परंपरागत और गैर-परंपरागत ऊर्जा
NCERT कक्षा 8 • Resources and Development • अध्याय "Mineral and Power Resources" | NCERT कक्षा 10 • Contemporary India II • अध्याय "Minerals and Energy Resources"
परंपरागत और गैर-परंपरागत ऊर्जा
ऊर्जा संसाधन परंपरागत स्रोतों जैसे कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, ईंधन लकड़ी और जल विद्युत, तथा गैर-परंपरागत स्रोतों जैसे सौर, पवन, ज्वारीय, भूतापीय और बायोगैस में बंटे हैं। परंपरागत ईंधन समाप्य और प्रदूषणकारी हैं, इसलिए गैर-परंपरागत स्रोत बढ़ाए जा रहे हैं।
परंपरागत स्रोत
- कोयला भारत का सर्वाधिक प्रचुर जीवाश्म ईंधन और तापीय विद्युत का मुख्य स्रोत है।
- कार्बन अंश के अनुसार इसकी श्रेणियां हैं पीट, फिर लिग्नाइट या भूरा कोयला, फिर बिटुमिनस, और अंत में एंथ्रेसाइट, जो सबसे कठोर और सर्वाधिक कार्बन वाला है।
- गोंडवाना कोयला पुराना और बेहतर है, जो झारखंड और पश्चिम बंगाल की दामोदर घाटी तथा गोदावरी, महानदी और सोन घाटियों में मिलता है।
- टर्शियरी कोयला नया है और पूर्वोत्तर में मिलता है।
- पेट्रोलियम अवसादी चट्टान के अपनतियों और भ्रंश जालों में मिलता है; मुंबई हाई, गुजरात और असम का डिगबोई प्रसिद्ध क्षेत्र हैं।
- प्राकृतिक गैस अधिक स्वच्छ है और ईंधन तथा औद्योगिक कच्चे माल दोनों रूप में काम आती है; कृष्णा गोदावरी बेसिन महत्वपूर्ण स्रोत है।
- जल विद्युत गिरते जल से बनती है, नवीकरणीय है, पर इसके लिए बड़े बांध चाहिए और लोग विस्थापित होते हैं।
- नाभिकीय ऊर्जा यूरेनियम और थोरियम से बनती है; केरल की मोनाजाइट बालू में भारत के पास बड़े थोरियम भंडार हैं।
| कोयला श्रेणी | कार्बन अंश | गुणवत्ता |
|---|---|---|
| पीट | न्यूनतम | निम्न, अधिक नमी |
| लिग्नाइट | कम | भूरा कोयला, मुलायम |
| बिटुमिनस | अधिक | सर्वाधिक प्रयुक्त, अच्छी गुणवत्ता |
| एंथ्रेसाइट | सर्वाधिक | सबसे कठोर और सर्वोत्तम |
गैर-परंपरागत स्रोत
- सौर ऊर्जा भारत के अनुकूल है क्योंकि अधिकांश क्षेत्रों में वर्ष के बड़े भाग में स्वच्छ धूप मिलती है; गुजरात और राजस्थान में बड़ी सौर क्षमता है।
- पवन ऊर्जा के लिए स्थिर पवन चाहिए; तमिलनाडु, गुजरात, कर्नाटक और महाराष्ट्र पवन फार्म में आगे हैं।
- गोबर और कृषि अपशिष्ट से बनी बायोगैस ग्रामीण घरों को स्वच्छ ईंधन देती है और सीधे जलाने से बेहतर खाद छोड़ती है।
- ज्वारीय ऊर्जा के लिए चौड़ी कीप जैसी खाड़ी चाहिए, इसलिए खंभात की खाड़ी और कच्छ की खाड़ी उपयुक्त हैं।
- भूतापीय ऊर्जा पृथ्वी के भीतर की ऊष्मा से बनती है, जैसे हिमाचल प्रदेश की मणिकरण परियोजना।
- गैर-परंपरागत स्रोत स्वच्छ, नवीकरणीय और बिखरी ग्रामीण बस्तियों के अनुकूल हैं।
- इनकी कमियां अधिक प्रारंभिक लागत तथा मौसम और स्थान पर निर्भरता हैं।
- कुशल उपकरणों से ऊर्जा बचाना प्रायः नई क्षमता जोड़ने से सस्ता पड़ता है।
गैर-परंपरागत ऊर्जा — सूर्य, पवन, ज्वार और जैव पदार्थ जैसे नवीकरणीय स्रोतों से मिली ऊर्जा, जो उपयोग से समाप्त नहीं होती।
Exam me kaise aata hai
- कोयले की सर्वोत्तम श्रेणी — एंथ्रेसाइट
- डिगबोई तेल क्षेत्र कहां है — असम
- केरल की मोनाजाइट बालू में क्या है — थोरियम
- ज्वारीय ऊर्जा के लिए सर्वाधिक उपयुक्त — खंभात और कच्छ की खाड़ी
UPSC/State PSC ke liye
- भारत का त्रि-चरणीय नाभिकीय कार्यक्रम उसके बड़े थोरियम और सीमित यूरेनियम भंडारों को ध्यान में रखकर बना है।
- सौर और पवन स्वभाव से परिवर्तनशील हैं, इसलिए भंडारण और ग्रिड संतुलन तय करते हैं कि तंत्र इन्हें कितना ग्रहण कर सकेगा।
Yahan confuse hote hain
✗ लिग्नाइट बिटुमिनस से बेहतर है | बिटुमिनस बेहतर है; लिग्नाइट मुलायम भूरा कोयला है | ✓
✗ गोंडवाना कोयला पूर्वोत्तर में मिलता है | गोंडवाना कोयला दामोदर और सोन घाटी में; टर्शियरी पूर्वोत्तर में | ✓
✗ जल विद्युत गैर-परंपरागत है | जल विद्युत नवीकरणीय होते हुए भी परंपरागत स्रोत है | ✓
Ek nazar me
- परंपरागत: कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, ईंधन लकड़ी, जल विद्युत।
- कोयला श्रेणियां: पीट, लिग्नाइट, बिटुमिनस, एंथ्रेसाइट।
- दामोदर घाटी में गोंडवाना कोयला; पूर्वोत्तर में टर्शियरी कोयला।
- गैर-परंपरागत: सौर, पवन, बायोगैस, ज्वारीय, भूतापीय।
