जल प्रपात और बांध
Waterfalls and Dams
जहां भी नदी एक पठारी स्तर से दूसरे पर उतरती है वहां जलप्रपात बनता है, इसीलिए झारखंड में इतने प्रपात हैं। इन्हीं नदियों पर बाढ़ नियंत्रण, बिजली और सिंचाई के लिए बांध बने, जिसकी शुरुआत 1948 में दामोदर घाटी निगम से हुई।
सर्वोच्च जलप्रपात — लोध, लगभग 143 मीटर, लातेहार | DVC की स्थापना — 7 जुलाई 1948
प्रमुख जलप्रपात
| जलप्रपात | नदी | जिला | टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| लोध | बूढ़ा | लातेहार | लगभग 143 मीटर; राज्य का सर्वोच्च |
| हुंडरू | स्वर्णरेखा | रांची | लगभग 98 मीटर; सर्वाधिक प्रसिद्ध |
| दशम | कांची | रांची | रांची-जमशेदपुर मार्ग का लोकप्रिय प्रपात |
| जोन्हा (गौतमधारा) | रारू | रांची | लटकती घाटी का प्रपात, साथ में मंदिर |
| पंचघाघ | बनई | खूंटी | पानी कई धाराओं में बंट जाता है |
| हिरनी | स्थानीय धारा | पश्चिमी सिंहभूम | चाईबासा की ओर वन प्रपात |
| सदनी | शंख | गुमला | शंख नदी पर चौड़ा प्रपात |
| उसरी | उसरी | गिरिडीह | तीन धाराओं में गिरता है |
राज्य में इतने प्रपात क्यों हैं
- नदियां अलग-अलग अपरदन स्तरों के बीच पठारी सीढ़ियां पार करती हैं
- कठोर क्रिस्टलीय चट्टान अपरदन रोकती है, इसलिए गिरावट तीखी बनी रहती है
- भ्रंशित पठारी किनारे नदी की ढाल-रेखा में अचानक टूट पैदा करते हैं
- जोन्हा लटकती घाटी का उत्कृष्ट प्रपात है, जहां सहायक नदी गहरी मुख्य घाटी में गिरती है
- लगभग सभी प्रपात मानसून में और उसके तुरंत बाद सबसे प्रबल रहते हैं
प्रमुख बांध और जलाशय
| बांध | नदी | टिप्पणी |
|---|---|---|
| तिलैया | बराकर | DVC का पहला बांध, 1953 में पूर्ण |
| कोनार | कोनार | DVC बांध, 1955 में पूर्ण |
| मैथन | बराकर | DVC बांध, 1957 में पूर्ण |
| पंचेत | दामोदर | DVC बांध, 1958 में पूर्ण |
| तेनुघाट | दामोदर | बिहार सरकार द्वारा निर्मित, 1978 |
| चांडिल | स्वर्णरेखा | स्वर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना का भाग |
| गेतलसूद | स्वर्णरेखा | रांची की जलापूर्ति |
| मैसनजोर | मयूराक्षी | कनाडा डैम भी कहलाता है, दुमका जिले में |
दामोदर घाटी निगम
- 7 जुलाई 1948 को स्थापित, स्वतंत्र भारत की पहली बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाबार-बार पूछा जाता है
- अमेरिका के टेनेसी वैली अथॉरिटी के मॉडल पर आधारित
- उद्देश्य — बाढ़ नियंत्रण, बिजली उत्पादन, सिंचाई और नौवहन
- यह अंतरराज्यीय निकाय है जो झारखंड और पश्चिम बंगाल में फैला है
- इसके बांधों ने उन बाढ़ों को थामा जिनसे दामोदर को पुराना नाम मिला था
- इसी ने दामोदर पट्टी के औद्योगिक विकास को आधार दिया
पूछे जाने वाले बिंदु
- सर्वोच्च जलप्रपात — लातेहार में बूढ़ा नदी पर लोध
- सर्वाधिक प्रसिद्ध जलप्रपात — स्वर्णरेखा पर हुंडरू
- कांची नदी का प्रपात — दशम
- कनाडा डैम भी कहलाने वाला बांध — मैसनजोर
- DVC का पहला बांध — बराकर पर तिलैया
बांधों ने क्या हल किया और क्या नहीं
- जलाशय बनने के बाद निचली दामोदर घाटी में बाढ़ की क्षति तेजी से घटी
- घाटी से मिली ताप और जल विद्युत ने इस्पात तथा कोयला उद्योग को चलाया
- सिंचाई का लाभ झारखंड के जलग्रहण क्षेत्र से अधिक पश्चिम बंगाल में मिला
- जलाशयों से गांव विस्थापित हुए और पुनर्वास आज भी जीवित शिकायत है
- गाद जमने से कई पुराने जलाशयों की भंडारण क्षमता घटी है
- औद्योगिक और खनन बहिःस्राव ने दामोदर को क्षेत्र की सर्वाधिक प्रदूषित नदियों में ला दिया है
याद रखने की ट्रिक — चार DVC बांध का जोड़ — ति-को-मै-पं: तिलैया, कोनार, मैथन, पंचेत। और दो प्रपात — लोध सबसे ऊंचा, हुंडरू सबसे प्रसिद्ध।
यहां लोग गलती करते हैं — सबसे ऊंचा और सबसे प्रसिद्ध प्रपात अलग हैं।
✗ हुंडरू झारखंड का सर्वोच्च जलप्रपात है | ✓ लोध सर्वोच्च है, लगभग 143 मीटर; हुंडरू लगभग 98 मीटर
✗ तेनुघाट DVC का बांध है | ✓ तेनुघाट बिहार सरकार ने बनाया था, DVC के बाहर
एग्जाम पॉइंटर — JSSC CGL, JKCE और JTET में प्रपात-नदी-जिला का मिलान सीधा आता है — निश्चित अंक। JPSC में DVC का उद्देश्य, उसका अंतरराज्यीय स्वरूप और स्वर्णरेखा परियोजना मुख्य परीक्षा में आते हैं। दो तालिकाएं रट लें, यह टॉपिक समाप्त।
एक नजर में
- लोध — सर्वोच्च प्रपात, लगभग 143 मीटर, बूढ़ा नदी, लातेहार
- हुंडरू — लगभग 98 मीटर, स्वर्णरेखा, रांची
- दशम — कांची नदी | जोन्हा — रारू नदी
- पंचघाघ — खूंटी | सदनी — शंख, गुमला
- DVC की स्थापना 7 जुलाई 1948
- टेनेसी वैली अथॉरिटी के मॉडल पर
- DVC बांध — तिलैया, कोनार, मैथन, पंचेत
- तेनुघाट बिहार सरकार द्वारा 1978 में
- स्वर्णरेखा पर चांडिल और गेतलसूद
- मयूराक्षी पर मैसनजोर, कनाडा डैम भी कहलाता है
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