बौद्ध संगीतियां, संप्रदाय और प्रसार
NCERT Class 12 - Themes in Indian History Part I, Chapter 4
बौद्ध संगीतियां, संप्रदाय और प्रसार
बुद्ध के निर्वाण के बाद संघ ने शिक्षा और नियम तय करने के लिए कई संगीतियां कीं। इन्हीं बैठकों से त्रिपिटक बना और वे विभाजन भी हुए जिनसे हीनयान, महायान और आगे चलकर वज्रयान बने।
चार संगीतियां
| संगीति | स्थान | संरक्षक | अध्यक्ष |
|---|---|---|---|
| प्रथम | राजगृह (राजगीर) | अजातशत्रु | महाकस्सप |
| द्वितीय | वैशाली | कालाशोक | सब्बकामी |
| तृतीय | पाटलिपुत्र | अशोक | मोग्गलिपुत्त तिस्स |
| चतुर्थ | कश्मीर, कुंडलवन | कनिष्क | वसुमित्र |
- प्रथम संगीति में उपालि ने संघ के नियम और आनंद ने उपदेश सुनाए, जिससे विनय और सुत्त पिटक बने।
- द्वितीय संगीति में संघ रूढ़िवादी स्थविरवादी और उदार महासांघिक में बंट गया।
- तृतीय संगीति में अभिधम्म पिटक जोड़ा गया और धर्म प्रचारक बाहर भेजे गए, जिनमें श्रीलंका गए महेंद्र और संघमित्रा प्रमुख हैं।
- चतुर्थ संगीति में हीनयान और महायान का विभाजन हुआ और अश्वघोष उपाध्यक्ष थे। अब कई ग्रंथों में पालि की जगह संस्कृत आ गई।
त्रिपिटक
- विनय पिटक - भिक्षु और भिक्षुणियों के अनुशासन नियम।
- सुत्त पिटक - बुद्ध के उपदेश; उनके पूर्व जन्मों की जातक कथाएं इसी से जुड़ी हैं।
- अभिधम्म पिटक - दर्शन और मानसिक अवस्थाओं का विश्लेषण।
- त्रिपिटक पालि में है, इसीलिए पालि थेरवाद बौद्ध धर्म की भाषा बनी।
प्रमुख संप्रदाय
| बिंदु | हीनयान / थेरवाद | महायान |
|---|---|---|
| भाषा | पालि | संस्कृत |
| बुद्ध की धारणा | महान आचार्य | दिव्य सत्ता, पूजनीय |
| आदर्श | अर्हत, स्वयं की मुक्ति | बोधिसत्व, सबकी मुक्ति |
| मूर्ति | प्रारंभ में वर्जित | मूर्ति पूजा केंद्रीय |
| प्रसार | श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड | चीन, कोरिया, जापान, मध्य एशिया |
- तीसरी धारा वज्रयान ने तांत्रिक कर्मकांड, मंत्र और तारा जैसी देवियां जोड़ीं। यह पूर्वी भारत में पाल शासकों के अधीन फला-फूला और तिब्बत तथा भूटान तक फैला।
- प्रसिद्ध बोधिसत्व - अवलोकितेश्वर, मंजुश्री, वज्रपाणि और मैत्रेय, यानी भावी बुद्ध।
कला और मठीय शिक्षा
- गांधार शैली - धूसर शिस्ट पत्थर, प्रबल यूनानी-रोमन प्रभाव, लहरदार केश और यथार्थ वस्त्र।
- मथुरा शैली - लाल बलुआ पत्थर, देशी शैली, सुगठित आकृतियां।
- अमरावती शैली - सफेद संगमरमर, कथात्मक पट्टियां, आंध्र क्षेत्र में।
- बिहार और बंगाल में बड़े मठीय विश्वविद्यालय बने - नालंदा, विक्रमशिला और ओदंतपुरी - जहां पूरे एशिया से छात्र आते थे।
भारत में पतन
- गुप्तों के बाद राजकीय संरक्षण का अभाव, और बड़े मठों में आई संपन्नता तथा शिथिलता।
- ब्राह्मण धर्म का पुनरुत्थान और भक्ति आंदोलन की भावनात्मक अपील लोगों को वापस खींच लाई।
- संस्कृत अपनाने से महायान ग्रंथ आम लोगों से दूर हो गए।
- तुर्क आक्रमणों में मठीय विश्वविद्यालयों के विनाश ने संस्थागत आधार समाप्त कर दिया, हालांकि भारत के बाहर बौद्ध धर्म फलता रहा।
परीक्षा में कैसे आता है
संगीतियों की तालिका सबसे अधिक पूछी जाने वाली चीज है - संगीति, स्थान, संरक्षक और अध्यक्ष का सुमेलित कीजिए। तथ्यात्मक प्रश्न पूछते हैं कि तीसरा पिटक कौन सा जुड़ा और किस शैली में धूसर शिस्ट प्रयोग हुआ। कथन-आधारित प्रश्न हीनयान-महायान अंतर जांचते हैं।
UPSC / State PSC के लिए
वर्णनात्मक उत्तर में पतन को सैद्धांतिक नहीं, संस्थागत बताइए - बौद्ध धर्म दान से चलने वाले मठों पर निर्भर था, इसलिए संरक्षण और विश्वविद्यालय जाते ही ढांचा भी गया। यह भी लिखें कि भारतीय कला, तर्कशास्त्र और अहिंसा की धारणा में इसका प्रभाव बना रहा।
यहां कन्फ्यूज होते हैं
✗ तृतीय संगीति वैशाली में हुई | ✓ तृतीय पाटलिपुत्र में; द्वितीय वैशाली में हुई
✗ चतुर्थ संगीति की अध्यक्षता कनिष्क ने की | ✓ कनिष्क संरक्षक थे; अध्यक्ष वसुमित्र थे
✗ गांधार शैली में लाल बलुआ पत्थर लगा | ✓ गांधार में धूसर शिस्ट; मथुरा में लाल बलुआ पत्थर
एक नजर में
- चार संगीतियां - राजगृह, वैशाली, पाटलिपुत्र, कश्मीर।
- क्रम से संरक्षक - अजातशत्रु, कालाशोक, अशोक, कनिष्क।
- पालि में त्रिपिटक - विनय, सुत्त, अभिधम्म; जातक सुत्त से जुड़े।
- द्वितीय संगीति में संघ बंटा; चतुर्थ में हीनयान-महायान विभाजन।
- हीनयान में पालि और अर्हत आदर्श; महायान में संस्कृत और बोधिसत्व आदर्श।
- कला शैलियां - गांधार धूसर शिस्ट, मथुरा लाल बलुआ, अमरावती सफेद संगमरमर।
अब इसी अध्याय के प्रश्न ExamAtlas मॉक टेस्ट में अभ्यास कीजिए।
