दोनों सदनों का गठन
NCERT Class 11 - Indian Constitution at Work, Chapter 5
दोनों सदनों का गठन
अनुच्छेद 79 कहता है कि संसद राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा से मिलकर बनती है। राष्ट्रपति संसद का अंग हैं, यद्यपि वे किसी सदन में नहीं बैठते, क्योंकि विधेयक उन्हीं की अनुमति से कानून बनता है।
लोकसभा
- इसे जन प्रतिनिधि सदन भी कहते हैं; यह निचला और लोकप्रिय सदन है।
- अनुच्छेद 81 अधिकतम संख्या 550 तय करता है - राज्यों से अधिकतम 530 और संघ राज्यक्षेत्रों से अधिकतम 20।
- सदस्य एकल सदस्यीय क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों से सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार द्वारा सीधे निर्वाचित होते हैं।
- सामान्य कार्यकाल पांच वर्ष है, पर सदन पहले भी भंग हो सकता है, और राष्ट्रीय आपात में संसद कार्यकाल एक बार में एक वर्ष बढ़ा सकती है।
- सदस्यता के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष है।
- अध्यक्ष (स्पीकर) सभापतित्व करते हैं, और उपाध्यक्ष सहायता करते हैं। जी. वी. मावलंकर पहले अध्यक्ष थे।
- अध्यक्ष के पास बराबरी की स्थिति में निर्णायक मत होता है, वे धन विधेयक प्रमाणित करते हैं, संयुक्त बैठक की अध्यक्षता करते हैं, और दल-बदल पर अयोग्यता के प्रश्न तय करते हैं।
राज्यसभा
- इसे राज्यों की परिषद भी कहते हैं; यह राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करती है।
- अधिकतम संख्या 250 है - राज्यों तथा संघ राज्यक्षेत्रों से अधिकतम 238 निर्वाचित, और साहित्य, विज्ञान, कला तथा समाज सेवा में विशेष ज्ञान रखने वालों में से राष्ट्रपति द्वारा 12 मनोनीत।
- राज्यों के सदस्य राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा एकल संक्रमणीय मत से आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति से चुने जाते हैं।
- यह स्थायी सदन है जो कभी भंग नहीं होता; हर दो वर्ष में एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं और हर सदस्य का कार्यकाल छह वर्ष है।
- सदस्यता के लिए न्यूनतम आयु 30 वर्ष है।
- भारत के उपराष्ट्रपति पदेन सभापति होते हैं; उपसभापति सदस्यों में से चुने जाते हैं।
| बिंदु | लोकसभा | राज्यसभा |
|---|---|---|
| अधिकतम संख्या | 550 | 250 |
| निर्वाचन | जनता द्वारा प्रत्यक्ष | राज्य विधानसभाओं द्वारा अप्रत्यक्ष, साथ में 12 मनोनीत |
| कार्यकाल | पांच वर्ष, भंग हो सकती है | स्थायी, हर दो वर्ष में एक-तिहाई सेवानिवृत्त |
| न्यूनतम आयु | 25 वर्ष | 30 वर्ष |
| पीठासीन अधिकारी | अध्यक्ष, जो सदन का सदस्य है | उपराष्ट्रपति, जो सदन के सदस्य नहीं |
| धन विधेयक | आरंभ और निर्णय दोनों | केवल सिफारिश, 14 दिन के भीतर |
राज्यसभा की विशेष शक्तियां
- अनुच्छेद 249 - उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन वाले प्रस्ताव से राज्यसभा संसद को राष्ट्रीय हित में राज्य सूची के विषय पर कानून बनाने का अधिकार दे सकती है, जो एक बार में एक वर्ष के लिए मान्य होता है।
- अनुच्छेद 312 - केवल राज्यसभा ऐसा प्रस्ताव पारित कर सकती है जिससे संसद नई अखिल भारतीय सेवा बना सके।
- दोनों शक्तियां इसलिए हैं कि राज्यसभा राज्यों का प्रतिनिधित्व करती है, इसलिए ऐसे अतिक्रमण की अनुमति राज्यों का अपना सदन ही देता है।
- उपराष्ट्रपति को हटाने का प्रस्ताव राज्यसभा में ही आरंभ होना चाहिए।
परीक्षा में कैसे आता है
तथ्यात्मक प्रश्न दोनों सदनों की अधिकतम संख्या, न्यूनतम आयु, और राष्ट्रपति कितने सदस्य मनोनीत करते हैं, पूछते हैं। सुमेलित कीजिए में अनुच्छेद संख्या और प्रावधान जुड़ते हैं। कथन-आधारित प्रश्न अनुच्छेद 249 और 312 की विशेष शक्तियां जांचते हैं।
UPSC / State PSC के लिए
हर रचना के पीछे का तर्क समझिए - लोकसभा सीधे चुनी जाती है ताकि सरकार जनता के प्रति उत्तरदायी रहे; राज्यसभा स्थायी है ताकि निचले सदन के भंग होने पर भी निरंतरता बनी रहे, और उसकी विशेष शक्तियां इसलिए हैं कि संघीय व्यवस्था में वह राज्यों की ओर से बोलती है।
यहां कन्फ्यूज होते हैं
✗ लोकसभा अध्यक्ष सदन के सदस्य नहीं होते | ✓ अध्यक्ष सदस्य होते हैं; राज्यसभा सभापति नहीं होते
✗ राज्यसभा भी लोकसभा की तरह भंग हो सकती है | ✓ यह स्थायी सदन है और कभी भंग नहीं होती
✗ राष्ट्रपति लोकसभा में 12 सदस्य मनोनीत करते हैं | ✓ 12 मनोनीत सदस्य राज्यसभा में होते हैं
एक नजर में
- अनुच्छेद 79 - संसद में राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा।
- लोकसभा अधिकतम 550, प्रत्यक्ष निर्वाचन, पांच वर्ष कार्यकाल, न्यूनतम आयु 25।
- राज्यसभा अधिकतम 250, जिसमें 238 निर्वाचित और 12 मनोनीत, न्यूनतम आयु 30।
- राज्यसभा स्थायी; हर दो वर्ष में एक-तिहाई सेवानिवृत्त, कार्यकाल छह वर्ष।
- लोकसभा में अध्यक्ष और राज्यसभा में उपराष्ट्रपति पीठासीन होते हैं।
- अनुच्छेद 249 राज्य सूची पर कानून और अनुच्छेद 312 नई अखिल भारतीय सेवा की अनुमति देते हैं।
