उद्योगों का वर्गीकरण और स्थिति
NCERT कक्षा 8 • Resources and Development • अध्याय "Industries" | NCERT कक्षा 10 • Contemporary India II • अध्याय "Manufacturing Industries"
उद्योगों का वर्गीकरण और स्थिति
विनिर्माण का अर्थ है कच्चे माल को अधिक मूल्यवान तैयार उत्पाद में बदलना। उद्योग अर्थव्यवस्था का द्वितीयक क्षेत्र है और इसे विकास की रीढ़ माना जाता है क्योंकि यह रोजगार देता है, निर्यात बढ़ाता है और केवल कृषि पर निर्भरता घटाता है।
उद्योगों का वर्गीकरण
- कच्चे माल के स्रोत से: कपास वस्त्र, चीनी और जूट जैसे कृषि आधारित, तथा लोहा-इस्पात, सीमेंट और एल्युमिनियम जैसे खनिज आधारित।
- मुख्य भूमिका से: आधारभूत या कुंजी उद्योग जिनका उत्पाद अन्य उद्योगों में लगता है, जैसे लोहा-इस्पात; तथा उपभोक्ता उद्योग जो सीधे उपयोग की वस्तुएं बनाते हैं, जैसे साबुन और कागज।
- पूंजी निवेश से: लघु स्तर और वृहत स्तर, जिसकी सीमा सरकारी नियमों से तय होती है।
- स्वामित्व से: सार्वजनिक क्षेत्र जो राज्य चलाता है, निजी क्षेत्र, दोनों वाला संयुक्त क्षेत्र, और उत्पादकों के स्वामित्व वाला सहकारी क्षेत्र, जैसे महाराष्ट्र की चीनी सहकारी मिलें।
- माल के भार से: लोहा-इस्पात जैसे भारी उद्योग और विद्युत सामान जैसे हल्के उद्योग।
स्थिति तय करने वाले कारक
- चीनी और लोहा-इस्पात जैसे भार ह्रासी उद्योगों के लिए कच्चा माल सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, इसलिए वे स्रोत के पास बैठते हैं।
- विद्युत आपूर्ति अनिवार्य है क्योंकि अधिकांश आधुनिक उद्योग बिजली पर चलते हैं।
- शीघ्र खराब होने वाले या भारी तैयार माल के लिए बाजार की पहुंच स्थिति तय करती है।
- रेल, सड़क और बंदरगाह के परिवहन संपर्क निवेश और उत्पादन दोनों की लागत घटाते हैं।
- श्रम की उपलब्धता और कौशल वस्त्र तथा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उद्योगों को आकर्षित करते हैं।
- पूंजी, जल और सरकारी नीति इस सूची को पूरा करते हैं; औद्योगिक क्षेत्र और कर छूट संतुलन बदल सकते हैं।
- समूहन (agglomeration) भी महत्वपूर्ण है: कुछ संयंत्र जुटते ही बैंक, मरम्मत दुकानें और आपूर्तिकर्ता आ जाते हैं और और उद्योग खींचते हैं।
- उद्योग और कृषि एक-दूसरे का सहारा हैं; खेत कच्चा माल देते हैं और बदले में मशीन तथा उर्वरक खरीदते हैं।
| आधार | श्रेणियां | उदाहरण |
|---|---|---|
| कच्चा माल | कृषि आधारित, खनिज आधारित | चीनी, सीमेंट |
| भूमिका | आधारभूत, उपभोक्ता | इस्पात, साबुन |
| स्वामित्व | सार्वजनिक, निजी, संयुक्त, सहकारी | सहकारी चीनी मिल |
| भार | भारी, हल्का | इस्पात, विद्युत सामान |
भार ह्रासी उद्योग — वह उद्योग जिसका तैयार उत्पाद कच्चे माल से बहुत हल्का होता है, इसलिए वह कच्चे माल के पास लगता है।
Exam me kaise aata hai
- लोहा-इस्पात किस श्रेणी में आता है — आधारभूत या कुंजी उद्योग
- चीनी और जूट किसके उदाहरण हैं — कृषि आधारित उद्योग
- अर्थव्यवस्था में उद्योग कौन सा क्षेत्र है — द्वितीयक
- सहकारी चीनी मिलें कहां आम हैं — महाराष्ट्र
UPSC/State PSC ke liye
- चीनी मिलें गन्ना खेतों के पास इसलिए लगती हैं कि कटाई के कुछ घंटों में ही गन्ने की शर्करा घटने लगती है, इसलिए भार और समय दोनों स्थिति तय करते हैं।
- बेहतर परिवहन और विद्युत ग्रिड से इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे मुक्त स्थान (footloose) उद्योग लगभग कहीं भी लग सकते हैं और मुख्यतः कुशल श्रम से निर्देशित होते हैं।
Yahan confuse hote hain
✗ विनिर्माण प्राथमिक क्रिया है | विनिर्माण द्वितीयक क्रिया है | ✓
✗ उपभोक्ता उद्योग अन्य उद्योगों को माल देते हैं | आधारभूत उद्योग अन्य उद्योगों को माल देते हैं | ✓
✗ भारी उद्योग का अर्थ केवल बड़ा निवेश है | भारी उद्योग का अर्थ भारी कच्चा माल और उत्पाद है | ✓
Ek nazar me
- उद्योग द्वितीयक क्षेत्र है; विनिर्माण कच्चे माल में मूल्य जोड़ता है।
- वर्गीकरण कच्चे माल, भूमिका, निवेश, स्वामित्व और भार से।
- स्थिति कच्चा माल, विद्युत, बाजार, परिवहन, श्रम और पूंजी पर निर्भर।
- भार ह्रासी उद्योग कच्चे माल के पास लगते हैं।
