परमाणु, अणु और रासायनिक सूत्र
NCERT कक्षा 9 • Science • अध्याय "Atoms and Molecules"
परमाणु, अणु और रासायनिक सूत्र
अणु किसी तत्व या यौगिक का वह सबसे छोटा कण है जो स्वतंत्र रूप से रह सके और उस पदार्थ के सभी गुण दिखाए। परमाणु किस नियम से अणुओं में जुड़ते हैं, यह उन दो नियमों से तय हुआ जो परमाणु दिखने से बहुत पहले स्थापित हो गए थे।
नियम और मूल राशियां
- द्रव्यमान संरक्षण का नियम कहता है कि रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान न बनता है न नष्ट होता है।
- स्थिर अनुपात का नियम कहता है कि कोई यौगिक सदैव उन्हीं तत्वों को द्रव्यमान के उसी अनुपात में रखता है।
- परमाणु द्रव्यमान परमाणु द्रव्यमान इकाई में व्यक्त होता है, जो कार्बन बारह परमाणु के द्रव्यमान का बारहवां भाग है।
- आणविक द्रव्यमान अणु के सभी परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों का योग है।
- परमाणुकता अणु में परमाणुओं की संख्या है: हीलियम एकपरमाणुक, ऑक्सीजन द्विपरमाणुक, ओजोन त्रिपरमाणुक और फॉस्फोरस चतुष्परमाणुक है।
- आयन आवेशित कण है; धनात्मक आयन धनायन और ऋणात्मक आयन ऋणायन कहलाता है।
- बहुपरमाणुक आयन आवेश वाला परमाणु समूह है, जैसे सल्फेट, नाइट्रेट, कार्बोनेट और अमोनियम।
मोल और रासायनिक सूत्र
- मोल पदार्थ की वह मात्रा है जिसमें उतने कण हों जितने कार्बन बारह के बारह ग्राम में परमाणु होते हैं।
- वह संख्या आवोगाद्रो संख्या कहलाती है और लगभग 6.022 × 10<sup>23</sup> है।
- एक मोल का ग्राम में द्रव्यमान मोलर द्रव्यमान है, जो संख्यात्मक रूप से परमाणु या आणविक द्रव्यमान के बराबर होता है।
- सूत्र लिखने में हर आयन की संयोजकता को आड़ा करके दूसरे का अनुलंब बना दिया जाता है।
- सूत्र में धातु या धनात्मक आयन पहले लिखा जाता है, उसके बाद अधातु या ऋणात्मक आयन।
- एक से अधिक बार लिया गया बहुपरमाणुक आयन कोष्ठक में रखा जाता है, जैसे कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड और एल्युमिनियम सल्फेट में।
- सूत्र में कुल धन आवेश और कुल ऋण आवेश बराबर होने चाहिए, तभी यौगिक उदासीन रहता है।
| राशि | अर्थ |
|---|---|
| परमाणु द्रव्यमान इकाई | कार्बन बारह परमाणु के द्रव्यमान का बारहवां भाग |
| आणविक द्रव्यमान | अणु के परमाणु द्रव्यमानों का योग |
| मोल | आवोगाद्रो संख्या जितने कण वाली मात्रा |
| मोलर द्रव्यमान | एक मोल का ग्राम में द्रव्यमान |
मोल — पदार्थ की वह मात्रा जिसमें उतने कण हों जितने कार्बन बारह के बारह ग्राम में परमाणु होते हैं।
Exam me kaise aata hai
- आवोगाद्रो संख्या लगभग कितनी है — 6.022 × 10<sup>23</sup>
- द्रव्यमान न बनता न नष्ट होता है, यह कौन सा नियम है — द्रव्यमान संरक्षण का नियम
- धनावेशित आयन कहलाता है — धनायन
- अणु में परमाणुओं की संख्या कहलाती है — परमाणुकता
UPSC/State PSC ke liye
- मोल इसलिए है कि रसायनज्ञों को ऐसे कण गिनने होते हैं जो सीधे गिनने के लिए बहुत छोटे हैं, इसलिए संख्या के स्थान पर द्रव्यमान का उपयोग होता है।
- स्थिर अनुपात का नियम ही यौगिक को मिश्रण से अलग करता है, क्योंकि मिश्रण किसी भी अनुपात में बनाया जा सकता है।
Yahan confuse hote hain
✗ परमाणु और अणु एक ही हैं | अणु परमाणुओं से बना है और स्वतंत्र रह सकता है | ✓
✗ धनायन ऋणावेशित होता है | धनायन धनात्मक; ऋणायन ऋणात्मक होता है | ✓
✗ मोलर और आणविक द्रव्यमान की इकाई एक है | आणविक द्रव्यमान परमाणु द्रव्यमान इकाई में, मोलर द्रव्यमान ग्राम प्रति मोल में | ✓
Ek nazar me
- द्रव्यमान संरक्षण और स्थिर अनुपात रासायनिक संयोजन को नियंत्रित करते हैं।
- परमाणु और आणविक द्रव्यमान परमाणु द्रव्यमान इकाई में मापे जाते हैं।
- एक मोल में आवोगाद्रो संख्या जितने कण होते हैं।
- सूत्र संयोजकता आड़ी करके, धनात्मक आयन पहले रखकर लिखे जाते हैं।
