मृदा के प्रकार
मृदा के प्रकार
झारखंड के अधिकांश भाग में लाल मिट्टी है, जो पठार की क्रिस्टलीय चट्टान के अपक्षय से बनी है। ऊंची सतहों पर लैटेराइट है, नदियों और उत्तर-पूर्वी किनारे पर जलोढ़ मिट्टी है, और कहीं-कहीं काली तथा बलुई मिट्टी के छोटे क्षेत्र हैं।
प्रमुख मृदा — लाल मिट्टी | ऊंची सतह — लैटेराइट | नदी क्षेत्र — जलोढ़
मुख्य मृदा प्रकार
| मृदा | कहां मिलती है | स्वरूप |
|---|---|---|
| लाल मिट्टी | अधिकांश पठार | क्रिस्टलीय चट्टान से बनी; नाइट्रोजन कम, खाद जरूरी |
| लैटेराइट मिट्टी | पाट सतह और ऊंचे पठारी शीर्ष | लौह-समृद्ध, छिद्रयुक्त, पोषक तत्वों में कमजोर |
| जलोढ़ मिट्टी | नदी घाटी और गंगा के पास उत्तर-पूर्व | सर्वाधिक उपजाऊ; सघन खेती संभव |
| बलुई मिट्टी | हजारीबाग और सटे भागों में | हल्की, तेज निकास, नमी कम रोकती है |
| काली मिट्टी | छोटे क्षेत्र, राजमहल की ओर सहित | चिकनी, नमी रोकती है, बेसाल्ट पर बनी |
| अभ्रकयुक्त मिट्टी | कोडरमा और गिरिडीह अभ्रक पट्टी | अभ्रक कणों वाली; बलुई और हल्की |
लाल मिट्टी विस्तार से
- राज्य के सर्वाधिक क्षेत्रफल पर फैली हैबार-बार पूछा जाता है
- ग्रेनाइट, नाइस और शिस्ट के अपक्षय से बनी
- लाल रंग मूल चट्टान के आयरन ऑक्साइड से आता है
- सामान्यतः नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और ह्यूमस में कमजोर
- खाद, उर्वरक और निश्चित सिंचाई मिलने पर अच्छा प्रतिफल देती है
- पठार के टांड़ ऊपरी खेतों में इसका कमजोर रूप मिलता है
लैटेराइट और उसका उपयोग
- यह वहां बनती है जहां भारी मानसूनी वर्षा लंबे समय तक निक्षालन करती है
- लोहा और एल्युमीनियम में समृद्ध, पादप पोषक तत्वों में कमजोर
- इसका एल्युमीनियम-समृद्ध रूप लातेहार और गुमला में बॉक्साइट का स्रोत है
- ग्रामीण क्षेत्रों में लैटेराइट के खंड काटकर भवन निर्माण में प्रयुक्त होते हैं
- लैटेराइट पर खेती के लिए भारी खाद और सावधान जल प्रबंधन चाहिए
मृदा और कृषि
- कमजोर मिट्टी और कम सिंचाई से उपज कम और वर्षा पर निर्भर रहती है
- उपजाऊ दोन निचले खेतों में धान; टांड़ ऊपरी खेतों में मोटे अनाज और दलहन
- वन कटे ढलानों पर मृदा अपरदन गंभीर समस्या है
- औद्योगिक जिलों के आसपास खनन मलबा और फ्लाई ऐश मिट्टी को खराब करते हैं
- संरक्षण उपायों में समोच्च मेड़बंदी, चेक डैम और वृक्षारोपण आते हैं
पूछे जाने वाले बिंदु
- सर्वाधिक विस्तृत मृदा — लाल मिट्टी
- बॉक्साइट देने वाली मृदा — लैटेराइट मिट्टी
- सर्वाधिक उपजाऊ मृदा — जलोढ़, नदियों और उत्तर-पूर्व में
- अभ्रक पट्टी की मृदा — कोडरमा और गिरिडीह की अभ्रकयुक्त मिट्टी
- ऊपरी खेत — टांड़; निचला खेत — दोन
याद रखने की ट्रिक — मिट्टी का जोड़ — लाल सबसे ज्यादा, लैटेराइट सबसे ऊंची, जलोढ़ सबसे उपजाऊ। तीन लाइन में पूरा टॉपिक। और एक जोड़ — लैटेराइट = बॉक्साइट।
यहां लोग गलती करते हैं — लैटेराइट और लाल मिट्टी अलग हैं, भले दोनों लोहे से रंगीन हों।
✗ लैटेराइट लाल मिट्टी का ही दूसरा नाम है | ✓ लाल मिट्टी क्रिस्टलीय चट्टान से बनती है; लैटेराइट ऊंची सतहों पर भारी निक्षालन से
✗ झारखंड की सबसे उपजाऊ मिट्टी लाल है | ✓ सबसे उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी है, नदी घाटी और उत्तर-पूर्व में
एग्जाम पॉइंटर — JPSC में मृदा का प्रकार कृषि और खनिज दोनों से जोड़कर पूछा जाता है — जैसे लैटेराइट और बॉक्साइट का संबंध। JSSC CGL, JKCE और JTET में सीधा — सबसे अधिक कौन-सी मिट्टी, टांड़ और दोन क्या हैं। तालिका याद करें, यही पूरा स्कोरिंग भाग है।
एक नजर में
- लाल मिट्टी राज्य के अधिकांश भाग में
- ग्रेनाइट, नाइस और शिस्ट से निर्मित
- लाल रंग आयरन ऑक्साइड से; नाइट्रोजन और ह्यूमस कम
- ऊंची पाट सतहों पर लैटेराइट मिट्टी
- लैटेराइट बॉक्साइट का स्रोत
- नदियों और उत्तर-पूर्व में जलोढ़ मिट्टी — सर्वाधिक उपजाऊ
- हजारीबाग के कुछ भागों में बलुई मिट्टी
- छोटे क्षेत्रों में काली मिट्टी, राजमहल की ओर सहित
- कोडरमा और गिरिडीह अभ्रक पट्टी में अभ्रकयुक्त मिट्टी
- ऊपरी खेत टांड़, निचला खेत दोन
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