एक सशस्त्र विद्रोह था  |  ✓ सरदारी आंदोलन कानूनी और संवैधानिक था; उलगुलान सशस्त्र था

✗ सरदारी लड़ाई संथाल परगना में चली  |  ✓ सरदारी लड़ाई छोटानागपुर, मुख्यतः रांची पट्टी में चली

एग्जाम पॉइंटर — JPSC में यह टॉपिक उलगुलान की भूमिका के रूप में आता है — 'कानूनी तरीके क्यों विफल हुए' प्रकार का विश्लेषणात्मक प्रश्न। JSSC और JTGLCCE में सीधा — मुल्की लड़ाई किसे कहते हैं। यह टॉपिक अकेले कम पूछा जाता है, पर बिरसा वाले प्रश्न की पृष्ठभूमि इसी से बनती है।

एक नजर में

  • अन्य नाम — सरदारी लड़ाई और मुल्की लड़ाई
  • काल — लगभग 1858 से 1890 का दशक
  • क्षेत्र — छोटानागपुर, रांची पट्टी
  • समुदाय — मुंडा और उरांव
  • पद्धति — अर्जी, अदालत, प्रतिनिधिमंडल
  • मांग — खूंटकट्टी अधिकारों की वापसी
  • खर्च, प्रमाण भार और अधिकारियों के पक्षपात से विफल
  • इसी विफलता से सीधे उलगुलान निकला
  • एस. सी. राय की पुस्तक The Mundas में दर्ज
  • इसके साक्ष्यों ने CNT अधिनियम 1908 को आधार दिया

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