संशोधन और मूल ढांचा
NCERT Class 11 - Indian Constitution at Work, Chapter 9
संशोधन और मूल ढांचा
अनुच्छेद 368 संविधान संशोधन का प्रावधान करता है। निर्माताओं ने बीच का रास्ता चुना - न इतना कठोर कि बदलाव असंभव हो, न इतना लचीला कि साधारण बहुमत से संविधान फिर से लिखा जा सके।
तीन पद्धतियां
| पद्धति | आवश्यक बहुमत | प्रावधानों के उदाहरण |
|---|---|---|
| साधारण बहुमत | उपस्थित और मतदान करने वालों का बहुमत, अनुच्छेद 368 से बाहर | नए राज्यों का निर्माण, नाम-सीमा में बदलाव, नागरिकता, वेतन |
| विशेष बहुमत | प्रत्येक सदन की कुल सदस्यता का बहुमत और उपस्थित सदस्यों का दो-तिहाई | मूल अधिकार, नीति निदेशक तत्व, संविधान का अधिकांश भाग |
| विशेष बहुमत और राज्यों का अनुसमर्थन | विशेष बहुमत के साथ आधे राज्यों की विधायिकाओं की स्वीकृति | राष्ट्रपति का निर्वाचन, शक्तियों का बंटवारा, राज्यों का प्रतिनिधित्व, स्वयं अनुच्छेद 368 |
- संशोधन विधेयक किसी भी सदन में मंत्री या निजी सदस्य द्वारा लाया जा सकता है, और इसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति आवश्यक नहीं।
- इसे प्रत्येक सदन में अलग-अलग पारित होना पड़ता है - गतिरोध सुलझाने के लिए संयुक्त बैठक का प्रावधान नहीं है।
- राष्ट्रपति को संशोधन विधेयक पर अनुमति देनी ही होती है; 24वें संशोधन के बाद रोकने का विवेकाधिकार नहीं है।
- राज्य विधायिकाएं संशोधन आरंभ नहीं कर सकतीं, सिवाय राज्य में विधान परिषद बनाने या समाप्त करने के मामले में।
महत्वपूर्ण संशोधन
- प्रथम संशोधन, 1951 - भूमि सुधार कानूनों को न्यायिक पुनरावलोकन से बचाने के लिए नौवीं अनुसूची जोड़ी।
- 7वां संशोधन, 1956 - राज्य पुनर्गठन अधिनियम के बाद राज्यों का भाषाई आधार पर पुनर्गठन।
- 42वां संशोधन, 1976 - इसे लघु संविधान कहा जाता है; प्रस्तावना में समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखंडता जोड़े, मूल कर्तव्य जोड़े, और न्यायिक पुनरावलोकन सीमित किया।
- 44वां संशोधन, 1978 - 42वें के कई बदलाव पलटे, संपत्ति के अधिकार को अनुच्छेद 300क के अंतर्गत विधिक अधिकार बनाया, और राष्ट्रीय आपात के आधार में आंतरिक अशांति के स्थान पर सशस्त्र विद्रोह रखा।
- 52वां संशोधन, 1985 - दल-बदल विरोधी कानून, जिसने दसवीं अनुसूची जोड़ी।
- 61वां संशोधन, 1989 - मताधिकार की आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष की।
- 73वां और 74वां संशोधन, 1992 - पंचायतों और नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा।
- 86वां संशोधन, 2002 - अनुच्छेद 21क के अंतर्गत प्रारंभिक शिक्षा को मूल अधिकार बनाया।
- 101वां संशोधन, 2016 - वस्तु एवं सेवा कर लागू किया।
मूल ढांचा सिद्धांत
- शंकरी प्रसाद, 1951 और सज्जन सिंह, 1965 में उच्चतम न्यायालय ने माना कि संसद मूल अधिकारों सहित किसी भी भाग में संशोधन कर सकती है।
- गोलकनाथ, 1967 में न्यायालय ने अपना मत बदला और कहा कि मूल अधिकारों में संशोधन नहीं हो सकता।
- केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य, 1973 में न्यायालय ने प्रश्न तय किया - संसद संविधान के किसी भी भाग में संशोधन कर सकती है, पर उसके मूल ढांचे को नष्ट या क्षतिग्रस्त नहीं कर सकती।
- न्यायालय ने कभी पूरी सूची नहीं दी। मूल माने गए तत्वों में संविधान की सर्वोच्चता, कानून का शासन, शक्तियों का पृथक्करण, न्यायिक पुनरावलोकन, संघवाद, पंथनिरपेक्षता, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव, तथा संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य का स्वरूप शामिल हैं।
- यह सिद्धांत इंदिरा नेहरू गांधी बनाम राजनारायण, 1975 और मिनर्वा मिल्स, 1980 में लागू हुआ, जिसने 42वें संशोधन के कुछ भाग रद्द किए।
परीक्षा में कैसे आता है
तथ्यात्मक प्रश्न पूछते हैं कि किस संशोधन ने क्या किया और मूल ढांचा सिद्धांत किस मामले में आया। सुमेलित कीजिए में संशोधन संख्या और विषय जुड़ते हैं। कथन-आधारित प्रश्न जांचते हैं कि संशोधन विधेयक पर संयुक्त बैठक संभव है या नहीं - नहीं है।
UPSC / State PSC के लिए
वर्णनात्मक उत्तर में मूल ढांचा सिद्धांत को एक वास्तविक संवैधानिक समस्या के समाधान के रूप में रखिए - लोकतांत्रिक ढंग से चुनी संसद को संविधान बदलने की अनुमति कैसे दी जाए और साथ ही उसे उस ढांचे को नष्ट करने से कैसे रोका जाए जो उसे लोकतांत्रिक बनाता है। यह आलोचना भी लिखें कि इस सिद्धांत का कोई पाठीय आधार नहीं है और यह अंतिम शब्द न्यायपालिका को देता है।
यहां कन्फ्यूज होते हैं
✗ मूल ढांचा सिद्धांत गोलकनाथ मामले से आया | ✓ गोलकनाथ ने मूल अधिकारों में संशोधन रोका; सिद्धांत केशवानंद भारती 1973 में आया
✗ हर संशोधन को राज्यों का अनुसमर्थन चाहिए | ✓ केवल संघीय प्रावधानों को छूने वाले संशोधनों को चाहिए
✗ राष्ट्रपति संशोधन विधेयक पर अनुमति रोक सकते हैं | ✓ राष्ट्रपति को संशोधन विधेयक पर अनुमति देनी ही होती है
एक नजर में
- अनुच्छेद 368 तीन पद्धतियां देता है - साधारण बहुमत, विशेष बहुमत, और विशेष बहुमत के साथ राज्यों का अनुसमर्थन।
- संशोधन विधेयक किसी भी सदन में; संयुक्त बैठक नहीं और राष्ट्रपति को अनुमति देनी होती है।
- 42वां संशोधन 1976 लघु संविधान; 44वां संशोधन 1978 ने उसका बहुत कुछ पलटा।
- 52वें ने दल-बदल, 61वें ने मताधिकार आयु 18, 73वें-74वें ने स्थानीय शासन दिया।
- केशवानंद भारती 1973 ने तय किया कि संसद मूल ढांचा नष्ट नहीं कर सकती।
- मिनर्वा मिल्स 1980 ने इस सिद्धांत से 42वें संशोधन के कुछ भाग रद्द किए।
अब इसी अध्याय के प्रश्न ExamAtlas मॉक टेस्ट में अभ्यास कीजिए।
