नकदी फसलें और बागानी फसलें
NCERT कक्षा 8 • Resources and Development • अध्याय "Agriculture" | NCERT कक्षा 10 • Contemporary India II • अध्याय "Agriculture"
नकदी फसलें और बागानी फसलें
नकदी फसलें मुख्यतः बिक्री और उद्योग के लिए उगाई जाती हैं, किसान के अपने भोजन के लिए नहीं। ये कृषि को विनिर्माण, निर्यात और ग्रामीण रोजगार से जोड़ती हैं। बागानी फसलें नकदी फसलों का विशेष रूप हैं, जो बड़े एस्टेट पर, प्रायः पहाड़ी ढालों पर, अधिक पूंजी और मजदूरी श्रम से उगाई जाती हैं।
प्रमुख नकदी फसलें
- गन्ना उष्ण और उपोष्ण फसल है जिसे गर्म आर्द्र मौसम और 75 से 100 cm वर्षा चाहिए; उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, कर्नाटक और तमिलनाडु प्रमुख उत्पादक हैं।
- यह चीनी, गुड़, खांडसारी और शीरे का कच्चा माल है।
- कपास को अधिक ताप, तेज धूप और दक्कन की काली मृदा चाहिए; महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना और पंजाब अग्रणी राज्य हैं।
- जूट, जिसे सुनहरा रेशा कहते हैं, पश्चिम बंगाल, बिहार, असम और ओडिशा की उपजाऊ बाढ़ मैदानी मृदा पर उगता है।
- जूट बोरे, चटाई, रस्सी और हस्तशिल्प में काम आता है, और इसे सस्ते कृत्रिम रेशे से प्रतिस्पर्धा मिलती है।
- तिलहन में मूंगफली, सरसों, सोयाबीन, तिल, सूरजमुखी और अरंडी आते हैं; मूंगफली खरीफ और सरसों रबी फसल है।
- रबड़ को 200 cm से अधिक वर्षा वाली गर्म आर्द्र जलवायु चाहिए, जो केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और अंडमान में उगता है।
बागानी फसलें
- चाय को गर्म आर्द्र जलवायु, गहरी उपजाऊ सुनिकासित दोमट मृदा और ढाल वाली भूमि चाहिए ताकि जड़ों में पानी न ठहरे।
- असम और पश्चिम बंगाल की दार्जिलिंग पहाड़ियां, तथा नीलगिरि क्षेत्र मुख्य चाय क्षेत्र हैं।
- कॉफी सबसे पहले बाबा बुदन पहाड़ियों में उगाई गई और अब कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में केंद्रित है।
- मसाले जैसे काली मिर्च, इलायची, हल्दी, मिर्च और अदरक दक्षिण और पूर्वोत्तर की महत्वपूर्ण निर्यात फसलें हैं।
- बागवानी यानी फल और सब्जियां तेजी से बढ़ी हैं और अब अनाज से अधिक प्रति हेक्टेयर आय देती हैं।
- आम, केला, नींबू वर्गीय फल, सेब और अंगूर मुख्य फल फसलें हैं, जो अपनी-अपनी जलवायु पट्टी से बंधी हैं।
- बागानी फसलें निर्यात मांग पर बहुत निर्भर हैं, इसलिए विश्व बाजार के दाम उत्पादक को सीधे प्रभावित करते हैं।
| फसल | जलवायु आवश्यकता | प्रमुख क्षेत्र |
|---|---|---|
| गन्ना | गर्म और आर्द्र | उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र |
| कपास | गर्म, तेज धूप, काली मृदा | महाराष्ट्र, गुजरात |
| जूट | उपजाऊ बाढ़ मैदान, अधिक आर्द्रता | पश्चिम बंगाल, बिहार |
| चाय | गर्म आर्द्र, ढाल वाली भूमि | असम, दार्जिलिंग |
| कॉफी | गर्म, पहाड़ी छाया | कर्नाटक, केरल |
Exam me kaise aata hai
- जूट को क्या कहते हैं — सुनहरा रेशा
- कपास किस मृदा में सर्वोत्तम उगती है — काली मृदा
- भारत में कॉफी सबसे पहले कहां उगी — बाबा बुदन पहाड़ियां
- चाय को कैसी भूमि चाहिए — ढाल वाली, सुनिकासित
UPSC/State PSC ke liye
- चाय ढालों पर इसलिए उगाई जाती है कि ठहरा पानी जड़ें सड़ा देता है, इसीलिए कुल वर्षा से अधिक महत्व जल निकासी का है।
- जूट का ह्रास प्राकृतिक रेशे के सस्ते विकल्प से हारने का उदाहरण है, इसीलिए पैकेजिंग क्षेत्र में जूट की अनिवार्यता इस उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है।
Yahan confuse hote hain
✗ कपास जलोढ़ मृदा में सर्वोत्तम उगती है | कपास काली मृदा में सर्वोत्तम उगती है | ✓
✗ जूट रबी फसल है | जूट खरीफ ऋतु की रेशा फसल है | ✓
✗ मूंगफली रबी फसल है | मूंगफली खरीफ फसल है; सरसों रबी है | ✓
Ek nazar me
- नकदी फसलें बिक्री और उद्योग के लिए उगाई जाती हैं।
- गन्ना, कपास, जूट और तिलहन मुख्य नकदी फसलें हैं।
- जूट सुनहरा रेशा है; कपास को काली मृदा चाहिए।
- चाय, कॉफी, रबड़ और मसाले बागानी फसलें हैं।
