केंद्रीय बैंक और मौद्रिक नीति
NCERT कक्षा 12 • Introductory Macroeconomics • अध्याय "Money and Banking" | NCERT कक्षा 10 • Economics • अध्याय "Money and Credit"
केंद्रीय बैंक और मौद्रिक नीति
केंद्रीय बैंक किसी देश की मौद्रिक और बैंकिंग व्यवस्था की शीर्ष संस्था है। भारत में यह भूमिका भारतीय रिजर्व बैंक निभाता है। यह जनता से सीधा व्यवहार नहीं करता; यह सरकार और बैंकों के साथ काम करता है, तथा अर्थव्यवस्था में मुद्रा और साख की आपूर्ति नियंत्रित करता है।
केंद्रीय बैंक के कार्य
- निर्गम बैंक — इसे करेंसी नोट जारी करने का एकमात्र अधिकार है, जिससे मुद्रा एकरूप और विश्वसनीय रहती है।
- सरकार का बैंकर — यह सरकारी खाते रखता है, भुगतान करता है और सार्वजनिक ऋण का प्रबंध करता है।
- बैंकों का बैंक — वाणिज्यिक बैंक इसके पास आरक्षित निधि रखते हैं और आवश्यकता पर उधार ले सकते हैं।
- अंतिम ऋणदाता — यह अस्थायी नकदी संकट में फंसे सुदृढ़ बैंक को सहारा देता है।
- विदेशी मुद्रा भंडार का संरक्षक — यह भंडार रखता है और मुद्रा का बाह्य मूल्य संभालता है।
- साख नियंत्रक — यह कीमत और वृद्धि का संतुलन रखने के लिए साख बढ़ाता या घटाता है।
- समाशोधन गृह — यह बैंकों के बीच दावों का निपटान करता है।
मौद्रिक नीति के उपकरण
- नकद आरक्षित अनुपात जमा का वह भाग है जो बैंक को केंद्रीय बैंक के पास रखना होता है; इसे बढ़ाने से ऋण देने की क्षमता घटती है।
- वैधानिक तरलता अनुपात जमा का वह भाग है जो बैंक को नकद, स्वर्ण या अनुमोदित प्रतिभूतियों में अपने पास रखना होता है।
- रेपो दर वह दर है जिस पर केंद्रीय बैंक बैंकों को अल्पकाल के लिए उधार देता है; इसे बढ़ाने से साख महंगी होती है।
- रिवर्स रेपो दर वह दर है जिस पर केंद्रीय बैंक बैंकों से उधार लेता है और अतिरिक्त धन सोख लेता है।
- खुले बाजार की क्रियाएं का अर्थ है मुद्रा डालने या सोखने के लिए सरकारी प्रतिभूतियां खरीदना या बेचना।
- बैंक दर वाणिज्यिक बैंकों को केंद्रीय बैंक की दीर्घकालिक ऋण दर है।
- मात्रात्मक उपकरण कुल साख को प्रभावित करते हैं; मार्जिन आवश्यकता जैसे गुणात्मक उपकरण साख को चुने हुए उपयोगों की ओर मोड़ते हैं।
| उपकरण | बढ़ाने का प्रभाव |
|---|---|
| नकद आरक्षित अनुपात | उधार देने को कम धन बचता है |
| रेपो दर | उधार लेना महंगा होता है |
| रिवर्स रेपो दर | बैंक अधिक धन रखते, कम उधार देते हैं |
| खुले बाजार में बिक्री | तंत्र से मुद्रा सोख ली जाती है |
अंतिम ऋणदाता — केंद्रीय बैंक की वह भूमिका जिसमें वह अस्थायी नकदी संकट में फंसे सुदृढ़ बैंक को धन उपलब्ध कराता है।
Exam me kaise aata hai
- नोट जारी करने का एकमात्र अधिकार किसके पास है — केंद्रीय बैंक
- केंद्रीय बैंक की अल्पकालिक ऋण दर कहलाती है — रेपो दर
- केंद्रीय बैंक के पास रखी जमा का भाग कहलाता है — नकद आरक्षित अनुपात
- सरकारी प्रतिभूतियां खरीदना-बेचना कहलाता है — खुले बाजार की क्रियाएं
UPSC/State PSC ke liye
- रेपो दर बढ़ाना बैंकों के लिए धन की लागत बढ़ाकर काम करता है, जो ऋण दरों तक पहुंचकर कुछ विलंब से मांग ठंडी करता है।
- CRR और SLR में अंतर यह है कि निधि कहां और किस रूप में रखी जाती है, इसीलिए दोनों बैंक के तुलन पत्र को अलग ढंग से प्रभावित करते हैं।
Yahan confuse hote hain
✗ केंद्रीय बैंक जनता से जमा लेता है | यह सरकार और बैंकों से व्यवहार करता है, जनता से नहीं | ✓
✗ रेपो दर बढ़ाने से साख सस्ती होती है | इससे साख महंगी होती है | ✓
✗ CRR और SLR एक ही हैं | CRR केंद्रीय बैंक के पास; SLR बैंक स्वयं अपने पास रखता है | ✓
Ek nazar me
- केंद्रीय बैंक नोट जारी करता है और सरकार तथा बैंकों का बैंकर है।
- यह अंतिम ऋणदाता और साख नियंत्रक है।
- उपकरण: CRR, SLR, रेपो, रिवर्स रेपो, बैंक दर, खुले बाजार की क्रियाएं।
- दर बढ़ाने से साख कसती है; घटाने से फैलती है।
