उलगुलान 1899-1900
उलगुलान 1899-1900
उलगुलान का अर्थ है महाविद्रोह। बिरसा मुंडा ने इसे लगभग क्रिसमस 1899 में मुंडा क्षेत्र में शुरू किया और यह कुछ ही सप्ताह में कुचल दिया गया, पर इसने औपनिवेशिक सत्ता को पहली बार छोटानागपुर का भूमि कानून बदलने पर विवश किया।
अर्थ — महाविद्रोह | काल — दिसंबर 1899 से 1900 की शुरुआत | क्षेत्र — खूंटी, तमाड़, बासिया, रांची
कारण
- खूंटकट्टी भूमि का बाहरी भूस्वामियों और ठेकेदारों के पास लगातार जाना
- बेठ बेगारी नामक जबरन श्रम, बिना मजदूरी के
- सरदारी आंदोलन की विफलता, जो अदालतों से कुछ न दिला सका
- 1890 के दशक के अकाल और महामारी, जिससे ग्रामीण संकट गहराया
- मिशनरी और जमींदार, दोनों की सत्ता मुंडा जीवन पर बाहरी नियंत्रण मानी गई
- बिरसाइत प्रचारकों का तैयार संगठन पहले से मौजूद था
विद्रोह का क्रम
| तिथि | घटना |
|---|---|
| क्रिसमस 1899 | विशाल सभा; उलगुलान की शुरुआत |
| दिसंबर 1899 के अंत में | थानों, गिरजाघरों और जमींदारी संपत्ति पर हमले |
| 5 जनवरी 1900 | एटकेडीह में दो सिपाही मारे गए |
| 7 जनवरी 1900 | खूंटी थाने पर हमला |
| 9 जनवरी 1900 | डोंबारी पहाड़ी, सैल रकब पर निर्णायक गोलीबारी |
| 3 फरवरी 1900 | चक्रधरपुर के पास जामकोपाई जंगल में बिरसा की गिरफ्तारी |
| 9 जून 1900 | रांची जेल में बिरसा की मृत्यु |
यह इतनी जल्दी क्यों कुचला गया
- तीर-कुल्हाड़ी के सामने आधुनिक बंदूकें हर मुठभेड़ का परिणाम तय कर देती थीं
- विद्रोह एक सघन पट्टी तक सीमित था, इसलिए सेना उसे घेर सकी
- इनाम की घोषणा से मुखबिर मिले और बिरसा का ठिकाना बताया गया
- डोंबारी पहाड़ी निर्णायक मोड़ रही, जहां भारी जनहानि हुई
- दमन के बाद सैकड़ों गिरफ्तार हुए और कई निर्वासित किए गए
इससे क्या हासिल हुआ
- सरकार ने अंततः माना कि जड़ समस्या भूमि हस्तांतरण है
- इससे छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908 बना, जिसने जनजातीय भूमि के हस्तांतरण पर रोक लगाईबार-बार पूछा जाता है
- बेठ बेगारी पर औपचारिक रूप से प्रहार हुआ
- खूंटकट्टी अधिकारों को केवल प्रथा नहीं, कानूनी मान्यता मिली
- क्षेत्र के किसी पूर्व विद्रोह ने भूमि कानून में ही परिवर्तन नहीं कराया था
पक्के करने लायक शब्द
- उलगुलान — मुंडारी में महाविद्रोह
- डोंबारी बुरू — वह पहाड़ी जहां निर्णायक गोलीबारी हुई
- सैल रकब — डोंबारी के साथ आने वाला स्थल नाम
- बेठ बेगारी — बिना मजदूरी का जबरन श्रम
- जामकोपाई — चक्रधरपुर के पास वह जंगल जहां बिरसा पकड़े गए
उलगुलान और हूल की तुलना
| बिंदु | संथाल हूल | उलगुलान |
|---|---|---|
| वर्ष | 1855 से 1856 | 1899 से 1900 |
| समुदाय | संथाल | मुंडा |
| नेता | सिदो और कान्हू मुर्मू | बिरसा मुंडा |
| क्षेत्र | संथाल परगना | खूंटी और रांची पट्टी |
| धार्मिक आधार | संथाल परंपरा और सफा होड़ सुधार | बिरसाइत पंथ |
| मुख्य परिणाम | संथाल परगना जिला, 1855 | छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908 |
याद रखने की ट्रिक — उलगुलान की चार तिथियां — क्रिसमस 1899 शुरुआत, 9 जनवरी 1900 डोंबारी, 3 फरवरी 1900 गिरफ्तारी, 9 जून 1900 मृत्यु। और परिणाम एक — CNT अधिनियम 1908।
यहां लोग गलती करते हैं — उलगुलान का वर्ष और CNT अधिनियम का वर्ष अलग हैं।
✗ उलगुलान और CNT अधिनियम दोनों 1900 के हैं | ✓ उलगुलान 1899-1900; CNT अधिनियम 1908
✗ उलगुलान संथाल परगना में हुआ | ✓ उलगुलान मुंडा क्षेत्र में हुआ — खूंटी, तमाड़, बासिया, रांची
एग्जाम पॉइंटर — JPSC में उलगुलान के कारण और CNT अधिनियम से उसका संबंध मुख्य परीक्षा में पूरा प्रश्न बन जाता है। JSSC CGL, JTGLCCE, JKCE और JTET में उलगुलान का अर्थ, वर्ष और डोंबारी का नाम सीधा आता है। झारखंड GK में इस टॉपिक से प्रश्न न आए, ऐसा लगभग होता ही नहीं।
एक नजर में
- उलगुलान का अर्थ — महाविद्रोह
- शुरुआत लगभग क्रिसमस 1899
- क्षेत्र — खूंटी, तमाड़, बासिया, रांची
- कारण — भूमि हानि, बेठ बेगारी, कानूनी रास्ते की विफलता
- 5 जनवरी 1900 — एटकेडीह में सिपाही मारे गए
- 7 जनवरी 1900 — खूंटी थाने पर हमला
- 9 जनवरी 1900 — डोंबारी पहाड़ी / सैल रकब पर गोलीबारी
- 3 फरवरी 1900 — जामकोपाई जंगल में गिरफ्तारी
- 9 जून 1900 — रांची जेल में मृत्यु
- परिणाम — छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908
