केंद्र-राज्य संबंध और तनाव
NCERT Class 11 - Indian Constitution at Work, Chapter 7
केंद्र-राज्य संबंध और तनाव
केंद्र-राज्य संबंध तीन शीर्षों में आते हैं - विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय। भारत में अधिकांश संघीय टकराव दूसरे और तीसरे से, तथा राज्यपाल के पद और अनुच्छेद 356 के राजनीतिक प्रयोग से उठता है।
तीन प्रकार के संबंध
- विधायी - सातवीं अनुसूची से संचालित, जिसमें केंद्र पहले बताई गई पांच स्थितियों में राज्य विषयों पर कानून बना सकता है, और समवर्ती विषयों पर केंद्र का कानून प्रबल रहता है।
- प्रशासनिक - केंद्र राज्य को कुछ विषयों पर निर्देश दे सकता है, जैसे राष्ट्रीय महत्व के संचार साधनों का निर्माण और रेलवे की सुरक्षा; पालन न करना अनुच्छेद 356 की कार्रवाई का आधार बन सकता है।
- अखिल भारतीय सेवा अधिकारी राज्यों में सेवा देते हैं पर नियंत्रण केंद्र का रहता है, जो स्थायी तनाव का कारण है।
- वित्तीय - अनुच्छेद 280 का वित्त आयोग, जो हर पांच वर्ष में नियुक्त होता है, केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे तथा जरूरतमंद राज्यों को सहायता अनुदान की सिफारिश करता है।
- 101वें संशोधन से जोड़ा गया अनुच्छेद 279क का जीएसटी परिषद अप्रत्यक्ष कर पर निर्णय के लिए केंद्र और राज्यों का साझा मंच है।
- राज्य केंद्रीय अनुदानों और केंद्र प्रायोजित योजनाओं पर भी निर्भर हैं, जिससे राज्य विषयों में भी केंद्र को नीतिगत पकड़ मिलती है।
अनुच्छेद 356 और बोम्मई मामला
- अनुच्छेद 356 राष्ट्रपति को राज्यपाल की रिपोर्ट पर या अन्यथा राज्य सरकार के कार्य अपने हाथ लेने देता है, जब संवैधानिक तंत्र विफल हो जाए।
- घोषणा को दो माह के भीतर दोनों सदनों से स्वीकृति चाहिए और सामान्यतः यह तीन वर्ष से अधिक नहीं चल सकती।
- राज्य सरकारें हटाने के लिए इसके बार-बार राजनीतिक प्रयोग ने इसे सबसे बड़ी संघीय शिकायत बना दिया।
- एस. आर. बोम्मई बनाम भारत संघ, 1994 में उच्चतम न्यायालय ने माना कि घोषणा न्यायिक पुनरावलोकन के अधीन है, सरकार का बहुमत सदन के पटल पर परखा जाए, राजभवन में नहीं, और न्यायालय हटाई गई सरकार बहाल कर सकता है।
- इसी निर्णय ने यह भी माना कि पंथनिरपेक्षता मूल ढांचे का भाग है, और उसके विरुद्ध कार्य करने वाली राज्य सरकार हटाई जा सकती है।
संघीय समन्वय
| निकाय | आधार | कार्य |
|---|---|---|
| अंतर-राज्य परिषद | अनुच्छेद 263 | विवादों पर सलाह और राज्यों तथा केंद्र के बीच नीति समन्वय |
| क्षेत्रीय परिषदें | राज्य पुनर्गठन अधिनियम के अंतर्गत वैधानिक | साझा चिंताओं पर क्षेत्रीय समन्वय |
| वित्त आयोग | अनुच्छेद 280 | कर बंटवारा और सहायता अनुदान |
| जीएसटी परिषद | अनुच्छेद 279क | वस्तु एवं सेवा कर पर साझा निर्णय |
| नीति आयोग | कार्यपालिका संकल्प | नीति मंच, जिसमें मुख्यमंत्री सदस्य होते हैं |
- 1980 के दशक में बना सरकारिया आयोग और बाद में बना पुंछी आयोग, दोनों ने केंद्र-राज्य संबंधों की जांच की और अनुच्छेद 356 के प्रयोग में संयम तथा राज्यपाल नियुक्ति में अधिक परामर्श की सिफारिश की।
- 1980 के दशक के अंत से क्षेत्रीय दलों और गठबंधन सरकारों के उदय ने किसी भी आयोग से अधिक संघीय व्यवहार को मजबूत किया, क्योंकि केंद्र अपने बहुमत के लिए ही राज्य दलों पर निर्भर हो गया।
परीक्षा में कैसे आता है
तथ्यात्मक प्रश्न पूछते हैं कि वित्त आयोग और अंतर-राज्य परिषद किन अनुच्छेदों में हैं, और अनुच्छेद 356 को किस मामले ने सीमित किया। सुमेलित कीजिए में निकाय और उसका संवैधानिक आधार जुड़ता है। व्यावहारिक प्रश्न कोई राजनीतिक स्थिति देकर पूछते हैं कि अनुच्छेद 356 वैध होगा या नहीं।
UPSC / State PSC के लिए
निबंध में सबसे मजबूत तर्क यह है कि भारतीय संघवाद संविधान संशोधन से अधिक राजनीतिक बदलाव से मजबूत हुआ है - गठबंधन राजनीति, क्षेत्रीय दल और बोम्मई निर्णय ने मिलकर केंद्र को कहीं अधिक सावधान बनाया। वित्त पर यह तनाव लिखें कि केंद्र के उपकर और अधिभार बंटते नहीं, जबकि राज्य बड़ा विभाज्य पूल मांगते हैं।
यहां कन्फ्यूज होते हैं
✗ अनुच्छेद 356 की घोषणा को न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती | ✓ बोम्मई ने इसे न्यायिक पुनरावलोकन के अधीन माना
✗ वित्त आयोग हर वर्ष नियुक्त होता है | ✓ यह अनुच्छेद 280 में हर पांच वर्ष में नियुक्त होता है
✗ अंतर-राज्य परिषद वैधानिक निकाय है | ✓ यह अनुच्छेद 263 का संवैधानिक निकाय है
एक नजर में
- संबंध विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय होते हैं।
- अनुच्छेद 280 का वित्त आयोग हर पांच वर्ष में नियुक्त होता है।
- अनुच्छेद 279क का जीएसटी परिषद 101वें संशोधन से आया।
- अनुच्छेद 356 संवैधानिक तंत्र विफल होने पर केंद्रीय नियंत्रण देता है, स्वीकृति दो माह में।
- बोम्मई 1994 ने घोषणा को पुनरावलोकनीय बनाया और पटल परीक्षण अनिवार्य किया।
- अनुच्छेद 263 की अंतर-राज्य परिषद; क्षेत्रीय परिषदें वैधानिक हैं।
- सरकारिया और पुंछी आयोगों ने अनुच्छेद 356 के प्रयोग में संयम की सिफारिश की।
