संरक्षण परियोजनाएं और कानून
NCERT कक्षा 10 • Science • अध्याय "Forest and Wildlife Resources" | NCERT कक्षा 12 • Biology • अध्याय "Biodiversity and Conservation"
संरक्षण परियोजनाएं और कानून
भारत अपने वन्य जीवन की रक्षा प्रजाति विशेष परियोजनाओं, वनों तथा वन्य जीवों को समेटते विधिक ढांचे, और अंतरराष्ट्रीय समझौतों के मेल से करता है। ये मिलकर संरक्षित क्षेत्र व्यवस्था को उसके नियम, उसका वित्त और वैश्विक प्रयास में उसका स्थान देते हैं।
प्रजाति परियोजनाएं और कानून
- प्रोजेक्ट टाइगर, जो 1973 में शुरू हुआ, बाघ की रक्षा केवल जीव की नहीं बल्कि उसके पूरे आवास की रक्षा करके करता है।
- प्रोजेक्ट एलिफेंट, जो 1992 में शुरू हुआ, हाथी के आवास, प्रवास गलियारों और मनुष्यों से संघर्ष घटाने पर काम करता है।
- एक सींग वाले गैंडे, मगरमच्छ, हिम तेंदुए और ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की परियोजनाएं विशेष चिंता वाली प्रजातियों को संबोधित करती हैं।
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 ने राष्ट्रीय उद्यानों, अभयारण्यों और संरक्षित प्रजातियों की सूचियों का विधिक आधार बनाया।
- वन संरक्षण अधिनियम 1980 वन भूमि के गैर वन उपयोग में परिवर्तन को प्रतिबंधित करता है।
- पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 वायु, जल, भूमि और जीवों की रक्षा का समग्र ढांचा देता है।
- जैव विविधता अधिनियम 2002 जैविक संसाधनों और उनसे जुड़े पारंपरिक ज्ञान तक पहुंच को नियंत्रित करता है।
आवास संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय प्रयास
- आर्द्रभूमियां इसलिए संरक्षित हैं कि वे जल संचित करती, बाढ़ नियंत्रित करती, भूजल भरती और प्रवासी पक्षियों को आश्रय देती हैं।
- रामसर अभिसमय अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों के संरक्षण का अंतरराष्ट्रीय समझौता है।
- मैंग्रोव और प्रवाल भित्तियों पर विशेष ध्यान है क्योंकि वे तट की रक्षा करते और बहुत ऊंची समुद्री विविधता को सहारा देते हैं।
- तटीय विनियमन तटरेखा के पास निर्माण और गतिविधि को सीमित करता है।
- CITES संकटग्रस्त प्रजातियों और उनके उत्पादों के व्यापार को नियंत्रित करने वाला अंतरराष्ट्रीय समझौता है।
- जैव विविधता अभिसमय देशों को विविधता संरक्षित करने, उसका संधारणीय उपयोग करने और लाभ का न्यायसंगत बंटवारा करने के लिए बाध्य करता है।
- संरक्षण वहीं सफल होता है जहां स्थानीय समुदायों को उससे लाभ मिले, इसीलिए अब जीविका और संरक्षण की योजना साथ बनाई जाती है।
| परियोजना या कानून | वर्ष | उद्देश्य |
|---|---|---|
| प्रोजेक्ट टाइगर | 1973 | बाघ और उसके आवास की रक्षा |
| वन्यजीव संरक्षण अधिनियम | 1972 | संरक्षित क्षेत्रों का विधिक आधार |
| वन संरक्षण अधिनियम | 1980 | वन भूमि के परिवर्तन पर रोक |
| प्रोजेक्ट एलिफेंट | 1992 | हाथी का आवास और गलियारे |
रामसर अभिसमय — अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों के संरक्षण और विवेकपूर्ण उपयोग का अंतरराष्ट्रीय समझौता।
Exam me kaise aata hai
- प्रोजेक्ट टाइगर कब शुरू हुआ — 1973
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम कब पारित हुआ — 1972
- आर्द्रभूमि पर अंतरराष्ट्रीय समझौता कौन सा है — रामसर अभिसमय
- संकटग्रस्त प्रजातियों का व्यापार कौन नियंत्रित करता है — CITES
UPSC/State PSC ke liye
- बाघ जैसे शीर्ष परभक्षी की रक्षा उसके नीचे के पूरे पारितंत्र की रक्षा कर देती है, इसीलिए प्रजाति परियोजनाएं व्यवहार में आवास परियोजनाएं हैं।
- जो संरक्षण स्थानीय जीविका की उपेक्षा करता है वह संघर्ष पैदा करता है, इसलिए लाभ बंटवारा शिष्टाचार नहीं बल्कि कार्यक्रम के चलने की शर्त है।
Yahan confuse hote hain
✗ प्रोजेक्ट टाइगर केवल बाघ की रक्षा करता है | यह बाघ के पूरे आवास की रक्षा करता है | ✓
✗ रामसर और CITES एक ही विषय समेटते हैं | रामसर आर्द्रभूमि; CITES संकटग्रस्त प्रजातियों का व्यापार समेटता है | ✓
✗ प्रोजेक्ट एलिफेंट प्रोजेक्ट टाइगर से पहले आया | प्रोजेक्ट टाइगर 1973 और प्रोजेक्ट एलिफेंट 1992 में आया | ✓
Ek nazar me
- प्रोजेक्ट टाइगर 1973 और प्रोजेक्ट एलिफेंट 1992 आवास की रक्षा करते हैं, केवल जीव की नहीं।
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 और वन संरक्षण अधिनियम 1980 विधिक ढांचा देते हैं।
- आर्द्रभूमि रामसर के अंतर्गत; संकटग्रस्त प्रजातियों का व्यापार CITES के अंतर्गत।
- संरक्षण तभी सफल है जब स्थानीय समुदाय उसके लाभ में भागीदार हों।
Ab practice karein
Biodiversity aur conservation se har exam me date aur project based questions aate hain. ExamAtlas ke mock test se abhi jaanchein.
