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बौद्ध धर्म: बुद्ध और उनकी शिक्षाएं

Buddhism: The Buddha and His Teachings

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NCERT Class 12 - Themes in Indian History Part I, Chapter 4

बौद्ध धर्म: बुद्ध और उनकी शिक्षाएं

गौतम बुद्ध ने सिखाया कि दुख सार्वभौमिक है, उसका कारण है, और भोग तथा कठोर तपस्या के बीच के व्यावहारिक मध्यम मार्ग से उसका अंत हो सकता है। उन्होंने कर्म और पुनर्जन्म को माना पर सृष्टिकर्ता और स्थायी आत्मा दोनों को अस्वीकार किया।

पांच प्रमुख घटनाएं

  • जन्म लगभग 563 ईसा पूर्व नेपाल के लुंबिनी में, शाक्य कुल में; पिता शुद्धोदन, माता मायादेवी, जिनका शीघ्र ही निधन हो गया। पालन प्रजापति गौतमी ने किया।
  • पत्नी यशोधरा, पुत्र राहुल। वृद्ध, रोगी, शव और संन्यासी के दर्शन ने उन्हें महल से विमुख किया।
  • महाभिनिष्क्रमण - 29 वर्ष की आयु में गृहत्याग।
  • संबोधि - 35 वर्ष की आयु में बिहार के बोधगया में, निरंजना नदी के तट पर पीपल वृक्ष के नीचे; तभी से वे बुद्ध यानी जागृत कहलाए।
  • धर्मचक्र प्रवर्तन - वाराणसी के पास सारनाथ के मृगदाव में प्रथम उपदेश।
  • महापरिनिर्वाण - 80 वर्ष की आयु में उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में निधन।

बौद्ध कला के प्रतीक

  • प्रारंभिक बौद्ध कला बुद्ध को मानव रूप में नहीं दिखाती; उसके स्थान पर प्रतीक प्रयोग होते हैं।
  • कमल और बैल जन्म के, घोड़ा गृहत्याग का, बोधि वृक्ष संबोधि का प्रतीक है।
  • चक्र (धर्मचक्र) प्रथम उपदेश का और स्तूप महापरिनिर्वाण का प्रतीक है।
  • चरण चिह्न (बुद्धपद) और रिक्त सिंहासन भी उनकी उपस्थिति दर्शाते हैं।

चार आर्य सत्य

सत्यअर्थ
दुखसंसार दुख से भरा है
दुख समुदयदुख का कारण है, और वह तृष्णा है
दुख निरोधदुख का अंत संभव है
दुख निरोध गामिनी प्रतिपदाअंत का मार्ग है, अष्टांगिक मार्ग

अष्टांगिक मार्ग

  • सम्यक दृष्टि और सम्यक संकल्प - सत्यों को समझना और उन पर चलने का संकल्प।
  • सम्यक वाक्, सम्यक कर्मांत और सम्यक आजीव - नैतिक समूह, जिसमें सत्य, अहिंसा और ईमानदार जीविका आती है।
  • सम्यक व्यायाम, सम्यक स्मृति और सम्यक समाधि - मानसिक समूह, जो ध्यान तक ले जाता है।
  • यह मार्ग विलास और कठोर देहदंड दोनों से बचता है; यही मध्यम मार्ग है।

प्रमुख सिद्धांत

  • अनित्यवाद (anicca) - सब कुछ क्षणिक है और निरंतर बदलता है।
  • अनात्मवाद (anatta) - कोई स्थायी अपरिवर्तनीय आत्मा नहीं है। जैन धर्म और उपनिषदों से यही सबसे तीखा अंतर है।
  • प्रतीत्यसमुत्पाद - आश्रित उत्पत्ति, वह श्रृंखला जिसमें हर परिणाम किसी कारण से उपजता है।
  • निर्वाण तृष्णा का बुझ जाना और पुनर्जन्म चक्र का अंत है।
  • बौद्ध धर्म का त्रिरत्न है बुद्ध, धम्म और संघ।
  • बुद्ध ईश्वर के अस्तित्व और सृष्टि की उत्पत्ति पर मौन रहे, ऐसे प्रश्नों को अनुपयोगी मानते हुए।

परीक्षा में कैसे आता है

तथ्यात्मक प्रश्न जन्म, संबोधि, प्रथम उपदेश और निर्वाण के स्थान पूछते हैं - ये चार स्थान बार-बार आते हैं। सुमेलित कीजिए में घटना और स्थान या प्रतीक जोड़े जाते हैं। कथन-आधारित प्रश्न अनात्मवाद बनाम जैन आत्मा और सृष्टिकर्ता की मान्यता जांचते हैं।

UPSC / State PSC के लिए

प्रतीत्यसमुत्पाद को पूरे तंत्र का तार्किक आधार मानिए - यदि सब कुछ कारणों से उपजता है तो कुछ भी स्थायी नहीं, इसलिए अपरिवर्तनीय आत्मा भी नहीं। सामाजिक बिंदु भी देखें - संघ ने सभी वर्णों को और आनंद के आग्रह पर स्त्रियों को भिक्षुणी के रूप में स्वीकार किया।

यहां कन्फ्यूज होते हैं

✗ बुद्ध का जन्म बोधगया में हुआ  |  ✓ जन्म लुंबिनी में हुआ; ज्ञान बोधगया में मिला

✗ प्रथम उपदेश कुशीनगर में दिया गया  |  ✓ प्रथम उपदेश सारनाथ में; निधन कुशीनगर में

✗ बौद्ध धर्म स्थायी आत्मा मानता है  |  ✓ बौद्ध धर्म अनात्मवाद मानता है

एक नजर में

  • जन्म लगभग 563 ईसा पूर्व लुंबिनी में, शाक्य कुल; 29 में गृहत्याग, 35 में संबोधि।
  • चार प्रमुख स्थान - लुंबिनी, बोधगया, सारनाथ, कुशीनगर।
  • चार आर्य सत्य - दुख, उसका कारण, उसका अंत, और अंत का मार्ग।
  • अष्टांगिक मार्ग तीन समूहों में - ज्ञान, नैतिक आचरण, मानसिक अनुशासन।
  • अनित्य, अनात्म और प्रतीत्यसमुत्पाद मूल सिद्धांत; लक्ष्य निर्वाण।
  • त्रिरत्न - बुद्ध, धम्म, संघ; मध्यम मार्ग दोनों अतियों से बचता है।

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