बाबर, हुमायूं और शेरशाह सूरी
NCERT Class 7 - Our Pasts II • NCERT Class 12 - Themes in Indian History Part II, Chapter 9
बाबर, हुमायूं और शेरशाह सूरी
मुगल साम्राज्य की स्थापना बाबर ने 1526 में की। उसके पुत्र हुमायूं ने इसे शेरशाह सूरी से गंवा दिया, जिसने पांच वर्षों में ऐसा प्रशासन खड़ा किया कि आगे चलकर अकबर ने उसका अधिकांश भाग अपनाया।
बाबर और उसके चार युद्ध
- बाबर मध्य एशिया के फरगना से आया था और पिता की ओर से तैमूर तथा माता की ओर से चंगेज खां का वंशज था।
- पानीपत का प्रथम युद्ध, 1526 - इब्राहिम लोदी की पराजय। बाबर ने उस्ताद अली कुली के नेतृत्व में तोपखाने और शत्रु के पार्श्व घेरने की तुलुगमा पद्धति का प्रयोग किया।
- खानवा का युद्ध, 1527 - मेवाड़ के राणा सांगा की पराजय, जिसने दिल्ली पाने की राजपूत आशा समाप्त कर दी।
- चंदेरी का युद्ध, 1528 - मेदिनी राय की पराजय।
- घाघरा का युद्ध, 1529 - अफगानों और बंगाल के शासक की पराजय, जो बिहार में लड़ा गया।
- उसने अपनी आत्मकथा तुजुक-ए-बाबरी यानी बाबरनामा तुर्की में लिखी; इसमें भारत की जलवायु, वनस्पति और लोगों पर स्पष्ट टिप्पणियां हैं।
हुमायूं
- उसने 1530-1540 और फिर 1555-1556 तक शासन किया, बीच में गद्दी खो दी।
- शेरशाह ने उसे 1539 में चौसा और 1540 में कन्नौज, जिसे बिलग्राम भी कहते हैं, में हराया; दोनों युद्ध गंगा के पास हुए।
- उसने वर्षों निर्वासन में बिताए, फारस के सफवी शासक के यहां शरण ली, और 1555 में दिल्ली वापस ली।
- 1556 में दिल्ली के शेर मंडल में अपने पुस्तकालय की सीढ़ियों से गिरकर उसकी मृत्यु हुई।
- दिल्ली में हुमायूं का मकबरा, जो उसकी विधवा हमीदा बानो बेगम के निर्देशन में बना, भारत का पहला महान उद्यान मकबरा है और ताजमहल का आदर्श है।
शेरशाह सूरी
- उसका मूल नाम फरीद था; बाघ मारने पर उसे शेर खां उपाधि मिली, और उसने 1540 से 1545 तक शेरशाह के रूप में शासन किया।
- भू-राजस्व भूमि की पैमाइश से तय होता था, जिसमें फसल दरों की सूची राय कहलाती थी; राज्य का हिस्सा उपज का लगभग एक-तिहाई था, जो नकद या वस्तु में देय था।
- हर किसान को पट्टा मिलता था, जिसमें उसकी जोत और देय राशि लिखी होती, और वह कबूलियत पर हस्ताक्षर करता था - भारतीय राजस्व इतिहास में किसान अधिकारों का पहला स्पष्ट कथन।
- उसने चांदी का रुपिया और तांबे का दाम चलाया, और रुपिया ही आधुनिक रुपये का पूर्वज है।
- उसने वह बड़ा राजमार्ग फिर बनवाया जिसे बाद में ग्रैंड ट्रंक रोड कहा गया, जो बंगाल के सोनारगांव से सिंधु तक जाता था, और उस पर वृक्ष, कुएं तथा सराय बनवाईं।
- सराय डाक चौकी का भी काम करती थीं, जिससे कार्यशील डाक और समाचार व्यवस्था बनी।
- 1545 में कालिंजर की घेराबंदी में उसकी मृत्यु हुई। बिहार के सासाराम में झील के बीच बना उसका मकबरा भारत के श्रेष्ठतम मकबरों में है।
| सुधार | शेरशाह ने क्या किया |
|---|---|
| राजस्व | पैमाइश, राय सूची, लगभग एक-तिहाई हिस्सा |
| किसान अधिकार | हर कृषक को पट्टा और कबूलियत |
| मुद्रा | चांदी का रुपिया और तांबे का दाम |
| सड़कें | सराय और वृक्षों सहित ग्रैंड ट्रंक रोड |
| संचार | सरायों पर डाक चौकियां |
परीक्षा में कैसे आता है
तथ्यात्मक प्रश्न बाबर के चार युद्धों के वर्ष, हुमायूं कहां हारा, और पट्टा तथा कबूलियत क्या थे, पूछते हैं। सुमेलित कीजिए में युद्ध और प्रतिद्वंद्वी जुड़ते हैं। व्यावहारिक प्रश्न पूछते हैं कि शेरशाह के सुधार उसके वंश से अधिक क्यों टिके।
UPSC / State PSC के लिए
शेरशाह का महत्व यह है कि उसने विजय नहीं, संस्थाएं बनाईं - पैमाइश, किसान के लिखित कागज, मानक मुद्रा और संचार। अकबर की दहसाला व्यवस्था उसी पद्धति का परिष्कार है, इसलिए दोनों को प्रतिद्वंद्वी नहीं, एक ही निरंतर विकास मानिए।
यहां कन्फ्यूज होते हैं
✗ बाबर ने पानीपत में राणा सांगा को हराया | ✓ पानीपत इब्राहिम लोदी के विरुद्ध था; राणा सांगा खानवा में हारा
✗ शेरशाह ने सोने का रुपिया चलाया | ✓ रुपिया चांदी का था; दाम तांबे का
✗ हुमायूं का मकबरा आगरा में अकबर के वास्तुकारों ने बनाया | ✓ यह दिल्ली में है और हमीदा बानो बेगम के निर्देशन में बना
एक नजर में
- बाबर ने 1526 में पानीपत का प्रथम युद्ध जीतकर साम्राज्य की नींव रखी।
- खानवा 1527 में राणा सांगा, चंदेरी 1528, और घाघरा 1529 बिहार में।
- बाबर ने बाबरनामा तुर्की में लिखा।
- हुमायूं चौसा 1539 और कन्नौज 1540 में हारा, 1555 में लौटा और 1556 में मरा।
- शेरशाह का शासन 1540-1545 - पैमाइश राजस्व, पट्टा और कबूलियत, रुपिया और दाम।
- सराय तथा डाक चौकियों सहित ग्रैंड ट्रंक रोड; मकबरा बिहार के सासाराम में।
