औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था और उसकी विरासत
The Colonial Economy and Its Legacy
NCERT कक्षा 11 • Indian Economic Development • अध्याय "Indian Economy on the Eve of Independence"
औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था और उसकी विरासत
स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर भारत की अर्थव्यवस्था ठहरी हुई, पिछड़ी और अत्यधिक कृषि प्रधान थी। औपनिवेशिक नीति ने भारत को कच्चे माल का आपूर्तिकर्ता और ब्रिटिश तैयार माल का बाजार माना, और इसी ने कृषि, हस्तशिल्प, व्यापार तथा बुनियादी ढांचे को आकार दिया।
औपनिवेशिक शासन में कृषि और उद्योग
- कृषि ठहरी हुई थी, उत्पादकता बहुत कम थी और जनसंख्या का बड़ा भाग उस पर निर्भर था।
- भूमि बंदोबस्त प्रणालियों ने राजस्व वसूली को प्राथमिकता दी, इसलिए कृषकों के पास निवेश का न प्रोत्साहन था न साधन।
- किसानों को अपने भोजन के बजाय निर्यात के लिए नील जैसी वाणिज्यिक फसलों की ओर विवश किया गया।
- हस्तशिल्प उद्योग, जिसकी सूती और रेशमी वस्त्र में कभी विश्व प्रतिष्ठा थी, तेजी से गिरा।
- यह विऔद्योगीकरण विदेश में भारतीय माल पर भारी शुल्क, मशीन से बने ब्रिटिश माल के मुक्त प्रवेश, तथा राजसी संरक्षण की समाप्ति से हुआ।
- आधुनिक उद्योग देर से शुरू हुआ, पश्चिमी भारत में सूती वस्त्र और बंगाल में जूट से, और फिर जमशेदपुर का लोहा-इस्पात कारखाना आया।
- सार्वजनिक क्षेत्र बहुत सीमित था और पूंजीगत वस्तु उद्योग लगभग अनुपस्थित था।
व्यापार, बुनियादी ढांचा और जनांकिकी
- विदेश व्यापार पर ब्रिटेन का प्रभुत्व था, और भारत कच्चा माल निर्यात करता तथा तैयार माल आयात करता था।
- बड़ा निर्यात अधिशेष धन नहीं लाया, क्योंकि उससे ब्रिटिश व्यय चुकाए जाते थे, जिसे धन का निकास कहते हैं।
- रेलवे मुख्यतः कच्चा माल बंदरगाह तक और सेना भीतर ले जाने के लिए बना, यद्यपि इसने स्थानीय अलगाव अवश्य तोड़ा।
- साक्षरता बहुत कम थी, जीवन प्रत्याशा छोटी थी और शिशु मृत्यु दर बहुत ऊंची थी।
- इसलिए स्वतंत्रता के समय अर्थव्यवस्था को पूर्ण पुनर्गठन की आवश्यकता थी, और इसीलिए नियोजन अपनाया गया।
- जनसंख्या वृद्धि दर ऊंची थी पर मृत्यु दर भी ऊंची थी, इसलिए कुल वृद्धि धीमी दिखती थी।
- विभाजन ने जूट और कपास के उपजाऊ क्षेत्र दूसरी ओर छोड़ दिए, जिससे उद्योगों को कच्चे माल का संकट हुआ।
| क्षेत्रक | 1947 की स्थिति |
|---|---|
| कृषि | ठहरी, कम उत्पादकता, निवेश नहीं |
| हस्तशिल्प | विऔद्योगीकरण से गिरा |
| आधुनिक उद्योग | छोटा आधार, पूंजीगत वस्तु नहीं |
| सामाजिक सूचक | कम साक्षरता, कम जीवन प्रत्याशा |
धन का निकास — भारत के निर्यात अधिशेष का ब्रिटेन को व्यय और भुगतान के रूप में चला जाना, जिसके बदले कोई वस्तु वापस नहीं आई।
Exam me kaise aata hai
- औपनिवेशिक शासन में भारतीय हस्तशिल्प का पतन कहलाता है — विऔद्योगीकरण
- बिना वापसी प्रवाह के गया निर्यात अधिशेष कहलाता है — धन का निकास
- पहला आधुनिक लोहा-इस्पात कारखाना कहां लगा — जमशेदपुर
- रेलवे मुख्यतः किसकी सेवा के लिए बना — औपनिवेशिक व्यापार और प्रशासन
UPSC/State PSC ke liye
- विऔद्योगीकरण ने कारीगरों को वैकल्पिक रोजगार नहीं छोड़ा, इसलिए वे भूमि पर लौटे, जिससे कृषि पर जनसंख्या का दबाव बढ़ा।
- औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था का निर्यात अधिशेष संरचनात्मक था, शक्ति का संकेत नहीं, क्योंकि वह विदेश भुगतान की आवश्यकता से बना था।
Yahan confuse hote hain
✗ 1947 से पहले भारत में उद्योग था ही नहीं | आधुनिक उद्योग था, पर आधार छोटा और संकीर्ण था | ✓
✗ निर्यात अधिशेष का अर्थ भारत धनी था | अधिशेष ब्रिटिश व्यय चुकाता था, इसलिए धन बाहर गया | ✓
✗ रेलवे भारत के विकास के लिए बना | यह मुख्यतः औपनिवेशिक व्यापार और प्रशासन के लिए बना | ✓
Ek nazar me
- कृषि ठहरी थी और कृषकों को निवेश का प्रोत्साहन नहीं था।
- हस्तशिल्प विऔद्योगीकरण से गिरा।
- निर्यात अधिशेष धन के निकास के रूप में भारत से बाहर गया।
- 1947 में कम साक्षरता, कम जीवन प्रत्याशा और संकीर्ण औद्योगिक आधार।
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