वाणिज्यिक बैंक और साख सृजन
NCERT कक्षा 10 • Economics • अध्याय "Money and Credit" | NCERT कक्षा 12 • Introductory Macroeconomics • अध्याय "Money and Banking"
वाणिज्यिक बैंक और साख सृजन
वाणिज्यिक बैंक जनता से जमा स्वीकार करता है और उस धन को ऋणियों को उधार देता है, तथा एक छोटा भाग आरक्षित रखता है। ऋणियों से लिए गए ब्याज और जमाकर्ताओं को दिए ब्याज का अंतर उसकी मुख्य आय है। इस प्रकार बैंक निष्क्रिय बचत को उत्पादक निवेश में ले जाते हैं।
वाणिज्यिक बैंकों के कार्य
- प्राथमिक कार्य जमा स्वीकार करना और ऋण देना हैं।
- जमा कई प्रकार की होती हैं: दैनिक व्यापार के लिए चालू जमा, परिवारों के लिए बचत जमा, निश्चित अवधि के लिए अधिक ब्याज वाली सावधि जमा, तथा मासिक किस्तों वाली आवर्ती जमा।
- ऋण नकद साख, ओवरड्राफ्ट, सावधि ऋण और बिल भुनाने के रूप में दिए जाते हैं।
- द्वितीयक कार्यों में धन प्रेषण, लॉकर सुविधा, चेक संग्रहण, बीमा और सरकारी योजनाओं की बिक्री आते हैं।
- बैंक ग्राहकों के अभिकर्ता के रूप में उनके बिल चुकाने और प्रतिभूतियां खरीदने का काम भी करते हैं।
- बैंकिंग शाखा बैंकिंग, व्यवसाय प्रतिनिधि और अब मोबाइल तथा इंटरनेट बैंकिंग से फैली है।
साख सृजन और साख के प्रकार
- बैंक जमा का केवल एक अंश नकद रखते हैं क्योंकि सभी जमाकर्ता एक साथ निकासी नहीं करते।
- शेष उधार दिया जाता है, ऋणी उसे खर्च करता है, और वह नई जमा बनकर बैंकिंग तंत्र में लौट आता है, जिसे फिर उधार दिया जा सकता है।
- इस बार-बार की प्रक्रिया से बैंक मूल जमा से कई गुना साख का सृजन करते हैं।
- साख सृजन का आकार आरक्षित अनुपात पर निर्भर है: आरक्षण जितना कम, सृजन उतना अधिक।
- औपचारिक साख बैंकों और सहकारी समितियों से आती है, पर्यवेक्षित रहती है, और उचित दर लेती है।
- अनौपचारिक साख साहूकार, व्यापारी और नियोक्ता से आती है, अपर्यवेक्षित रहती है, और प्रायः बहुत ऊंचा ब्याज लेती है, जो ऋण जाल बना सकती है।
- इसलिए वृद्धि का लाभ व्यापक होने के लिए बैंक साख का छोटे किसानों और छोटे व्यवसायों तक पहुंचना आवश्यक है।
| जमा प्रकार | मुख्य लक्षण |
|---|---|
| चालू | बार-बार लेनदेन, ब्याज नहीं या कम |
| बचत | घरेलू बचत, मध्यम ब्याज |
| सावधि | अवधि तक बंद, अधिक ब्याज |
| आवर्ती | निश्चित अवधि तक मासिक किस्त |
साख सृजन — वह प्रक्रिया जिससे बैंक बार-बार उधार देकर मूल नकद से कई गुना जमा उत्पन्न करते हैं।
Exam me kaise aata hai
- बैंक के प्राथमिक कार्य — जमा स्वीकार करना और ऋण देना
- निश्चित अवधि तक बंद जमा कहलाती है — सावधि जमा
- साहूकार से लिया ऋण क्या है — अनौपचारिक साख
- साख सृजन मुख्यतः किस पर निर्भर है — आरक्षित अनुपात
UPSC/State PSC ke liye
- मुद्रा गुणक आरक्षित अनुपात का व्युत्क्रम है, इसलिए कम अनुपात जमा का अधिक विस्तार होने देता है।
- निर्धनों तक औपचारिक साख बढ़ाना इसलिए महत्वपूर्ण है कि केवल उपलब्धता नहीं, साख की शर्तें तय करती हैं कि ऋण संपत्ति बनाएगा या ऋण जाल।
Yahan confuse hote hain
✗ बैंक सारी जमा उधार दे देते हैं | वे एक अंश आरक्षित रखते हैं और शेष उधार देते हैं | ✓
✗ साख सृजन का अर्थ नोट छापना है | इसका अर्थ बार-बार उधार देकर जमा बढ़ाना है | ✓
✗ अनौपचारिक साख सस्ती होती है | अनौपचारिक साख प्रायः बहुत ऊंचा ब्याज लेती है | ✓
Ek nazar me
- बैंक जमा लेते और ऋण देते हैं; ब्याज का अंतर उनकी आय है।
- जमा: चालू, बचत, सावधि और आवर्ती।
- साख सृजन जमा को गुणा करता है, जिसकी सीमा आरक्षित अनुपात है।
- औपचारिक साख पर्यवेक्षित और सस्ती; अनौपचारिक साख जाल बना सकती है।
