जलवायु के नियंत्रक और कारक
NCERT कक्षा 9 • Contemporary India I • अध्याय "Climate" | NCERT कक्षा 11 • India Physical Environment • अध्याय "Climate"
जलवायु के नियंत्रक और कारक
मौसम (weather) किसी स्थान पर एक क्षण की वायुमंडलीय स्थिति है; जलवायु (climate) लंबी अवधि, प्रायः तीस वर्ष या अधिक, के मौसम का औसत है। भारत की जलवायु को उष्णकटिबंधीय मानसूनी कहा जाता है, और छह प्रमुख नियंत्रक मिलकर तय करते हैं कि कोई भाग कितना गर्म, ठंडा या आर्द्र रहेगा।
जलवायु के छह नियंत्रक
- अक्षांश — कर्क रेखा भारत के मध्य से गुजरती है, इसलिए दक्षिण उष्णकटिबंधीय और उत्तर अधिक महाद्वीपीय है।
- ऊंचाई — ऊंचाई के साथ तापमान घटता है, इसीलिए पर्वतीय स्थल ठंडे रहते हैं जबकि नीचे मैदान गर्म रहते हैं।
- दाब और पवन — स्थल और सागर पर दाब का मौसमी उलटाव मानसून चलाता है।
- समुद्र से दूरी — मुंबई जैसे तटीय स्थानों का वार्षिक तापांतर कम होता है; नागपुर जैसे आंतरिक स्थानों का अधिक।
- उच्चावच — हिमालय मध्य एशिया की ठंडी हवाएं रोकता है, और पश्चिमी घाट आर्द्र पवनों को ऊपर उठाकर वर्षा देता है।
- महासागरीय धाराएं — ये तट पर बहने वाली पवनों के ताप और नमी को प्रभावित करती हैं।
भारत की जलवायु के कारक
- हिमालय जलवायु विभाजक का काम करता है, जिससे भारत उसी अक्षांश के अन्य स्थानों से शीत ऋतु में गर्म रहता है।
- ऊपरी वायु की जेट धारा मौसम को दिशा देती है; शीत ऋतु की पछुआ जेट और ग्रीष्म की पूर्वी जेट दोनों महत्वपूर्ण हैं।
- भूमध्यसागर से आने वाले पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम में शीतकालीन वर्षा लाते हैं।
- प्रशांत महासागर की अल नीनो दशा भारत में कमजोर मानसून वर्षों से जुड़ी मानी जाती है।
- तिब्बत का पठार ग्रीष्म में तेजी से गर्म होकर मानसून परिसंचरण बनाने में सहायता करता है।
- थार मरुस्थल शीघ्र गर्म होकर उत्तर-पश्चिम के ग्रीष्मकालीन निम्न दाब को गहरा करता है।
- लंबी तटरेखा और प्रायद्वीपीय आकार भारत के तीन ओर सागर रखते हैं, जिससे तट वर्ष भर सम रहते हैं।
- पश्चिमी घाट आर्द्र पवनों को रोककर एक ओर भारी वर्षा और दूसरी ओर शुष्कता पैदा करता है।
- इन सभी कारकों का मेल ही भारत में इतनी विविध जलवायु दशाएं बनाता है।
| नियंत्रक | भारत में प्रभाव |
|---|---|
| अक्षांश | दक्षिण उष्णकटिबंधीय, उत्तर अधिक महाद्वीपीय |
| ऊंचाई | पर्वतीय स्थल ठंडे, मैदान गर्म |
| समुद्र से दूरी | तट संतुलित, आंतरिक भाग चरम |
| उच्चावच | पवनाभिमुख आर्द्र, पवनविमुख शुष्क |
महाद्वीपीयता (Continentality) — आंतरिक स्थानों की वह प्रवृत्ति जिससे उनकी ग्रीष्म बहुत गर्म और शीत बहुत ठंडी होती है।
Exam me kaise aata hai
- भारत की जलवायु किस प्रकार की है — उष्णकटिबंधीय मानसूनी
- भारत के मध्य से कौन सी रेखा गुजरती है — कर्क रेखा
- उत्तर-पश्चिम भारत में शीतकालीन वर्षा कौन लाता है — पश्चिमी विक्षोभ
- भारत का जलवायु विभाजक कौन सी श्रेणी है — हिमालय
UPSC/State PSC ke liye
- कोरिऑलिस बल भूमध्य रेखा पार करने वाली पवनों को मोड़कर दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक पवनों को दक्षिण-पश्चिम मानसून बना देता है।
- तिब्बत के ताप स्रोत की तीव्रता और पूर्वी जेट की स्थिति मिलकर तय करती हैं कि मानसून कितना जल्दी और कितना प्रबल आएगा।
Yahan confuse hote hain
✗ मौसम और जलवायु एक ही हैं | मौसम अल्पकालिक है, जलवायु दीर्घकालिक औसत | ✓
✗ ऊंचाई बढ़ने से तापमान बढ़ता है | ऊंचाई बढ़ने से तापमान घटता है | ✓
✗ मुंबई का तापांतर नागपुर से अधिक है | नागपुर आंतरिक है, इसलिए उसका तापांतर अधिक है | ✓
Ek nazar me
- छह नियंत्रक: अक्षांश, ऊंचाई, दाब और पवन, समुद्र से दूरी, उच्चावच, महासागरीय धाराएं।
- कर्क रेखा भारत को उष्णकटिबंधीय दक्षिण और उपोष्ण उत्तर में बांटती है।
- हिमालय जलवायु विभाजक है; जेट धाराएं ऋतुओं को दिशा देती हैं।
- पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम में शीतकालीन वर्षा देते हैं।
