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कृषि विपणन और कीमतें

Agricultural Marketing and Prices

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NCERT कक्षा 12 • Indian Economic Development • अध्याय "Rural Development"

कृषि विपणन और कीमतें

कृषि विपणन में वह सब आता है जो फसल कटने और उपभोक्ता के खरीदने के बीच होता है: एकत्रीकरण, श्रेणीकरण, भंडारण, परिवहन, प्रसंस्करण और बिक्री। इनमें से किसी भी अवस्था की कमजोरी किसान को मिलने वाला भाग घटा देती है, इसीलिए विपणन सुधार उत्पादन बढ़ाने जितना ही महत्वपूर्ण है।

विपणन की समस्याएं

  • किसान प्रायः कटाई के तुरंत बाद बेचते हैं क्योंकि उन्हें नकदी चाहिए, और तब कीमतें सबसे कम रहती हैं; इसे विवश बिक्री कहते हैं।
  • बिचौलिए अंतिम कीमत का बड़ा भाग ले जाते हैं, इसलिए किसान का हिस्सा छोटा रह जाता है।
  • गलत तौल और कीमत की जानकारी का अभाव किसान को और हानि में डालते हैं।
  • भंडारण क्षमता अपर्याप्त है, इसलिए बड़ी मात्रा नमी, चूहों और कीटों से नष्ट हो जाती है।
  • छोटे किसान दूर के बाजार तक नहीं पहुंच पाते, इसलिए स्थानीय व्यापारी जो कीमत दे उसी पर बेच देते हैं।
  • खराब सड़कें और अपर्याप्त परिवहन लागत बढ़ाते हैं और किसान तक पहुंचने वाला भाग घटाते हैं।

विपणन सुधार के उपाय

  • विनियमित बाजार या मंडियां इसलिए बनाई गईं कि बिक्री पर्यवेक्षण में खुली नीलामी से हो।
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य बुवाई से पहले घोषित होता है ताकि किसान जान ले कि एक न्यूनतम कीमत सुनिश्चित है।
  • सरकारी एजेंसियों द्वारा उसी कीमत पर खरीद कीमत गिरने पर बाजार को सहारा देती है।
  • बफर स्टॉक और सार्वजनिक वितरण प्रणाली खरीद को उपभोक्ता आपूर्ति से जोड़ते हैं।
  • सहकारी विपणन किसानों को उपज जोड़कर बेहतर कीमत के लिए सामूहिक मोलभाव करने देता है।
  • गोदाम, श्रेणीकरण, बाजार सूचना और इलेक्ट्रॉनिक व्यापार मंच बिचौलिए का लाभ घटाते हैं।
  • सरकारी एजेंसियां अनाज खरीदकर केंद्रीय पूल का प्रबंध करती हैं।
  • संविदा कृषि किसान को पहले से तय कीमत पर क्रेता से जोड़ती है, जिससे कीमत जोखिम घटता है।
  • किसान उत्पादक संगठन छोटे उत्पादकों को एक बड़े विक्रेता की तरह मिलकर काम करने देते हैं।
  • उत्पादन क्षेत्रों के पास शीत भंडारण और खाद्य प्रसंस्करण फल-सब्जी की बर्बादी तेजी से घटाते हैं।
समस्याउपाय
विवश बिक्रीन्यूनतम समर्थन मूल्य और खरीद
बिचौलियों का बड़ा हिस्सासहकारी विपणन, विनियमित मंडियां
कीमत जानकारी का अभावबाजार सूचना और इलेक्ट्रॉनिक मंच
भंडारण हानिगोदाम और शीत शृंखला

विवश बिक्री — कटाई के तुरंत बाद कम कीमत पर उपज बेच देना, क्योंकि किसान को तत्काल नकदी चाहिए।

Exam me kaise aata hai

  • कटाई के तुरंत बाद कम कीमत पर बेचना कहलाता है — विवश बिक्री
  • बुवाई से पहले घोषित न्यूनतम कीमत — न्यूनतम समर्थन मूल्य
  • विनियमित कृषि बाजार सामान्यतः कहलाते हैं — मंडियां
  • उपज जोड़कर सामूहिक मोलभाव कहलाता है — सहकारी विपणन

UPSC/State PSC ke liye

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य वहीं काम करता है जहां खरीद तंत्र वास्तव में चलता हो, इसलिए उसका लाभ कुछ ही फसलों और क्षेत्रों में केंद्रित रहता है।
  • भंडारण और साख कीमत जितने ही महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि जो किसान रखकर प्रतीक्षा कर सके वह विवश बिक्री में जाता ही नहीं।

Yahan confuse hote hain

✗ न्यूनतम समर्थन मूल्य कटाई के बाद घोषित होता है | यह बुवाई से पहले घोषित होता है  |  ✓

✗ मंडियां निजी बाजार हैं | विनियमित मंडियां पर्यवेक्षण में चलती हैं  |  ✓

✗ विपणन का अर्थ केवल बेचना है | इसमें श्रेणीकरण, भंडारण, परिवहन और प्रसंस्करण भी आते हैं  |  ✓

Ek nazar me

  • विपणन में कटाई से उपभोक्ता तक सब कुछ आता है।
  • विवश बिक्री, बिचौलिए, कमजोर भंडारण और सूचना का अभाव किसान को हानि देते हैं।
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य और खरीद न्यूनतम कीमत देते हैं।
  • सहकारी विपणन, गोदाम और सूचना मंच किसान का हिस्सा बढ़ाते हैं।

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